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करीबपुर-लट्ठूडीहमार्ग मार्ग टूटा, कई मार्ग डूबे
अमर उजाला ब्रयूराो, गाजीपुर/
Updated Fri, 26 Aug 2016 12:01 AM IST
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मुहम्मदाबाद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तेज रफ्तार से बहता पानी।अमर उजाला
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जीवनदायनी गंगा कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं हैं। अब भी धीमी गति से बढ़ाव जारी है। खतरा निशान 63.105 मीटर से बढ़ते हुए गुरुवार को गंगा नदी का जलस्तर 65.040 मीटर तक पहुंच गया। सायंकाल चार बजे नदी के जलस्तर में मामूूली वृद्धि दर्ज की गई। प्रलंयकारी बाढ़ से अब तक कुल 332 गांव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के दबाव के कारण नदी का रूख अब गड़हांचल और करईल क्षेत्र की तरफ हो गया है। करईल का करीब 5000 हजार एकड़ फसल डूब कर बर्बाद हो गई है। बाढ़ के पानी से करीबपुर-लट्ठूडीहमार्ग जहां टूट गया, वहीं जोगा-देवरिया मार्ग, जसदेवपुर से कठार मार्ग, कबीरपुर से मलिकपुरा, भांवरकोल से अवथहीं मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया है। बाढ़ ने दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है।
जनपद में आई बाढ़ में मुहम्मदाबाद, जमानिया, सैदपुर और सदर तहसील में कुल 65 से अधिक संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। 100 से अधिक विद्यालय अब तक बंद हो चुके हैं। जिसमें प्राथमिक विद्यालय, जूनियर हाईस्कूल, इंटर कालेज, डिग्री कालेज तक शामिल हैं। जनपद में 227 नवें लगाई गई हैं। 27 श्रणालय तथा 57 बाढ़ राहत चौकियां जगह-जगह बनी हैं। अब तक 11000 से अधिक लोगों को बाढ़ के पानी से बाहर निकला गया है। बचाव में तीन एनडीआरएफ तथा दो पीएसी की टीम लगाई गई है। गंगा के धीमी चाल से पानी घुसने वाले संभावित इलाकों के लोगों ने राहत की सास ली है। गंगा के पानी से घिरे गांव और मुहल्लों के लोग गंगा मईया की दुहाई देते हुए यह कह रहे हैं कि वह उनके दरवाजे से लौटते हुए फिर उन्हें उसी तरह से बसा दें। गंगा के शांत होने पर फिर से अशांत होने की आशंका से लोग सहमे हुए हैं। बाढ़ राहत शिविरों और खुले आसमान के नीचे रह गुजर-बसर कर रहे लोग बाढ़ की विभीषिका से परेशान हैं।
शहर के नवाबगंज, तुलसियाका पुल, झुन्नूलाल चौराहा, कचहरी रोड, डीएम आवास के पास शास्त्रीनगर, स्टीमरघाट, नखास मुहल्ला की सड़क पानी से घिरी रही। इन स्थानों पर नाव के संचालन हो रहा है,
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जिसका सहारा बाढ़ के पानी में फंसे घरों के लोग ले रहे हैं। लोग नाव के सहारे घरों में आ-जा रहे हैं। पानी के बीच से वाहन और पैदल लोग आवागमन करते रहे। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी हरिनाथ ने बताया कि आज दिन में तीन बजे गंगा 65.040 पर खड़ी रही। गंगा भले ही ठहरी रही, लेकिन बाढ़ पाड़ितों की परेशानियां खत्म नहीं हुई। फिर से जलस्तर में वृद्धि की संभावना से लोग सहमें रहे। गहमर संवादताता के अनुसार क्षेत्र में गंगा और कर्मनाशा के बाढ़ से अभी भी ग्रामीणों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नागदिलपुर, हसनपुरा, अठहठा, वीरउपुर, नसीरपुर आदि गांवों पानी से घिरे रहे।
बीडीओ भदौरा रामराज गौतम के निर्देशन में कामाख्या धाम में बने राहत शिविर में शरणार्थियों को विगत तीसरे दिन भी भोजन कराया गया। जमानिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में गंगा एवं कर्मनाशा नदी के उफान के चलते लोगों का जीना दूभर हो गया है। लोग अपने घरो को छोड़कर दूसरी जगह गुजर-बसर करने को मजबूर है। हल्का लेखपाल के हड़ताल पर चले जाने से भी राहत सामग्री बांटने में कुछ परेशानिया आ रही है। जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौके का दौरा कर राहत सामग्री बांट रहे है, लेकिन अब भी ग्रामीणों की शिकायत ज्यों कि त्यों बनी हुई है। कई पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें राहत सामग्री नहीं मिल रही है।
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जनपद में आई बाढ़ में मुहम्मदाबाद, जमानिया, सैदपुर और सदर तहसील में कुल 65 से अधिक संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। 100 से अधिक विद्यालय अब तक बंद हो चुके हैं। जिसमें प्राथमिक विद्यालय, जूनियर हाईस्कूल, इंटर कालेज, डिग्री कालेज तक शामिल हैं। जनपद में 227 नवें लगाई गई हैं। 27 श्रणालय तथा 57 बाढ़ राहत चौकियां जगह-जगह बनी हैं। अब तक 11000 से अधिक लोगों को बाढ़ के पानी से बाहर निकला गया है। बचाव में तीन एनडीआरएफ तथा दो पीएसी की टीम लगाई गई है। गंगा के धीमी चाल से पानी घुसने वाले संभावित इलाकों के लोगों ने राहत की सास ली है। गंगा के पानी से घिरे गांव और मुहल्लों के लोग गंगा मईया की दुहाई देते हुए यह कह रहे हैं कि वह उनके दरवाजे से लौटते हुए फिर उन्हें उसी तरह से बसा दें। गंगा के शांत होने पर फिर से अशांत होने की आशंका से लोग सहमे हुए हैं। बाढ़ राहत शिविरों और खुले आसमान के नीचे रह गुजर-बसर कर रहे लोग बाढ़ की विभीषिका से परेशान हैं।
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शहर के नवाबगंज, तुलसियाका पुल, झुन्नूलाल चौराहा, कचहरी रोड, डीएम आवास के पास शास्त्रीनगर, स्टीमरघाट, नखास मुहल्ला की सड़क पानी से घिरी रही। इन स्थानों पर नाव के संचालन हो रहा है,
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जिसका सहारा बाढ़ के पानी में फंसे घरों के लोग ले रहे हैं। लोग नाव के सहारे घरों में आ-जा रहे हैं। पानी के बीच से वाहन और पैदल लोग आवागमन करते रहे। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी हरिनाथ ने बताया कि आज दिन में तीन बजे गंगा 65.040 पर खड़ी रही। गंगा भले ही ठहरी रही, लेकिन बाढ़ पाड़ितों की परेशानियां खत्म नहीं हुई। फिर से जलस्तर में वृद्धि की संभावना से लोग सहमें रहे। गहमर संवादताता के अनुसार क्षेत्र में गंगा और कर्मनाशा के बाढ़ से अभी भी ग्रामीणों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नागदिलपुर, हसनपुरा, अठहठा, वीरउपुर, नसीरपुर आदि गांवों पानी से घिरे रहे।
बीडीओ भदौरा रामराज गौतम के निर्देशन में कामाख्या धाम में बने राहत शिविर में शरणार्थियों को विगत तीसरे दिन भी भोजन कराया गया। जमानिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में गंगा एवं कर्मनाशा नदी के उफान के चलते लोगों का जीना दूभर हो गया है। लोग अपने घरो को छोड़कर दूसरी जगह गुजर-बसर करने को मजबूर है। हल्का लेखपाल के हड़ताल पर चले जाने से भी राहत सामग्री बांटने में कुछ परेशानिया आ रही है। जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौके का दौरा कर राहत सामग्री बांट रहे है, लेकिन अब भी ग्रामीणों की शिकायत ज्यों कि त्यों बनी हुई है। कई पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें राहत सामग्री नहीं मिल रही है।