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हाईस्कूलों में अध्यापक नहीं, कैसे हो पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 19 Mar 2016 12:16 AM IST
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में स्थापित तेरह राजकीय हाईस्कूल में कोई अपने बच्चों का प्रवेश नहीं कराना चाहता है। जिन बच्चों ने प्रवेश लिया है, उनको पढ़ाने वाला कोई नही है। ज्यादातर विद्यालय का संचालन महज एक या दो शिक्षकों को भरोसे किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर संचालित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) कार्यक्रम को प्रदेश में सर्वशिक्षा अभियान की तर्ज पर वर्ष 2009 में लागू किया गया। इसके तहत अब तक प्रदेश में लगभग 16 सौ राजकीय हाईस्कूल खोले जा चुके हैं लेकिन इन विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इन विद्यालयों का संचालन राजकीय इंटर कालेजों के अध्यापकों के सहारे किया जा रहा है।
जिले में कुल तेरह राजकीय हाईस्कूल संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में दो स्कूलों को छोड़कर अन्य 11 में प्रधानाचार्य तो हैं लेकिन सहायक अध्यापक नहीं हैं। किसी विद्यालय को एक अध्यापक के भरोसे संचालित किया जा रहा है तो किसी को दो की मदद से जबकि इन स्कूलों में कम से कम सात अध्यापक होने चाहिए। जब अध्यापक नहीं है तो छात्र क्यों जाएं। लिहाजा इन विद्यालयों में छात्रों की संख्या भी नगण्य ही है।
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अभिभावकों को राजकीय विद्यालय स्थापित होने की खुशी तो है लेकिन इन विद्यालयों में शिक्षकों और संसाधनों के अभाव के चलते वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजना नहीं चाहते। आधा दर्जन विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें छात्र संख्या दहाई तक पहुंच पाई है। विभाग की तरफ से इन विद्यालयों पर सहायक अध्यापक भेजने की प्रक्रिया कुछ महीने पहले शुरू की गई थी लेकिन वह भी किन्हीं कारणों से अधर में लटक गई। इसी का परिणाम है कि इन विद्यालयों में आज तक शिक्षकों की भरपाई नहीं हो पाई।
जिले में संचालित राजकीय हाईस्कूलों में प्रधानाचार्य एवं सहायक अध्यापकों के अलावा कर्मचारियों का अभाव है। इनमें लिपिक, चौकीदार और चपरासी के भी एक-एक पद हैं। कर्मचारियों के सृजित पद कई विद्यालयों पर रिक्त पड़े हुए हैं। आधा दर्जन विद्यालयों पर लिपिक तो तैनात हैं लेकिन शेष विद्यालयों पर इनका कामकाज प्रधानाचार्य या सहायक अध्यापक देख रहे हैं। चौकीदार एवं चपरासी तो कहीं तैनात नहीं हैं।
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राष्ट्रीय स्तर पर संचालित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) कार्यक्रम को प्रदेश में सर्वशिक्षा अभियान की तर्ज पर वर्ष 2009 में लागू किया गया। इसके तहत अब तक प्रदेश में लगभग 16 सौ राजकीय हाईस्कूल खोले जा चुके हैं लेकिन इन विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इन विद्यालयों का संचालन राजकीय इंटर कालेजों के अध्यापकों के सहारे किया जा रहा है।
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जिले में कुल तेरह राजकीय हाईस्कूल संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में दो स्कूलों को छोड़कर अन्य 11 में प्रधानाचार्य तो हैं लेकिन सहायक अध्यापक नहीं हैं। किसी विद्यालय को एक अध्यापक के भरोसे संचालित किया जा रहा है तो किसी को दो की मदद से जबकि इन स्कूलों में कम से कम सात अध्यापक होने चाहिए। जब अध्यापक नहीं है तो छात्र क्यों जाएं। लिहाजा इन विद्यालयों में छात्रों की संख्या भी नगण्य ही है।
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अभिभावकों को राजकीय विद्यालय स्थापित होने की खुशी तो है लेकिन इन विद्यालयों में शिक्षकों और संसाधनों के अभाव के चलते वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजना नहीं चाहते। आधा दर्जन विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें छात्र संख्या दहाई तक पहुंच पाई है। विभाग की तरफ से इन विद्यालयों पर सहायक अध्यापक भेजने की प्रक्रिया कुछ महीने पहले शुरू की गई थी लेकिन वह भी किन्हीं कारणों से अधर में लटक गई। इसी का परिणाम है कि इन विद्यालयों में आज तक शिक्षकों की भरपाई नहीं हो पाई।
जिले में संचालित राजकीय हाईस्कूलों में प्रधानाचार्य एवं सहायक अध्यापकों के अलावा कर्मचारियों का अभाव है। इनमें लिपिक, चौकीदार और चपरासी के भी एक-एक पद हैं। कर्मचारियों के सृजित पद कई विद्यालयों पर रिक्त पड़े हुए हैं। आधा दर्जन विद्यालयों पर लिपिक तो तैनात हैं लेकिन शेष विद्यालयों पर इनका कामकाज प्रधानाचार्य या सहायक अध्यापक देख रहे हैं। चौकीदार एवं चपरासी तो कहीं तैनात नहीं हैं।