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बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे जयशंकर प्रसाद
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Thu, 26 Mar 2015 11:04 PM IST
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प्रतिष्ठान में गुरुवार को छायावाद युग और महाकवि जयशंकर प्रसाद की भूमिका
विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेंद्र नाथ पाठक ने
कहा कि जयशंकर प्रसाद बहुआयामी प्रतिभा के रचनाकार थे। वे श्रेष्ठ कवि और
नाटककार होने के साथ ही अच्छे उपन्यासकार और कहानीकार भी थे। उनकी लिखी
कामायनी 20वीं सदी का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है।
उन्होंने कहा कि कामायनी में महाकवि प्रसाद ने जलाप्लावन के पश्चात मनु और श्रद्धा के माध्यम से मानवता के मनोवैज्ञानिक विकास की कथा कलात्मक ढंग से कही है। अध्यक्षता कर रहे प्रो. रामवृक्ष पांडेय ने कहा कि कामायनी जयशंकर प्रसाद की कल्पना प्रवणता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने अपने महाकाव्य में तत्व का साक्षात्कार किया है। डा. गौरीशंकर राय ने प्रेम पथिक की पंक्ति इस पथ का उद्देश्य नहीं है..सुनाते हुए कहा कि कामायनी की तुलना किसी काव्य से नहीं की जा सकती। डा. अंबिका प्रसाद पांडेय ने प्रसाद को जन्मजात कवि बताते हुए उनके नाटकों और कथा साहित्यों को हिंदी के लिए महत्वपूर्ण अवदान कहा। त्रिभुवन ने उन्हें छायावाद का सर्वश्रेष्ठ कवि कहा।
डा. रमाशंकर सिंह ने प्रसाद को पराधीन भारत में जनजागरण का महान कवि बताया। शिवेंद्र पाठक ने प्रसाद जी को 20वीं सदी का सबसे बड़ा कवि बताया। प्रो. विद्याशंकर पांडेय ने प्रसाद के काव्य-साहित्य में यथार्थ चित्रण को रेखांकित किया। इस दौरान डा. ओमप्रकाश तिवारी, शेषनाथ यादव, उबैदुर्रहमान, मनीष कुमार सिंह ने विचार व्यक्त किया। विमल गंगेश और हंटर गाजीपुरी ने काव्य पाठ किया। वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेंद्र नाथ पाठक ने आभार जताया।
उन्होंने कहा कि कामायनी में महाकवि प्रसाद ने जलाप्लावन के पश्चात मनु और श्रद्धा के माध्यम से मानवता के मनोवैज्ञानिक विकास की कथा कलात्मक ढंग से कही है। अध्यक्षता कर रहे प्रो. रामवृक्ष पांडेय ने कहा कि कामायनी जयशंकर प्रसाद की कल्पना प्रवणता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने अपने महाकाव्य में तत्व का साक्षात्कार किया है। डा. गौरीशंकर राय ने प्रेम पथिक की पंक्ति इस पथ का उद्देश्य नहीं है..सुनाते हुए कहा कि कामायनी की तुलना किसी काव्य से नहीं की जा सकती। डा. अंबिका प्रसाद पांडेय ने प्रसाद को जन्मजात कवि बताते हुए उनके नाटकों और कथा साहित्यों को हिंदी के लिए महत्वपूर्ण अवदान कहा। त्रिभुवन ने उन्हें छायावाद का सर्वश्रेष्ठ कवि कहा।
डा. रमाशंकर सिंह ने प्रसाद को पराधीन भारत में जनजागरण का महान कवि बताया। शिवेंद्र पाठक ने प्रसाद जी को 20वीं सदी का सबसे बड़ा कवि बताया। प्रो. विद्याशंकर पांडेय ने प्रसाद के काव्य-साहित्य में यथार्थ चित्रण को रेखांकित किया। इस दौरान डा. ओमप्रकाश तिवारी, शेषनाथ यादव, उबैदुर्रहमान, मनीष कुमार सिंह ने विचार व्यक्त किया। विमल गंगेश और हंटर गाजीपुरी ने काव्य पाठ किया। वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेंद्र नाथ पाठक ने आभार जताया।