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Ghazipur News: 300 बेड के नए अस्पताल में एक साल बाद भी न शुरू हो सकी जांच न वार्ड
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गाजीपुर। शहर के गोराबाजार स्थित नवनिर्मित 300 बेड के अस्पताल के वार्ड का संचालन एक वर्ष बाद भी नहीं हो सका है। ओपीडी, पर्ची काउंटर और दवा वितरण कार्य आठ माह पूर्व ही शुरू हो गया, लेकिन जांच और वार्ड में भर्ती होने के लिए मरीजों को पुराने अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है। इधर, मेडिकल कॉलेज प्रशासन कभी शासन से बेड नहीं मिलने तो कभी जरूरी अन्य सामानों के उपलब्ध न होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ ले रहा है।
इसका खामियाजा यहां उपचार कराने आने वाले मरीजों एवं उनके तीमारदारों को उठानी पड़ रही है। दिलचस्प यह है कि गंभीर बीमारी वाले मरीजों को ओपीडी तक लाने के लिए तीमारदारों को स्ट्रेचर से 200 बेड के पुराने अस्पताल से 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ती है। जांच के लिए भी पुराने अस्पताल में लैब तक जाना पड़ता है। जबकि सात मंजिला भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक वार्ड का संचालन न होने से मरीजों को आए दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इस संबंध में महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि वार्ड संचालन को लेकर तैयारी चल रही है। कुछ तकनीकी दिक्कत है, जिसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। इसके संचालन में अभी एक से दो माह लग सकता है।
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नवनिर्मित भवन में वार्ड का संचालन न होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि ओपीडी तक मरीज को ले जाने में कई बार सोचना पड़ता है। अगर एक ही छत के नीचे सब व्यवस्था हो जाती है, तो काफी सुविधा रहती। - रजनीश कुमार, किशनपुरा
भवन पूर्ण हो चुका है, लेकिन अब तक वार्ड का संचालन नहीं किया जा सका है। ऐसे में ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के बाद जांच के लिए पुराने भवन तक भाग दौड़ करनी पड़ती है।- सुखारी, नौकापुरा
स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की दरकार है। पूर्व में व्यवस्था थी ठीक था, लेकिन ओपीडी, पर्ची काउंटर और दवा की व्यवस्था दूसरे भवन में जाने से दिक्कत हो रही है। - भवानी देवी, ददरीघाट
पुराने भवन में आपातकक्ष में पहुंचा तो वहां चिकित्सक ने देखने से मना कर दिया। मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।- मुहम्मद नसीर हासमी, पखनपुरा।
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इसका खामियाजा यहां उपचार कराने आने वाले मरीजों एवं उनके तीमारदारों को उठानी पड़ रही है। दिलचस्प यह है कि गंभीर बीमारी वाले मरीजों को ओपीडी तक लाने के लिए तीमारदारों को स्ट्रेचर से 200 बेड के पुराने अस्पताल से 300 बेड के नवनिर्मित अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ती है। जांच के लिए भी पुराने अस्पताल में लैब तक जाना पड़ता है। जबकि सात मंजिला भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक वार्ड का संचालन न होने से मरीजों को आए दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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इस संबंध में महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि वार्ड संचालन को लेकर तैयारी चल रही है। कुछ तकनीकी दिक्कत है, जिसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। इसके संचालन में अभी एक से दो माह लग सकता है।
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नवनिर्मित भवन में वार्ड का संचालन न होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि ओपीडी तक मरीज को ले जाने में कई बार सोचना पड़ता है। अगर एक ही छत के नीचे सब व्यवस्था हो जाती है, तो काफी सुविधा रहती। - रजनीश कुमार, किशनपुरा
भवन पूर्ण हो चुका है, लेकिन अब तक वार्ड का संचालन नहीं किया जा सका है। ऐसे में ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के बाद जांच के लिए पुराने भवन तक भाग दौड़ करनी पड़ती है।- सुखारी, नौकापुरा
स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की दरकार है। पूर्व में व्यवस्था थी ठीक था, लेकिन ओपीडी, पर्ची काउंटर और दवा की व्यवस्था दूसरे भवन में जाने से दिक्कत हो रही है। - भवानी देवी, ददरीघाट
पुराने भवन में आपातकक्ष में पहुंचा तो वहां चिकित्सक ने देखने से मना कर दिया। मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।- मुहम्मद नसीर हासमी, पखनपुरा।