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वाराणसी : तभी तो डॉ. राही मासूम ने कहा था- निकल पड़ा है मंजिल की जुस्तजू में राही, मुड़-मुड़ के देखता है शायद कोई पुकारे

Wed, 16 Mar 2022 12:13 AM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 16 Mar 2022 12:13 AM IST
सार

राही की जयंती या पुण्यतिथि हर साल खामोशी से गुजर जाती है लेकिन कहीं कोई हलचल नहीं होती। उनके अपने गांव गंगौली के लोग भी उनके लिए कोई विशेष कार्यक्रम नहीं रखते ।

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That's why Dr. Rahi Masoom had said, nikal pada hai manjil kee justajoon mein raahee, mud- mud ke dekhata hai shaayad koee pukaare
राही मासूम रजा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते समाजसेवी । - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजीपुर जनपद का सौभाग्य है कि डॉ. राही मासूम रजा ने यहां जन्म लिया। उनकी रचनाओं ने भले ही उन्हें उतनी शोहरत नहीं दी लेकिन जब उन्होंने महाभारत के संवाद लिखे तो नई पीढ़ी उन्हें महाभारत के लेखक के रूप में ही जानने लगी। 

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राही की जयंती या पुण्यतिथि हर साल खामोशी से गुजर जाती है लेकिन कहीं कोई हलचल नहीं होती। उनके अपने गांव गंगौली के लोग भी उनके लिए कोई विशेष कार्यक्रम नहीं रखते। राही को तभी एहसास था, तभी तो उन्होंने कहा था- निकल पड़ा है मंजिल की जुस्तजू में राही, मुड़- मुड़ के देखता है शायद कोई पुकारे।
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सहित्यकारों की राय में डा. राही मासूम रजा 
मंगलवार को डॉ. राही मासूम रजा की पुण्यतिथि थी । इस मौके पर कासिमाबाद के गंगौली गांव में श्रद्धांजलि सभा में मुहम्मद आमिर ने बताया कि  डा. राही गंगा-जमुनी तहजीब के पैरोकार थे। महाभारत धारावाहिक का संवाद लिखने के  प्रस्ताव को उन्होंने पहली बार ठुकरा दिया था। तब वे अलीगढ़ विश्वविद्यालय में प्राध्यापक थे।
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उसी समय कुछ लोगों ने बीआर चोपड़ा को पत्र लिखकर सवाल उठाया कि क्या इसके लिए कोई  हिंदू लेखक नहीं मिला। इन पत्रों को पढ़ने के बाद उन्होने ठान लिया कि महाभारत की पटकथा लिखेंगे। किसान सभा के जिला महासचिव अशोक मिश्रा ने कहा कि डा. रजा उन साहित्यकारों में से एक हैं जिन्होंने सिनेमा में भी साहित्य को कायम रखा।

शमीम अहमद ने कहा कि वह अलीगढ़ स्थित शमशाद मार्केट स्थित जिस बिल्डिंग में वे रहते थे उसके कमरे के आगे उनके नाम की तख्ती आज भी लगी है। मुहम्मद शकील हैदर ने कहा कि डॉ. रजा मुंबई में रहने लगे तब भी न तो अलीगढ़ को भूले और न गंगौली को।  

मुंबई गए तो दोबारा लौटकर गंगौली नहीं आए
अपने जमाने की मशहूर पाप सिंगर व राही की पूत्रवधू पार्वती खान के अनुसार, वे लोग उनकी जयंती मुंबई में अपने घर पर मनाते हैं।  डा. राही के घर में रहने वाले व रिश्ते में उनके चचा सैयद अबूजर हुसैन ने बताया कि राही साहब जब मुंबई गए तो दोबारा लौटकर गंगौली नहीं आए। केवल एक बार कम्युनिस्ट पार्टी के जलसे में आए थे। लेकिन गंगौली और यहां के लोगों को हमेशा याद करते थे।  


गंगौली के अनवारुल इस्लाम व सैयद सलमान हैदर अफसोस के साथ कहते हैं  कि डा. राही एक महान व्यक्ति थे उनके वजह से गंगौली को लोग जानते है, लेकिन उनके नाम पर गांव में कुछ भी नहीं है। 

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