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महेंद्रनाथ बने अध्यक्ष गुलाबचंद सचिव
ghazipur
Updated Thu, 22 Dec 2016 10:49 PM IST
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चुनाव में निर्वाचित पदाधिकारी।
- फोटो : ghazipur
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करेंसी को लेकर करीब डेढ़ माह बाद भी लोगों को पूरी तरह राहत मिलते नहीं दिखाई दे रहा है। शहर में मारा-मारी का दौर कुछ कम हुआ है, तो ग्रामीण इलाकों में अब भी समस्या बरकरार है। गुरुवार को देहात क्षेत्र में लोग बैंक तथा एटीएम का चक्कर काटते दिखाई दिए। अब भी बैंकों पर लंबी कतार लग रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के एटीएम तो पूरी तरह से बंद रहे। जबकि नगर के भी अधिकांश एटीएम की स्थिति यही रही। नगर में जो एटीएम काम कर रहे थे, वहां ग्राहकों की कुछ भीड़ दिखाई दे रही थी।
पिछले आठ नवंबर की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद लोगों में हड़कंप मच गया। इन नोटों को जमा करने और बदलने के लिए लोगों ने बैंकों की दौड़ लगानी शुरू कर दी। प्रतिबंधित नोटों को जमा करने और बदलने के बाद बैंक और एटीएम में 500 और 2000 का नया नोट लेने के लिए भीड़ लगने लगी।
नोटबंदी के बाद सवा महीने तक लगातार मारी-मारी का दौर चला। नगर और ग्रामीण इलाके के एटीएम ग्राहकों का साथ नहीं दिए। ग्राहक पैसे के लिए अभी भी परेशान हैं। अधिकांश एटीएम बंद रहे, जो एटीएम काम करते नजर आए उन पर ग्राहकों का लगातार इस कदर दबाव बना रहा कि कुछ ही घंटे में पैसा समाप्त हो जा रहा था। नोटबंदी के एक माह बाद तो शहर के बैंकों में ग्राहकों का दबाव काफी कम हो गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में करेंसी के लिए अभी भी परेशानी हो रही है। ग्राहकों की कसरत करनी पड़ रही है। गुरुवार को भी कई बैंकों में करेंसी की किल्लत बनी रही। नगर के अधिकांश एटीएम के शटर गिरे रहने से ग्राहकों की लाइन लगी रही। अन्य दिनों की अपेक्षा लाइन कुछ कम थी। जिससे ग्राहकों ने राहत महसूस किया।
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पिछले आठ नवंबर की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से 500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद लोगों में हड़कंप मच गया। इन नोटों को जमा करने और बदलने के लिए लोगों ने बैंकों की दौड़ लगानी शुरू कर दी। प्रतिबंधित नोटों को जमा करने और बदलने के बाद बैंक और एटीएम में 500 और 2000 का नया नोट लेने के लिए भीड़ लगने लगी।
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नोटबंदी के बाद सवा महीने तक लगातार मारी-मारी का दौर चला। नगर और ग्रामीण इलाके के एटीएम ग्राहकों का साथ नहीं दिए। ग्राहक पैसे के लिए अभी भी परेशान हैं। अधिकांश एटीएम बंद रहे, जो एटीएम काम करते नजर आए उन पर ग्राहकों का लगातार इस कदर दबाव बना रहा कि कुछ ही घंटे में पैसा समाप्त हो जा रहा था। नोटबंदी के एक माह बाद तो शहर के बैंकों में ग्राहकों का दबाव काफी कम हो गया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में करेंसी के लिए अभी भी परेशानी हो रही है। ग्राहकों की कसरत करनी पड़ रही है। गुरुवार को भी कई बैंकों में करेंसी की किल्लत बनी रही। नगर के अधिकांश एटीएम के शटर गिरे रहने से ग्राहकों की लाइन लगी रही। अन्य दिनों की अपेक्षा लाइन कुछ कम थी। जिससे ग्राहकों ने राहत महसूस किया।
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