{"_id":"5eb421c08ebc3e903e719d65","slug":"many-businesses-collapsed-in-lockdown-ghazipur-news-vns523790146","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाकडाउन में कई व्यवसाय हुए चौपट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाकडाउन में कई व्यवसाय हुए चौपट
विज्ञापन
गाजीपुर। लाकडाउन की वजह से चाय, पकौड़ी, मिठाई, सैलून, कपड़ा आदि के दुकानदार पूरी तरह सड़क पर आ गए हैं। व्यवसाय चौपट हो गया है। लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इधर दुग्ध तथा इससे निर्मित सामान के भाव भी गिर गए हैं। यह व्यवसाय इतनी मंदी के दौर में आ गया है कि पशुओं के चारे का भी खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी खोवा और पनीर के भाव घट जाने के बावजूद इनकी बिक्री नहीं हो रही है। यह समय शादी विवाह का सीजन माना जाता है। कोरोना की वजह से सभी प्रकार के आयोजन रद हो गए है जिसके चलते इस बार दूध व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया है।
कासिमाबाद संवाददाता के अनुसार लाकडाउन की मार से खेती-किसानी से जुड़े लोग तो परेशान हैं ही बाजारों के बंद होने से मिठाई, चाय आदि से जुड़े लोग पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। सबसे खराब हालत पशुपालकों के साथ दूध विक्रेताओं की है। दूध व्यवसाय से जुड़े क्षेत्र के बासुदेवपुर निवासी राजेश यादव ने बताया कि अन्य पारिवारिक खर्च चलता था वह पूरी तरह से बंद हो गया है। जलालपुर के हीरा यादव की मानें तो लाकडाउन से उनका रोजगार पूरी तरह से बंद हो गया है। इस समय घर की खेती ही सहारा रह गई है। कसिमाबाद चौक पर मिठाई की दुकान चलाने वाले पाखंडी गौड़ ने बताया कि प्रतिदिन 50 से 100 लीटर दूध की खपत थी। इसी तरह बंगाली स्वीट के मालिक प्रदीप ने बताया कि दुकान पर 200 से 300 लीटर की प्रतिदिन खपत थी। जमानिया संवाददाता के अनुसार 40- 45 रुपये लीटर बिकने वाला दूध 30-32 रूपये लीटर बिक रहा है। इससे दूध उत्पादक किसानों को जोरदार झटका लगा है। दुग्ध उपादक सहकारी समिति नगसर के अध्यक्ष अजय यादव बताते हैं कि उनके पास प्रतिदिन किसान दूध लेकर आते हैं लेकिन खपत कम होने के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पराग डेरी के क्षेत्राधिकारी हरेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि दूध की खपत में कमी आई है जिससे रेट भी कम हुआ है। दूध का रेट फैट और एसएनएफ पर निर्भर करता है। वर्तमान समय में 6.5 प्रतिशत फैट और नौ प्रतिशत एसएनएफ के दूध को करीब 33 रुपये में खरीदा जा रहा है। औड़िहार संवाददाता के अनुसार दूध की खपत नहीं होने के कारण गाय-भैंस को दिए जाने वाले चारे और दाने का खर्च निकलना कठिन है। वाराणसी मंडल की सबसे बड़ी खोवा एवं पनीर की मंडी मानी जाने वाली सैदपुर की मंडी लॉकडाउन के चलते बंद है। यहां खोवा 100 रुपये औरा पनीर 80 रुपये प्रति किलो लेकर दूध बेचने वाले दरवाजे-दरवाजे घूम रहे हैं।
विज्ञापन
कासिमाबाद संवाददाता के अनुसार लाकडाउन की मार से खेती-किसानी से जुड़े लोग तो परेशान हैं ही बाजारों के बंद होने से मिठाई, चाय आदि से जुड़े लोग पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। सबसे खराब हालत पशुपालकों के साथ दूध विक्रेताओं की है। दूध व्यवसाय से जुड़े क्षेत्र के बासुदेवपुर निवासी राजेश यादव ने बताया कि अन्य पारिवारिक खर्च चलता था वह पूरी तरह से बंद हो गया है। जलालपुर के हीरा यादव की मानें तो लाकडाउन से उनका रोजगार पूरी तरह से बंद हो गया है। इस समय घर की खेती ही सहारा रह गई है। कसिमाबाद चौक पर मिठाई की दुकान चलाने वाले पाखंडी गौड़ ने बताया कि प्रतिदिन 50 से 100 लीटर दूध की खपत थी। इसी तरह बंगाली स्वीट के मालिक प्रदीप ने बताया कि दुकान पर 200 से 300 लीटर की प्रतिदिन खपत थी। जमानिया संवाददाता के अनुसार 40- 45 रुपये लीटर बिकने वाला दूध 30-32 रूपये लीटर बिक रहा है। इससे दूध उत्पादक किसानों को जोरदार झटका लगा है। दुग्ध उपादक सहकारी समिति नगसर के अध्यक्ष अजय यादव बताते हैं कि उनके पास प्रतिदिन किसान दूध लेकर आते हैं लेकिन खपत कम होने के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पराग डेरी के क्षेत्राधिकारी हरेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि दूध की खपत में कमी आई है जिससे रेट भी कम हुआ है। दूध का रेट फैट और एसएनएफ पर निर्भर करता है। वर्तमान समय में 6.5 प्रतिशत फैट और नौ प्रतिशत एसएनएफ के दूध को करीब 33 रुपये में खरीदा जा रहा है। औड़िहार संवाददाता के अनुसार दूध की खपत नहीं होने के कारण गाय-भैंस को दिए जाने वाले चारे और दाने का खर्च निकलना कठिन है। वाराणसी मंडल की सबसे बड़ी खोवा एवं पनीर की मंडी मानी जाने वाली सैदपुर की मंडी लॉकडाउन के चलते बंद है। यहां खोवा 100 रुपये औरा पनीर 80 रुपये प्रति किलो लेकर दूध बेचने वाले दरवाजे-दरवाजे घूम रहे हैं।
विज्ञापन