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Ghazipur News: अव्यवस्थाओं का शिकार रैन बसेरे, यात्रियों और राहगीरों की कैसे कटे रात
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कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच यात्रियों एवं राहगीरों को सहूलियत देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से जनपद में 18 रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है। इक्का-दुक्का रैन बसेरों को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि सुविधाओं के अभाव में संचालित रैन बसेरों में यात्रियों और राहगीरों की रैन चैन से कैसे कटेगी।
नगर में कुल चार स्थानों पर रैन बसेरों का संचालन किया जा रहा है। तीन जगहों पर व्यवस्था मुकम्मल है लेकिन एक जगह रैन बसेरा संचालन के नाम पर नगर पालिका की ओर से केवल खानापूर्ति की गई है। कुछ ऐसा ही हाल अन्य नगर निकायों का भी है। इनमें जमानिया नगर पालिका व दिलदारनगर नगर पंचायत शामिल हैं। कहीं प्लास्टिक टांगकर रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, तो कहीं पर जमीन पर मैट तक नहीं बिछाई गई है। जबकि जिला प्रशासन के कागजों में सब कुछ ओके है।
नगर पालिका की ओर से रोडवेज डिपो परिसर में केवल पतले शामियाने के जरिये रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, जो सर्द हवाओं को रोकने में नाकाफी साबित हो रहा है। यहां पांच बेड की व्यवस्था की गई है। कंबल के नाम पर पतले कंबलों की व्यवस्था की गई है। अलाव भी नहीं जल रहा है। जबकि सिटी रेलवे स्टेशन के परिसर में संचालित रैन बसेरे के बाहर अलाव की व्यवस्था की गई है। हैरानी की बात यह है कि रोडवेज डिपो परिसर में संचालित रैन बसेरे में केयर टेकर तक की व्यवस्था नहीं है, जो रुकने वाले लोगों की इंट्री कर सके। पेयजल की व्यवस्था रोडवेज डिपो के भरोसे छोड़ दिया गया है। बीती रात 9:26 बजे रैन बसेरे में दो लोग ठहरे मिले।
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जमानिया नगर पालिका की ओर से तीन रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है। विकास खंड तिराहे के पास संचालित रैन बसेरे में 6 जनवरी के बाद से कोई नहीं ठहरा। केवल प्लास्टिक टांगकर रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है। मौके पर नगर पालिका का कोई कर्मचारी भी नहीं मिला। तहसील प्रांगण में दिसंबर से रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, लेकिन अब तक यहां कोई नहीं ठहरा है। रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरा काफी हद तक ठीक है। बृहस्पतिवार की रात 1:15 बजे तक 6 लोग ठहरे मिले।
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नगर में कुल चार स्थानों पर रैन बसेरों का संचालन किया जा रहा है। तीन जगहों पर व्यवस्था मुकम्मल है लेकिन एक जगह रैन बसेरा संचालन के नाम पर नगर पालिका की ओर से केवल खानापूर्ति की गई है। कुछ ऐसा ही हाल अन्य नगर निकायों का भी है। इनमें जमानिया नगर पालिका व दिलदारनगर नगर पंचायत शामिल हैं। कहीं प्लास्टिक टांगकर रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, तो कहीं पर जमीन पर मैट तक नहीं बिछाई गई है। जबकि जिला प्रशासन के कागजों में सब कुछ ओके है।
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नगर पालिका की ओर से रोडवेज डिपो परिसर में केवल पतले शामियाने के जरिये रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, जो सर्द हवाओं को रोकने में नाकाफी साबित हो रहा है। यहां पांच बेड की व्यवस्था की गई है। कंबल के नाम पर पतले कंबलों की व्यवस्था की गई है। अलाव भी नहीं जल रहा है। जबकि सिटी रेलवे स्टेशन के परिसर में संचालित रैन बसेरे के बाहर अलाव की व्यवस्था की गई है। हैरानी की बात यह है कि रोडवेज डिपो परिसर में संचालित रैन बसेरे में केयर टेकर तक की व्यवस्था नहीं है, जो रुकने वाले लोगों की इंट्री कर सके। पेयजल की व्यवस्था रोडवेज डिपो के भरोसे छोड़ दिया गया है। बीती रात 9:26 बजे रैन बसेरे में दो लोग ठहरे मिले।
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जमानिया नगर पालिका की ओर से तीन रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है। विकास खंड तिराहे के पास संचालित रैन बसेरे में 6 जनवरी के बाद से कोई नहीं ठहरा। केवल प्लास्टिक टांगकर रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है। मौके पर नगर पालिका का कोई कर्मचारी भी नहीं मिला। तहसील प्रांगण में दिसंबर से रैन बसेरे का संचालन किया जा रहा है, लेकिन अब तक यहां कोई नहीं ठहरा है। रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरा काफी हद तक ठीक है। बृहस्पतिवार की रात 1:15 बजे तक 6 लोग ठहरे मिले।