{"_id":"6ac1593cc034227158020c29","slug":"observed-the-jivitputrika-vrat-after-bathing-in-the-ganges-for-the-long-life-of-ones-children-ghazipur-news-c-313-1-gzp1020-161441-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: संतान की दीर्घायु के लिए गंगा स्नान कर रखा जीवित्पुत्रिका व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: संतान की दीर्घायु के लिए गंगा स्नान कर रखा जीवित्पुत्रिका व्रत
विज्ञापन
जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद
जमानिया। संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना का तीन दिवसीय जीवित्पुत्रिका पर्व शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। पर्व के दूसरे दिन बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान किया।
पूजन-अर्चन के बाद महिलाओं ने 24 घंटे के अखंड निर्जला व्रत का संकल्प लिया। शनिवार तड़के से ही गंगा घाटों पर महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। महिलाएं टोलियों में भजन-कीर्तन करते हुए घाटों पर पहुंचीं।
स्नान और पूजन के बाद संतान के मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। इससे घाटों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक भक्तिमय माहौल रहा। दिन भर निर्जला उपवास रहने के बाद शाम को भगवान जीमूतवाहन का पूजन अर्चन कर अपने की दीर्घायु होने की कामना की।
विज्ञापन
आचार्य पंडित रिपुन्जय मिश्रा और सत्यम मिश्रा ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं के कठिन व्रतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध राजा जीमूतवाहन से है, जिन्होंने नागवंश की रक्षा और एक नागपुत्र के प्राण बचाने के लिए अपने जीवन का बलिदान देने का संकल्प लिया था।
इसी त्याग की स्मृति में संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखने की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि व्रती महिलाएं संकल्प के बाद अन्न, जल, फल और दूध का त्याग कर दिन-रात निर्जला उपवास रखती हैं। रविवार सुबह पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद पारण के साथ व्रत का समापन होगा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के प्रबंध किए गए थे।
विज्ञापन
पूजन-अर्चन के बाद महिलाओं ने 24 घंटे के अखंड निर्जला व्रत का संकल्प लिया। शनिवार तड़के से ही गंगा घाटों पर महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। महिलाएं टोलियों में भजन-कीर्तन करते हुए घाटों पर पहुंचीं।
विज्ञापन
स्नान और पूजन के बाद संतान के मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। इससे घाटों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक भक्तिमय माहौल रहा। दिन भर निर्जला उपवास रहने के बाद शाम को भगवान जीमूतवाहन का पूजन अर्चन कर अपने की दीर्घायु होने की कामना की।
विज्ञापन
आचार्य पंडित रिपुन्जय मिश्रा और सत्यम मिश्रा ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं के कठिन व्रतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध राजा जीमूतवाहन से है, जिन्होंने नागवंश की रक्षा और एक नागपुत्र के प्राण बचाने के लिए अपने जीवन का बलिदान देने का संकल्प लिया था।
इसी त्याग की स्मृति में संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखने की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि व्रती महिलाएं संकल्प के बाद अन्न, जल, फल और दूध का त्याग कर दिन-रात निर्जला उपवास रखती हैं। रविवार सुबह पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद पारण के साथ व्रत का समापन होगा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के प्रबंध किए गए थे।

जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद

जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद

जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद

जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद

जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद