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Ghazipur News: काशी की गंगा जैसे बन जाएं घाट तो बढ़ जाएगी गाजीपुर की ठाठ

Wed, 27 Sep 2023 12:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 27 Sep 2023 12:16 AM IST
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Ghazipur's grandeur will increase if ghats are built like Kashi's Ganga.
फोटो-
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विश्व पर्यटन दिवस
-जल मार्ग से भी जुड़ चुका है जनपद, कलेक्टर घाट के सुंदरीकरण की है योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। काशी में नमो घाट से लेकर अस्सी घाट के बीच गंगा नदी जो किनारा है कुछ वैसा ही गाजीपुर से गुजरी मोक्षदायिनी मां गंगा के किनारे घाटों को विकसित कर और सुंदरीकरण करके किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए अब अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक पहल करने लगे हैं। प्रशासन ने भी कलेक्टर घाट के सुंदरीकरण कराने का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया है।
गंगा नदी के किनारे बसे गाजीपुर को लहुरी काशी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। अब तो जनपद जल मार्ग से भी जुड़ गया है। यहां से विदेशी पर्यटक अब जलमार्ग से वाराणसी और बिहार के रास्ते आने-जाने लगे हैं। वे यहां आने के बाद शहर और लॉर्ड कार्नवालिस का मकबरा भी देखने जाते हैं। हालांकि जिला प्रशासन भी अब कुछ ध्यान देने लगा है।
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यहां गंगा किनारे घाटों पर काशी की तर्ज पर गंगा आरती कराने की पहल कर रहा है। इसके लिए चीतनाथ घाट पर बीते दिनों नमामि गंगे योजना के तहत गंगा आरती भी कराई। साथ ही प्रशासन ने सभी घाटों पर समिति बनाकर रोजाना या सप्ताह में एक दिन गंगा आरती करने की अपील भी की थी, जिसका असर सप्ताह में देखने को मिलने लगा है।
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इसी तरह उन्होंने पर्यटन संवर्धन योजना के तहत सभी विधानसभा क्षेत्रों में काम कराने के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव भी लिया गया। पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर किए गए फिडिंग के मुताबिक वर्ष 2019 में सात लाख 9 हजार 448 घरेलू पर्यटक आए थे। जबकि साल 2020 में 60 हजार 25 घरेलू पर्यटक पहुंचे। हालांकि इसके बाद घरेलू पर्यटकों का रूझान कम हो गया था। नतीजन वर्ष 2021 में 50 हजार 76 घरेलू पर्यटक घूमने के लिए गाजीपुर पहुंचे।
लेकिन, शासन-प्रशासन के तमाम प्रयासों से इसे फिर से बढ़ावा मिलने लगा है, जिससे एक बार फिर घरेलू पर्यटकों की संख्या 58 हजार 344 पहुंच गई, जिसके इस वर्ष और बढ़ने की संभावना है। स्थानीय लोग और बाहर से जनपद में आने वाले लोग अब गंगा किनारे जाने के बाद वहां के घाटों के सुंदरीकरण को लेकर चर्चा करने लगे हैं। क्योंकि यहां गंगा किनारे नवापुरा, ददरी घाट, कलेक्ट्रेटर घाट, स्टीमर घाट, चीतनाथ घाट, श्मशान घाट समेच कच्चे-पक्के बहुत से घाट हैं। जहां घाट को विकसित करा दिया जाए तो लोगों का आना-जाना शाम को बढ़ जाएगा और इससे रोजगार की संभावनाएं में भी इजाफा होगा।
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जनपद के प्रमुख पर्यटन स्थल
दादरी घाट और चीतनाथ घाटः गंगा नदी के किनारे बना हुआ है। घाट के पास में ही राधा कृष्ण मंदिर और शनि मंदिर है। मकर संक्रांति के समय यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं।
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संकट मोचन मंदिरः यह मंदिर दादरी घाट के पास में ही है। हनुमान, भगवान विष्णु सहित कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं।
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लॉर्ड कार्नवालिस का मकबराः शहर के पीजी कॉलेज के पास लॉर्ड कार्नवालिस का मकबरा है। लॉर्ड कार्नवालिस की मृत्यु इसी स्थान पर हुई थी। गार्डन के बीच में बने इस मकबरे का आकार वृत्ताकार है और विशाल गुंबद युक्त संरचना में 12 खंभों पर यह मकबरा टिका हुआ है। यहां पर लॉर्ड कार्नवालिस की मूर्ति एक वर्गाकार चबूतरे पर रखी हुई है।
महाहर धाम - मरदह का महाहर धाम एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है, कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम के पिता दशरथ ने की थी। महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय मेला लगता है।
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भगवान परशुराम मंदिरः यह प्राचीन मंदिर पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है, जो हरपुर में स्थित है। मंदिर मुख्य सड़क में स्थित है।
मां कामाख्या देवी मंदिरः यह प्राचीन मंदिर गहमर के करहिया गांव में है। कहा जाता है कि इस मंदिर में आकर मनोकामना मांगने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसलिए यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं।
सिद्धपीठ मौनी बाबा मठः यह मठ मंदिर गंगा नदी के किनारे चोचकपुर में स्थित है। गंगा नदी का यहां से सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर मकर संक्रांति के समय मेला भी लगता है, जिसमें बहुत सारे लोग यहां पर घूमने के लिए आते हैं।
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पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कलेक्टर घाट के सुंदरीकरण के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। विश्व पर्यटन दिवस पर भी विविध आयोजन होंगे। -दिव्या तिवारी, पर्यटन सूचना अधिकारी

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गंगा किनारे घाटों को विकसित करने से यहां जनपद की अलग पहचान बन जाएगी। इसके लिए मैं भी पहल करूंगा। मैं मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री से भी इसके के लिए अनुरोध करूंगा।- विशाल सिंह चंचल, एमएलसी
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