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Ghazipur News: नौ साल काल कोठरी में बिताए थे क्रांतिकारी सरजू पांडेय ने

Wed, 19 Nov 2025 01:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Nov 2025 01:58 AM IST
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On the instructions of the SP, an FIR was lodged against six people.
पूर्व सांसद सरजू पांडेय। स्रोत- परिजन
स्वतंत्रता सेनानी जननेता सरजू पाण्डेय की 106वीं जयंती पर विशेष नौ साल कालकोठरी में बिताए थे क्रांतिकारी सरजू पाण्डेय
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सरजू पाण्डेय गाजीपुर ही नहीं पूर्वांचल के महान नेता थे। स्वतंत्रता संग्राम और उसके बाद किसान आंदोलन में उनका कार्यक्षेत्र रसड़ा, बलिया, मऊ और गाजीपुर रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में उन्हें 42 साल की सजा हुई थी। चार अगस्त 1973 को जिला मजिस्ट्रेट गाजीपुर देवी दयाल की ओर से जारी प्रमाणपत्र के मुताबिक सरजू पाण्डेय ने साढ़े तीन साल कैद और 15 बेंत की सजा काटी थी। इस दौरान वह गाजीपुर, बस्ती, वाराणसी और लखनऊ की जेलों में बंद रहे। 5 मार्च 1965 को संसद में धारा-109 क्रिमिनल अंमेंडमेंट बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने संसद में कहा था कि स्वतंत्रता आंदोलन के अलावा वह कुल छह साल विभिन्न राजनीतिक मुकदमों में जेल में रही। दोनों सजाओं को मिला कर उन्होंने कुल नौ साल जेल में रहे।
1937 में पाली गांव में आए स्वामी सहजानंद से वह प्रभावित रहे। इसके बाद किसानों और खेत मजदूरों की लड़ाई तेज कर दी। जनसमस्याओं पर मुखर होने के कारण वह बहुत लोकप्रिय हो गए। इसके बाद वह 1957 में भाकपा के बैनर तले लोकसभा और मुहम्मदाबाद विस का चुनाव एक साथ जीत कर सभी को चौंका दिए। उनके सदन में पहुंचने से पहले ही उनकी कीर्ति पहुंच गई थी। भरी संसद में नेहरू ने पूछा कि कौन है सरजू पाण्डेय जो एक साथ दो चुनाव जीत कर आए हैं। तब उन्होंने पीछे से हाथ उठाकर बताया कि मैं हूं सरजू पाण्डेय। सरजू पाण्डेय की चर्चा इसलिए भी अधिक थी कि वह नेहरू के मित्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के दामाद शौकतउल्लाह अंसारी को हरा कर पहुंचे थे। उसके बाद नेहरू सरजू पाण्डेय से प्रभावित हुए। कई बार कांग्रेस में शामिल होकर मंत्री पद का प्रस्ताव दिया था। इसे सरजू पाण्डेय ने विनम्रता से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा क वह समाज में गैर बराबरी को खत्म करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। किसी पद को पाने की उनकी कोई लालसा नहीं है।
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चार बार सांसद और 10 साल विधान परिषद के सदस्य रहने पर फक्कड़ जीवनशैली
वह 57 से 67 तक रसड़ा और 67 से लेकर 77 तक गाजीपुर से लोकसभा के सदस्य रहे। 77 के बाद हुए आम चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह 89 तक विप के सदस्य रहे। करीब 30 के साल के सार्वजनिक जीवन में रहने के बाद भी उन्होंने कोई निजी संपत्ति नहीं बनाई। अत्यंत साधारण जीवन जीते रहे। उनका कहना था कि नेता की कथनी और करनी में भेद नहीं होना चाहिए। एक अनोखा कामरेड में उनके छोटे बेटे भानू प्रकाश ने लिखा है कि एक बार एक केंद्रीय मंत्री ने खुद से उन्हें पेट्रोल पंप देने की पेशकश की। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कहा कि लोग कहेंगे कि सरजू पाण्डेय की कथनी और करनी में अंतर है। यह मैं नहीं चाहता।
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