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Ghazipur News: कोर्ट में पेश हुए पूर्णिया सांसद, 50 हजार के निजी बंधपत्र पर रिहा
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गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश एमपी/एमएलए शक्ति सिंह की अदालत में बृहस्पतिवार को बिहार के पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव हाजिर हुए। न्यायालय ने उनके प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए गैर जमानती वारंट को निरस्त कर 50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर रिहा कर दिया। जबकि दस अन्य आरोपियों के अधिवक्ता ने गैर हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय ने बहस के लिए चार दिसंबर की तिथि नियत की है।
मालूम हो कि बीते 8 नवंबर 1993 को मुहम्मदाबाद थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष वीएन सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्हें सूचना मिली कि बिहार प्रांत के दो विधायक पप्पू यादव और उमेश पासवान अपने साथ काफी संख्या में अवांछनीय तत्वों लेकर उत्तर प्रदेश में अपने विरोधी राजनीतिक दलों के चुनाव सभाओं में गड़बड़ी उत्पन्न करने के लिए उजियार घाट की ओर से होते हुए इस जनपद में प्रवेश करने वाले हैं। इस बात का विश्वास करके वह पुलिस टीम के साथ पहुंचे। सभी को चुनाव व शांति व्यवस्था से अवगत करने के बाद मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश किया था। वहां विचारण के बाद मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पूर्व में सभी आरोपियों को 31 जुलाई 2023 को दोषमुक्त कर दिया था। अभियोजन ने उक्त आदेश के विरुद्ध जिला जज के न्यायालय में 6 सितंबर 2023 को अपील दाखिल की थी। जिला जज की अदालत ने मामले को एमपी/एमएलए की अदालत में सुनवाई के लिए भेज दिया था। वहां पर पत्रवाली अपील बहस में चल रही है। बार- बार पुकार पड़ने पर आरोपियों की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हो रहा था। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सहित 11 लोगों के विरुद्ध गैरजमानती वारंट 22 अक्तूबर को जारी करते हुए 4 नवंबर को नियत की थी। दस आरोपी इस मुकदमे में हाजिर हो गए और गैरजमानती वारंट निरस्त करा लिए, लेकिन पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव हाजिर नहीं हुए थे। न्यायालय ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार कर मुहम्मदाबाद प्रभारी निरीक्षक को स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया था। न्यायालय के सख्त रुख पर पूर्णिया सांसद अदालत में पेश हुए और प्रार्थनापत्र दिया। इसे स्वीकार करते हुए अदालत ने गैर जमानती वारंट निरस्त करते हुए निजी बंधपत्र पर उन्हें रिहा कर दिया। साथ ही बहस के लिए 4 दिसंबर तिथि नियत की है।
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मालूम हो कि बीते 8 नवंबर 1993 को मुहम्मदाबाद थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष वीएन सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्हें सूचना मिली कि बिहार प्रांत के दो विधायक पप्पू यादव और उमेश पासवान अपने साथ काफी संख्या में अवांछनीय तत्वों लेकर उत्तर प्रदेश में अपने विरोधी राजनीतिक दलों के चुनाव सभाओं में गड़बड़ी उत्पन्न करने के लिए उजियार घाट की ओर से होते हुए इस जनपद में प्रवेश करने वाले हैं। इस बात का विश्वास करके वह पुलिस टीम के साथ पहुंचे। सभी को चुनाव व शांति व्यवस्था से अवगत करने के बाद मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने आरोप पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश किया था। वहां विचारण के बाद मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पूर्व में सभी आरोपियों को 31 जुलाई 2023 को दोषमुक्त कर दिया था। अभियोजन ने उक्त आदेश के विरुद्ध जिला जज के न्यायालय में 6 सितंबर 2023 को अपील दाखिल की थी। जिला जज की अदालत ने मामले को एमपी/एमएलए की अदालत में सुनवाई के लिए भेज दिया था। वहां पर पत्रवाली अपील बहस में चल रही है। बार- बार पुकार पड़ने पर आरोपियों की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हो रहा था। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सहित 11 लोगों के विरुद्ध गैरजमानती वारंट 22 अक्तूबर को जारी करते हुए 4 नवंबर को नियत की थी। दस आरोपी इस मुकदमे में हाजिर हो गए और गैरजमानती वारंट निरस्त करा लिए, लेकिन पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव हाजिर नहीं हुए थे। न्यायालय ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार कर मुहम्मदाबाद प्रभारी निरीक्षक को स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया था। न्यायालय के सख्त रुख पर पूर्णिया सांसद अदालत में पेश हुए और प्रार्थनापत्र दिया। इसे स्वीकार करते हुए अदालत ने गैर जमानती वारंट निरस्त करते हुए निजी बंधपत्र पर उन्हें रिहा कर दिया। साथ ही बहस के लिए 4 दिसंबर तिथि नियत की है।
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