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Ghazipur News: बुखार होने पर खर्च करने पड़ रहे तीन हजार से ज्यादा
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गाजीपुर। इन दिनों वायरल फीवर, चिकनगुनिया, टायफाइड और डेंगू के प्रकोप से हर कोई परेशान है। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की भीड़ लग रही है। इससे डॉक्टरों और जांच केंद्र संचालकों की तो चांदी है लेकिन मरीजों को शारीरिक परेशानी के साथ जेब भी ढीली हो रही है। सामान्य बुखार होने पर भी इलाज में तीन हजार रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। सुबह करीब 11 बज रहे थे। एक निजी चिकित्सक के अस्पताल में 33 वर्षीय मरीज पहुंचा। वह शरीर में शरीर में दर्द औैर बुखार से पीड़ित था। डॉक्टर के यहां सौ रुपये की पर्ची कटवाई और नंबर आने पर दिखाया। उसे डॉक्टर ने डेंगू, सीबीसी और बिडाल की जांच लिख दी। तीनों जांच कराने में 1710 रुपये देने पड़े। इसके बाद वह जांच रिपोर्ट लेकर लेकर फिर डॉक्टर के पास पहुंचा तो बताया गया कि उसे टायफाइड है। 15 दिन दवा लेनी होगी। मेडिकल स्टोर से उसने पांच दिन की दवा ली, जिसके लिए 580 रुपये खर्च करने पड़े। जी हां, यह जनपद में किसी भी प्राइवेट अस्पताल में देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए की सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए कम से कम दो दिन चक्कर काटने पड़ते हैं। इसके बाद ही उसकी जांच और दवा मिल पाती है।
मौसम में बदलाव की वजह से लोग वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार है। रोज अस्पतालों में मरीजों भीड़ लग रहती है। वहीं, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 70 से 80 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इनमें 15 से 20 मरीज भर्ती हो रहे हैं। वहीं, जांच में दो दिन का समय लग रहा है। इस कारण बहुत से मरीज निजी अस्पताल का रुख कर रहे हैं। जहां, डॉक्टर की फीस और जांच से लेकर पांच दिन की दवाई में तीन हजार रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर पपीता, कीवी, ड्रैगन फ्रूट्स, नारियल पानी आदि में खर्च होता है।
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मौसम में बदलाव की वजह से लोग वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार है। रोज अस्पतालों में मरीजों भीड़ लग रहती है। वहीं, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 70 से 80 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इनमें 15 से 20 मरीज भर्ती हो रहे हैं। वहीं, जांच में दो दिन का समय लग रहा है। इस कारण बहुत से मरीज निजी अस्पताल का रुख कर रहे हैं। जहां, डॉक्टर की फीस और जांच से लेकर पांच दिन की दवाई में तीन हजार रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर पपीता, कीवी, ड्रैगन फ्रूट्स, नारियल पानी आदि में खर्च होता है।
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