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Lok Sabha Election: ओबीसी और एससी-एसटी मतदाताओं पर सबकी नजर, गाजीपुर में बढ़ीं प्रत्याशियों की धड़कनें
Sat, 04 May 2024 07:56 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अंकुर शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अंकुर शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sat, 04 May 2024 07:56 PM IST
सार
Lok Sabha Election: राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस बार के चुनाव में दल की जगह, जाति सर्वोपरि दिखाई दे रही है। ऐसे में पसंदीदा प्रत्याशी के चयन का चलन अंदरखाने चल रहा है। आलम यह है कि नाराज नेता और कार्यकर्ताओं से प्रत्याशी मिलने के बहाने ढूंढ रहे हैं।
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लोकसभा चुनाव
- फोटो : प्रतीकात्मक
विस्तार
गाजीपुर संसदीय सीट के बदलते सियासी समीकरणों से दिग्गजों की बेचैनी बढ़ रही है। चुनाव में स्थानीय मुद्दे लगभग नदारद हैं। वहीं, मौजूदा प्रत्याशियों को लेकर मतदाता पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि जीत-हार का अंतर इस बार पिछली बार की तुलना में काफी कम हो सकता है।
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'इंडी' और राजग दोनों ही गठबंधनों के उम्मीदवारों ने एसटी-एससी और ओबीसी के मतदाताओं पर अपने प्रचार अभियान को पूरी तरह से केंद्रीत किया है। वे खुद और उनकी बेटियां चुनाव प्रचार में दिन-रात एक किए हुए हैं। गाजीपुर में सांतवें और अंतिम चरण में एक जून को वोट पड़ेंगे। सात मई से यहां नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।
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आंकड़ों की बात करें तो गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में 20.63 लाख मतदाताओं में 17.11 फीसदी सवर्ण हैं। इसी प्रकार 20.7 फीसदी एससी-एसटी, 12.5 फीसदी मुस्लिम, 0.54 प्रतिशत सिख एवं इसाई और 43 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग के मतदाता हैं। पिछले चुनाव में 58.88 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। इस बार मतदाता बनने में युवाओं और महिलाओं ने काफी रूचि दिखाई है। हालांकि, प्रत्याशियों को लेकर मतदाताओं का रुझान लोगों की समझ से परे है।
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चुनाव में भाजपा उम्मीदवार पारसनाथ राय को जहां जातिगत, विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गठबंधन दल के नाम पर वोट मिलना तय माना जा रहा है, वहीं इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार व मौजूदा सांसद अफजाल अंसारी को जातिगत और अपने और सहयोगी दलों के कोर वोटों पर पूरा भरोसा है। उधर, बसपा प्रत्याशी डॉ. उमेश कुमार सिंह बसपा के बेस वोट के अलावा राजपूत वोटों पर भरोसा है।