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Ghazipur News: पांच साल से छह सीएचसी पर एक भी मरीज भर्ती नहीं
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भदौरा सीएचसी के वार्ड पर लटका ताला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जिले के 19 में से छह सीएचसी की शैय्या उपयोगिता दर शून्य है। यहां पांच साल से एक भी मरीज भर्ती नहीं हुए। मरीजों को भी प्रारंभिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। 10 से अधिक सीएचसी पर मरीजों के भर्ती होने का आंकड़ा महीने में दो से तीन का ही है।
सीएचसी पर अव्यवस्था का आलम यह है कि कहीं वार्ड पर ताला लटका रहता है तो कहीं बेड पर चादर ही नहीं होती। मरीजों के भर्ती न होने से बेड पर धूल जमी रहती है। जबकि सीएचसी में 30 बेड की सुविधा है। शासनादेश के मुताबिक हर दिन 30 मरीजों को भर्ती करना होता है।
यहीं नहीं अगर भर्ती मरीजों की संख्या 30 नहीं होती है तो कम से कम 15 मरीजों को भर्ती करना अनिवार्य है। बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सेवराईं तहसील के मुन्ना उपाध्याय ने बताया कि करीब एक से डेढ़ लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सीएचसी भदौरा पर है। यह 30 बेड से लैस है, स्थिति यह है कि यहां के वार्ड में अक्सर ही ताला बंद रहता है। सड़क हादसे में घायल मरीज भी आते हैं तो आपातकक्ष में प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। एक महीने में एक-दो मरीज वह भी 24 घंटे यहां भर्ती हो जाएं तो बड़ी बात है। देवल के सोनू गुप्ता ने बताया कि भदौरा सीएचसी के वार्ड में अक्सर ताला मिलता है। इसे देखने से ऐसा लगता है कि अगर दिन में काेई मरीज ठहर जाए तो शाम होते ही वह दूसरे अस्पताल के तरफ रूख कर लेता है। गोड़ऊर के सुधीर राय ने बताया कि गोड़ऊर सीएचसी की हालत खराब है। यहां बेड पर तो धूल जमी रहती है। वार्ड भी नहीं खुलता है। यहां तो आपातकक्ष में रखा बेड धूल से पटा होता है।
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यही स्थिति बरूईन, मिर्जापुर, बिरनो, बाराचवर, करंडा सीएचसी की है। यहां मरीजों के प्रतिदिन भर्ती होने की दर लगभग शून्य है। अन्य सीएचसी पर प्रतिदिन मरीजों के भर्ती होने की दर क्या होगी।
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गाजीपुर। जिले के 19 में से छह सीएचसी की शैय्या उपयोगिता दर शून्य है। यहां पांच साल से एक भी मरीज भर्ती नहीं हुए। मरीजों को भी प्रारंभिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। 10 से अधिक सीएचसी पर मरीजों के भर्ती होने का आंकड़ा महीने में दो से तीन का ही है।
सीएचसी पर अव्यवस्था का आलम यह है कि कहीं वार्ड पर ताला लटका रहता है तो कहीं बेड पर चादर ही नहीं होती। मरीजों के भर्ती न होने से बेड पर धूल जमी रहती है। जबकि सीएचसी में 30 बेड की सुविधा है। शासनादेश के मुताबिक हर दिन 30 मरीजों को भर्ती करना होता है।
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यहीं नहीं अगर भर्ती मरीजों की संख्या 30 नहीं होती है तो कम से कम 15 मरीजों को भर्ती करना अनिवार्य है। बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सेवराईं तहसील के मुन्ना उपाध्याय ने बताया कि करीब एक से डेढ़ लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सीएचसी भदौरा पर है। यह 30 बेड से लैस है, स्थिति यह है कि यहां के वार्ड में अक्सर ही ताला बंद रहता है। सड़क हादसे में घायल मरीज भी आते हैं तो आपातकक्ष में प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। एक महीने में एक-दो मरीज वह भी 24 घंटे यहां भर्ती हो जाएं तो बड़ी बात है। देवल के सोनू गुप्ता ने बताया कि भदौरा सीएचसी के वार्ड में अक्सर ताला मिलता है। इसे देखने से ऐसा लगता है कि अगर दिन में काेई मरीज ठहर जाए तो शाम होते ही वह दूसरे अस्पताल के तरफ रूख कर लेता है। गोड़ऊर के सुधीर राय ने बताया कि गोड़ऊर सीएचसी की हालत खराब है। यहां बेड पर तो धूल जमी रहती है। वार्ड भी नहीं खुलता है। यहां तो आपातकक्ष में रखा बेड धूल से पटा होता है।
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यही स्थिति बरूईन, मिर्जापुर, बिरनो, बाराचवर, करंडा सीएचसी की है। यहां मरीजों के प्रतिदिन भर्ती होने की दर लगभग शून्य है। अन्य सीएचसी पर प्रतिदिन मरीजों के भर्ती होने की दर क्या होगी।