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जूट वॉल हैंगिंग : अमेरिका से नहीं मिल रहा ऑर्डर, नेपाल भी नहीं गया माल

Fri, 07 Nov 2025 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 12:14 AM IST
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Jute wall hangings: No orders from the US, goods haven't even gone to Nepal
जूट वॉल हैंगिंग की कलाकृति-स्रोत-निर्माता
गाजीपुर। जिले का जूट वॉल हैंगिंग एक जनपद एक उत्पाद योजना में शामिल है। इस समय दो बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण यह उद्योग संकट से गुजर रहा है। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने और नेपाल में हाल में हुई जेन-जी हिंसा ने इसके निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है।
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व्यवसायियों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 27 अगस्त को भारत पर टैरिफ लगाए जाने के बाद से अमेरिका से कोई नया ऑर्डर नहीं मिला है। पहले गाजीपुर से सालाना लगभग ढाई करोड़ रुपये का हैंडीक्राफ्ट निर्यात होता था, जिसमें अधिकांश हिस्सा अमेरिका का था,जो अब यह पूरी तरह ठप है। वहीं, बीते सितंबर में नेपाल में हुई हिंसा के कारण वहां भी निर्यात रुक गया है। अब तक जूट वॉल हैंगिंग का करीब 15 लाख रुपये का सालाना निर्यात नेपाल को होता था,लेकिन सितंबर से अब तक एक रुपये का भी माल वहां नहीं गया है। संवाद
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यहां है मांग-देश में दिल्ली, कोलकाता, शिमला, मनाली, मसूरी, ऊटी, इंदौर, अहमदाबाद, प्रयागराज और दक्षिण भारत के कई शहरों में इसकी बड़ी मांग है। इसके अलावा विदेशों में अमेरिका, नेपाल, यूएई, जॉर्डन, ईरान, इराक, तुर्की, मिस्र, साइप्रस, ओमान, कतर, बहरीन और सऊदी अरब प्रमुख बाजार हैं।
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बाजार की कमी और बिचौलियों की चुनौती-कारीगरों का कहना है कि जिले में जूट वॉल हैंगिंग के लिए स्थायी बाजार नहीं है। वे बिक्री के लिए दिल्ली प्रगति मैदान जैसे मेलों पर निर्भर रहते हैं। इसी वजह से बिचौलिए अधिक लाभ उठा लेते हैं और कारीगरों की आय सीमित रह जाती है।
संकट में 40 साल पुराना हस्तशिल्प उद्योग-गाजीपुर। जिले के सैदपुर और शादियाबाद क्षेत्र के उतरौल, तरांव, खानकाहकला, ईशनपुर, भिखईपुर, सौरी और ध्रुवार्जुन जैसे गांवों में करीब एक हजार परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं। यह उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है। कारीगर प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक कमा लेते हैं। जिले के निर्यातकों का कहना है कि दिल्ली के प्रगति मैदान, हरियाणा के सूरजकुंड और हैदराबाद में लगने वाली प्रदर्शनियां उनके लिए वरदान साबित होती हैं। इन्हीं प्रदर्शनियों में विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देते हैं। यह उत्पाद जूट और अन्य प्राकृतिक रेशों से हस्तनिर्मित होता है। इसमें खेत, नदियां, सूर्योदय, पक्षियों और महापुरुषों के चित्र जैसे डिजाइन बनाए जाते हैं। कीमत 400 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होती है। संवाद

निर्यातक मोहम्मद आबिद अली का कहना है कि टैरिफ के बाद से अमेरिका से ऑर्डर नहीं मिले हैं। विदेश में लगने वाले इंटरनेशनल फेयर में सरकार द्वारा स्टॉल और सब्सिडी दी जाए।

वहीं निर्माता महफूज आलम ने कहा कि जूट वॉल हैंगिंग की सबसे अधिक मांग मेट्रो शहरों और पर्यटक स्थलों पर है, लेकिन बाजार की कमी और बिचौलियों की सक्रियता से कारीगरों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।

टैरिफ नीति के बाद प्रदेश के सभी जनपदों में स्वदेशी मेले का आयोजन कराया जा रहा है ताकि स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाई जा सकें। साथ ही प्रशिक्षण और बैंक लोन की सुविधा भी दी जा रही है। -प्रवीण मौर्या, उपायुक्त, उद्योग।
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