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त्रेतायुग से है महाहर धाम का नाता: जलाभिषेक को आते हैं शिवभक्त, यहां है तेरह मुखी शिवलिंग; जानें- खासियत
Sat, 03 Aug 2024 07:01 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sat, 03 Aug 2024 07:01 PM IST
सार
Ghazipur News: सावन माह में गाजीपुर स्थित महाहर धाम में बाबा के जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि शिव के प्रिय माह सावन में यहां अधिक भक्त आते हैं। तेरह मुखी शिवलिंग का दर्शन पाकर भक्त भी निहाल हो जाते हैं।
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महाहर धाम में तेरह मुखी शिवलिंग का मिलता है दर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
त्रेतायुग से मरदह स्थित महाहर धाम नाता है। यहां प्राचीन तेरह मुखी शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि राजा दशरथ ने ब्रह्मा के आशीर्वाद से श्राप मुक्ति और पुत्र प्राप्ति के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना और मंदिर का निर्माण कराया था।
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यहां पूरे सावन माह मंदिर परिसर घंटों की आवाज से गुंजायमान रहता है। यहां सबसे अधिक भीड़ होती है। ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व के कारण यह धाम आस्था और विश्वास का केंद्र है। पूरे पूर्वांचल सहित पड़ोसी राज्य के भी श्रद्धालु इस धाम पर पहुंचकर दुर्लभ शिवलिंग का दर्शन पूजन कर बाबा से मनचाही मुराद मांगते हैं।
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मंदिर प्रशासन के मुताबिक धाम में तेरहमुखी शिवलिंग के साथ ही शिव-पार्वती की युगल मूर्ति भी अद्भुत एवं पूजनीय हैं। कहा जाता है कि मंदिर के सामने उत्तर से दक्षिण तरफ दिशा में एक किलोमीटर तक लंबा सरोवर है, जहां हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर मां गंगा का प्रवाह था।
धाम परिसर में एक पोखरे हैं, जिके बारे में कहा जाता है यह वही पोखरा है जहां श्रवण कुमार जल लेने गए थे। तब श्रवण के माता-पिता ने दशरथ को श्राप दिया था। इसके बाद ब्रह्मा के आर्शीवाद से राजा दशरथ ने श्राप मुक्ति और पुत्र प्राप्ति के लिए शिवलिंग की स्थापना कर पूजन किया। यह महल दशरथ की गढ़ी के नाम से विख्यात है।