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दोहरे हत्याकांड में पिता-पुत्र सहित चार को आजीवन कारावास
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अपर सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक द्वितीय दुर्गेश की अदालत ने बृहस्पतिवार को दोहरे हत्याकांड में पिता- पुत्र सहित चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी दुर्गा चौबे और उसके पुत्र बिट्टू चौबे को चार लाख पांच सौ, चार लाख पांच सौ का अर्थदंड लगाया। दोषी दिलीप चौबे और राकेश चौबे को चार लाख 30 हजार 500 और चार लाख 30 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया है। साथ अर्थदंड की धनराशि से 70 प्रतिशत धनराशि मृतक के उत्तराधिकारी को देने का आदेश अदालत ने दिया है।
अभियोजन के अनुसार सुहवल थाना के गांव तिरलोकपुर निवासी रामविलास सिंह ने 19 दिसंबर 2009 को तहरीर दी थी कि उसके इकलौते पुत्र कमलेश सिंह और उसकी पत्नी सरोज सिंह सामने के कमरे में सोई थी। देर रात आरोपी दुर्गा चौबे अपने पुत्र दिलीप चौबे, राकेश चौबे, बिट्टू चौबे और नंदू यादव उर्फ नंदजी के साथ मिलकर मेरे पुत्र पर कट्टा और बंदूक से हमला कर दिए। इससे वह गिर गया। आवाज सुनकर बाहर आई पुत्र वधू की भी आरोपियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वादी की सूचना पर थाना सुहवल में आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने विवेचना उपरांत आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने कुल 10 गवाहों को पेश किया। सभी ने न्यायालय में बयान दर्ज करातेेे हुए घटना का समर्थन किया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने पिता और पुत्रों को दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा से दंडित किया है। वहीं संदेह का लाभ देते हुए नंदू यादव उर्फ नंदजी को दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन के अनुसार सुहवल थाना के गांव तिरलोकपुर निवासी रामविलास सिंह ने 19 दिसंबर 2009 को तहरीर दी थी कि उसके इकलौते पुत्र कमलेश सिंह और उसकी पत्नी सरोज सिंह सामने के कमरे में सोई थी। देर रात आरोपी दुर्गा चौबे अपने पुत्र दिलीप चौबे, राकेश चौबे, बिट्टू चौबे और नंदू यादव उर्फ नंदजी के साथ मिलकर मेरे पुत्र पर कट्टा और बंदूक से हमला कर दिए। इससे वह गिर गया। आवाज सुनकर बाहर आई पुत्र वधू की भी आरोपियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वादी की सूचना पर थाना सुहवल में आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने विवेचना उपरांत आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने कुल 10 गवाहों को पेश किया। सभी ने न्यायालय में बयान दर्ज करातेेे हुए घटना का समर्थन किया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने पिता और पुत्रों को दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा से दंडित किया है। वहीं संदेह का लाभ देते हुए नंदू यादव उर्फ नंदजी को दोषमुक्त कर दिया।
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