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अधिवक्ताओं की हड़ताल से तीन प्रमुख मामलों में नहीं हुई सुनवाई
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उपस्थित नहीं हुआ साक्षी, तीन अक्टूबर तिथि नियत
गाजीपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद कुमार चौधरी की अदालत में बिहार के तत्कालीन सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सहित कुल आठ लोगों के विरुद्ध आरोप तय हुआ। सोमवार को साक्ष्य के लिए तिथि नियत थी। लेकिन कोई साक्षी उपस्थित नहीं हुआ और अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। न्यायालय द्वारा तीन अक्टूबर की अगली तिथि नियत की गई है।
आठ नवंबर 1993 की सुबह 10. 30 बजे मुहम्मदाबाद कोतवाली के शाहनिंदा चौराहे पर विधि विरुद्ध तरीके से भीड़ एकत्र कर सार्वजनिक मार्ग को जाम कर नारेबाजी और फायरिंग की गई थी। इसको रोकने गए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक बीएन शर्मा के साथ हाथापाई की गई थी। इस संबंध में कोतवाली मुहम्मदाबाद में 127 लोगों को नामजद किया गया था।
विवेचना के उपरांत पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया। इसमें पप्पू यादव, दीपक कुमार उर्फ दीपक यादव, मनोज भारती, सुकेश राय, समसुल्हक, असरारुलहक उर्फ लाडल, भरत यादव उर्फ फेकन और मंजेलाल राय के विरुद्ध आरोप तय किया गया। सोमवार को मामले में गवाही होनी थी। लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण अदालत ने साक्ष्य के लिए तीन अक्टूबर की तिथि नियत की है।
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नहीं हुई गवाही, तीन अक्टूबर तिथि नियत
गाजीपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद कुमार चौधरी की अदालत में सोमवार को 21 साल पुराने विधि विरुद्ध जमाव एवं तोड़फोड़ के मामले में तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद अफजाल अंसारी सहित अन्य के मामले में सोमवार को गवाही होनी थी। अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हुई। न्यायालय ने इस मामले में तीन अक्टूबर की तिथि नियत की है।
9 अगस्त 2001 को सपा पार्टी के प्रदेश बंद कार्यक्रम के संबंध में तत्कालीन विधायक अफजाल अंसारी मंडी समिति से चार हजार लोगों के साथ जुलूस लेकर तहसील पहुंचे और मुहम्मदाबाद एसडीएम के कार्यालय पहुंचे। सूचना पर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन लोगों को दोपहर 12 बजे रोकने प्रयास किया गया।
इसके बावजूद भी वे कक्ष में घुस गए और दरवाजा, खिड़की के शीशे और बेंच आदि तोड़ने लगे। उनको गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया तो भीड़ में शामिल होकर सभा करने लगे। इस घटना के बाबत पुलिस ने थाना मुहम्मदाबाद में अफजाल अंसारी सहित कुल नौ आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराई गई थी और विवेचना उपरांत आरोप पत्र प्रेषित किया गया। उपरोक्त मामले में आरोप तय हुआ, लेकिन कोई गवाह उपस्थित नहीं हुआ। गवाही के लिए तीन अक्टूबर की तिथि नियत की गई हैं।
गैंगस्टर के मुकदमे में कार्यवाही के लिए 28 सितंबर नियत
गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम/ एमपीएमएलए रामसुध सिंह की अदालत में 1996 के गैंगस्टर के मुकदमे में मुख्तार अंसारी के विरुद्ध विचारण में सोमवार को अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। गवाही के लिए 28 सितंबर की तिथि नियत की गई है।
3 अगस्त 1991 को दोपहर एक बजे अजय राय अपने भाई अवधेश राय के साथ अपने वाराणसी स्थित मकान के गेट पर खड़ा थे। इतने में एक सफेद रंग की मारुति वैन आई, जिसमे मुख्तार अंसारी सहित कुछ लोग मौजूद थे। गाड़ी से उतरे और ताबड़तोड़ फायर करने लगे। सभी के हाथ में असलहे थे।
उन लोगों ने मारुति वैन से भागने का प्रयास किया। अजय राय ने भी अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायर किया। इसके बाद सभी लोग गाड़ी छोड़कर भाग गए। अजय राय अपने भाई अवधेश राय को कबीर चौरा अस्पताल ले गए, जहां पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इन्हीं मामलों को लेकर मुख्तार अंसारी के विरुद्ध थाना मुहम्मदाबाद में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
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गाजीपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद कुमार चौधरी की अदालत में बिहार के तत्कालीन सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सहित कुल आठ लोगों के विरुद्ध आरोप तय हुआ। सोमवार को साक्ष्य के लिए तिथि नियत थी। लेकिन कोई साक्षी उपस्थित नहीं हुआ और अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। न्यायालय द्वारा तीन अक्टूबर की अगली तिथि नियत की गई है।
आठ नवंबर 1993 की सुबह 10. 30 बजे मुहम्मदाबाद कोतवाली के शाहनिंदा चौराहे पर विधि विरुद्ध तरीके से भीड़ एकत्र कर सार्वजनिक मार्ग को जाम कर नारेबाजी और फायरिंग की गई थी। इसको रोकने गए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक बीएन शर्मा के साथ हाथापाई की गई थी। इस संबंध में कोतवाली मुहम्मदाबाद में 127 लोगों को नामजद किया गया था।
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विवेचना के उपरांत पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया। इसमें पप्पू यादव, दीपक कुमार उर्फ दीपक यादव, मनोज भारती, सुकेश राय, समसुल्हक, असरारुलहक उर्फ लाडल, भरत यादव उर्फ फेकन और मंजेलाल राय के विरुद्ध आरोप तय किया गया। सोमवार को मामले में गवाही होनी थी। लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण अदालत ने साक्ष्य के लिए तीन अक्टूबर की तिथि नियत की है।
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नहीं हुई गवाही, तीन अक्टूबर तिथि नियत
गाजीपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद कुमार चौधरी की अदालत में सोमवार को 21 साल पुराने विधि विरुद्ध जमाव एवं तोड़फोड़ के मामले में तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद अफजाल अंसारी सहित अन्य के मामले में सोमवार को गवाही होनी थी। अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हुई। न्यायालय ने इस मामले में तीन अक्टूबर की तिथि नियत की है।
9 अगस्त 2001 को सपा पार्टी के प्रदेश बंद कार्यक्रम के संबंध में तत्कालीन विधायक अफजाल अंसारी मंडी समिति से चार हजार लोगों के साथ जुलूस लेकर तहसील पहुंचे और मुहम्मदाबाद एसडीएम के कार्यालय पहुंचे। सूचना पर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन लोगों को दोपहर 12 बजे रोकने प्रयास किया गया।
इसके बावजूद भी वे कक्ष में घुस गए और दरवाजा, खिड़की के शीशे और बेंच आदि तोड़ने लगे। उनको गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया तो भीड़ में शामिल होकर सभा करने लगे। इस घटना के बाबत पुलिस ने थाना मुहम्मदाबाद में अफजाल अंसारी सहित कुल नौ आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराई गई थी और विवेचना उपरांत आरोप पत्र प्रेषित किया गया। उपरोक्त मामले में आरोप तय हुआ, लेकिन कोई गवाह उपस्थित नहीं हुआ। गवाही के लिए तीन अक्टूबर की तिथि नियत की गई हैं।
गैंगस्टर के मुकदमे में कार्यवाही के लिए 28 सितंबर नियत
गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम/ एमपीएमएलए रामसुध सिंह की अदालत में 1996 के गैंगस्टर के मुकदमे में मुख्तार अंसारी के विरुद्ध विचारण में सोमवार को अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। गवाही के लिए 28 सितंबर की तिथि नियत की गई है।
3 अगस्त 1991 को दोपहर एक बजे अजय राय अपने भाई अवधेश राय के साथ अपने वाराणसी स्थित मकान के गेट पर खड़ा थे। इतने में एक सफेद रंग की मारुति वैन आई, जिसमे मुख्तार अंसारी सहित कुछ लोग मौजूद थे। गाड़ी से उतरे और ताबड़तोड़ फायर करने लगे। सभी के हाथ में असलहे थे।
उन लोगों ने मारुति वैन से भागने का प्रयास किया। अजय राय ने भी अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायर किया। इसके बाद सभी लोग गाड़ी छोड़कर भाग गए। अजय राय अपने भाई अवधेश राय को कबीर चौरा अस्पताल ले गए, जहां पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इन्हीं मामलों को लेकर मुख्तार अंसारी के विरुद्ध थाना मुहम्मदाबाद में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।