{"_id":"610589578ebc3eba7b0e79cc","slug":"premchand-not-only-created-the-values-of-life-but-also-created-it-ghazipur-news-vns603561975","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन मूल्यों को रचा ही नहीं बल्कि अपने जीवन के माध्यम से उसे गढ़ा भी प्रेमचंद ने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन मूल्यों को रचा ही नहीं बल्कि अपने जीवन के माध्यम से उसे गढ़ा भी प्रेमचंद ने
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग की ओर से शनिवार को कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। इस दौरान मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. रविकांत ने कहा कि प्रेमचंद ने जीवन मूल्यों को रचा ही नहीं बल्कि उसे गढ़ा भी है। लेखनी और जीवन में ऐसी समानता अन्य जगह दुर्लभ है। हिंदी के विद्यार्थियों को ‘कलम का सिपाही’ के साथ शिवरानी देवी कृत ‘प्रेमचंद घर में’ अवश्य पढ़नी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में भारतीय समाज एवं व्यवस्था का सच एवं संकट केंद्रीय विषय रहा है। उनकी हर रचना में मानवीयता का पक्ष मिलता है। डॉ. निरंजन कुमार यादव ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी के बहु पठित लेखक हैं। उनकी ख्याति का एक कारण यह भी है कि वह सिर्फ हिंदी के ही नहीं भारतीय साहित्य के भी महत्वपूर्ण लेखक हैं। डॉ. संगीता ने कहा कि स्त्री, दलित और किसान जीवन से जुड़े मुद्दे जब तक बने रहेंगे तब तक प्रेमचंद की प्रासंगिकता बनी रहेगी। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से एक अति विस्तृत संसार को रचा है।
प्राचार्य डॉ. सविता भारद्वाज ने कहा कि प्रेमचंद के आदर्शों को अपनाकर ही हम सुखी हो सकते हैं। मीडिया प्रभारी डॉ. शिवकुमार ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी के ही नहीं गैर हिंदी भाषी लोगों के भी प्रिय लेखक हैं। डॉ. शशिकला जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद ने कथा साहित्य में जो लकीर खींची है अब भी उसके आगे कोई नहीं बढ़ पाया। इस अवसर पर डॉ. संतन कुमार राम, डॉ. सारिका सिंह, डॉ. उमाशंकर, श्वेता यादव, माधुरी राय, डॉ. अतुल यादव, कुलभूषण मौर्य, राकेश चौरसिया आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे प्रेमचंद
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से सरजू पांडेय पार्क में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। अध्यक्षता करते हुए महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखक ही नहीं वह एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। वे हमेशा समाज में व्याप्त कुरीतियों, कुप्रथाओं के खिलाफ संघर्ष करते रहे। वे साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारने वाले लेखक थे। आज जब देश में जाति और धर्म के नाम पर नफरत फ़ैलाने की कोशिश हो रही है ऐसे दौर में मुंशी प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक हो उठे हैं। इस अवसर पर कौशल श्रीवास्तव, परमानंद श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, अमर सिंह राठौर, विवेक श्रीवास्तव, आनंद श्रीवास्तव, गौरव श्रीवास्तव, अमरनाथ श्रीवास्तव, अरुण सहाय, राजेश कुमार श्रीवास्तव, आशुतोष श्रीवास्तव, कमल श्रीवास्तव, अश्विनी कुमार श्रीवास्तव, नन्हे, नवीन श्रीवास्तव, इंद्रजीत आदि उपस्थित थे। संचालन जिला महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में भारतीय समाज एवं व्यवस्था का सच एवं संकट केंद्रीय विषय रहा है। उनकी हर रचना में मानवीयता का पक्ष मिलता है। डॉ. निरंजन कुमार यादव ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी के बहु पठित लेखक हैं। उनकी ख्याति का एक कारण यह भी है कि वह सिर्फ हिंदी के ही नहीं भारतीय साहित्य के भी महत्वपूर्ण लेखक हैं। डॉ. संगीता ने कहा कि स्त्री, दलित और किसान जीवन से जुड़े मुद्दे जब तक बने रहेंगे तब तक प्रेमचंद की प्रासंगिकता बनी रहेगी। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से एक अति विस्तृत संसार को रचा है।
विज्ञापन
प्राचार्य डॉ. सविता भारद्वाज ने कहा कि प्रेमचंद के आदर्शों को अपनाकर ही हम सुखी हो सकते हैं। मीडिया प्रभारी डॉ. शिवकुमार ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी के ही नहीं गैर हिंदी भाषी लोगों के भी प्रिय लेखक हैं। डॉ. शशिकला जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद ने कथा साहित्य में जो लकीर खींची है अब भी उसके आगे कोई नहीं बढ़ पाया। इस अवसर पर डॉ. संतन कुमार राम, डॉ. सारिका सिंह, डॉ. उमाशंकर, श्वेता यादव, माधुरी राय, डॉ. अतुल यादव, कुलभूषण मौर्य, राकेश चौरसिया आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे प्रेमचंद
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से सरजू पांडेय पार्क में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। अध्यक्षता करते हुए महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखक ही नहीं वह एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। वे हमेशा समाज में व्याप्त कुरीतियों, कुप्रथाओं के खिलाफ संघर्ष करते रहे। वे साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारने वाले लेखक थे। आज जब देश में जाति और धर्म के नाम पर नफरत फ़ैलाने की कोशिश हो रही है ऐसे दौर में मुंशी प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक हो उठे हैं। इस अवसर पर कौशल श्रीवास्तव, परमानंद श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, अमर सिंह राठौर, विवेक श्रीवास्तव, आनंद श्रीवास्तव, गौरव श्रीवास्तव, अमरनाथ श्रीवास्तव, अरुण सहाय, राजेश कुमार श्रीवास्तव, आशुतोष श्रीवास्तव, कमल श्रीवास्तव, अश्विनी कुमार श्रीवास्तव, नन्हे, नवीन श्रीवास्तव, इंद्रजीत आदि उपस्थित थे। संचालन जिला महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने किया।