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फोटो: घट रहा बाढ़ का पानी, शुरू नहीं हुआ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव
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बाढ़ का पानी लगातार घट रहा है। एक ओर जिंदगी पटरी पर लौटते हुए दिखाई दे रही है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों को अब संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सता रहा है। इसकी वजह, यह है कि अब तक ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव शुरू नहीं किया गया है। वहीं गंगा का जलस्तर डेढ़ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है।
गंगा का जलस्तर शुक्रवार को 61.230 मीटर दर्ज किया गया। 24 जुलाई को गंगा का जलस्तर 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा था। इस वजह से गंगा का जलस्तर 61.640 मीटर दर्ज किया गया था। वर्तमान में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से नीचे है। वहीं कटान का कहर जारी है। भांवरकोल क्षेत्र के मुबारकपुर मौजा से गहमर सिवान तक एक बीघा भूमि कटान के कारण गंगा में समाहित हो गई। गहमर : रेवतीपुर-नगदीलपुर-गहमर बाइपास मार्ग पर कई जगहों पर रुका हुआ पानी अब पूरी तरह से उतर गया है। जिससे आवागमन पूर्ण रुप से सुचारु हो गया है। हालांकि अभी भी हसनपुरा, वीरऊपुर, नसीरपुर जैसे कई गांवों के मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा हुआ है। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हसनपुरा, वीरऊपुर, नसीरपुर गांव में अब तक ब्लीचिंग व दवाओं का छिड़काव शुरू नहीं किया गया है। ठहरे हुए पानी के सड़ांध के कारण ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। उनको संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन अगर तत्पर होता, तो अब तक दवाओं व ब्लीचिंग का छिड़काव शुरू कर दिया गया होता। तहसीलदार सेवराई सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ के पानी में तेजी से कमी हो रही है। जल्द ही गांवों की डूबी सड़कें खाली हो जाएंगी। साथ ही ब्लीचिंग वगैरह का छिड़काव भी कराया जाएगा।
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गंगा का जलस्तर शुक्रवार को 61.230 मीटर दर्ज किया गया। 24 जुलाई को गंगा का जलस्तर 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा था। इस वजह से गंगा का जलस्तर 61.640 मीटर दर्ज किया गया था। वर्तमान में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से नीचे है। वहीं कटान का कहर जारी है। भांवरकोल क्षेत्र के मुबारकपुर मौजा से गहमर सिवान तक एक बीघा भूमि कटान के कारण गंगा में समाहित हो गई। गहमर : रेवतीपुर-नगदीलपुर-गहमर बाइपास मार्ग पर कई जगहों पर रुका हुआ पानी अब पूरी तरह से उतर गया है। जिससे आवागमन पूर्ण रुप से सुचारु हो गया है। हालांकि अभी भी हसनपुरा, वीरऊपुर, नसीरपुर जैसे कई गांवों के मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा हुआ है। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हसनपुरा, वीरऊपुर, नसीरपुर गांव में अब तक ब्लीचिंग व दवाओं का छिड़काव शुरू नहीं किया गया है। ठहरे हुए पानी के सड़ांध के कारण ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। उनको संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन अगर तत्पर होता, तो अब तक दवाओं व ब्लीचिंग का छिड़काव शुरू कर दिया गया होता। तहसीलदार सेवराई सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ के पानी में तेजी से कमी हो रही है। जल्द ही गांवों की डूबी सड़कें खाली हो जाएंगी। साथ ही ब्लीचिंग वगैरह का छिड़काव भी कराया जाएगा।
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