{"_id":"5dbb28e98ebc3e012c654cc0","slug":"ghazipur-news-ghazipur-news-vns4919430111","type":"story","status":"publish","title_hn":"डाला छठ: नहाय खाय संग सूर्य षष्ठी का पर्व का प्रारंभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डाला छठ: नहाय खाय संग सूर्य षष्ठी का पर्व का प्रारंभ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व डाला छठ का व्रत गुरुवार से शुरू हो गया। पहले दिन महिलाओं ने लौकी-भात खाकर व्रत रखा और घरों में छठ मइया की आराधना में व्रती महिलाएं पूरी तरह से लीन हो गईं। इस बीच घरों में छठी मइया के गीत भी गाए गए। जिले में डाला छठ पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पिछले कई दिनों से घर-घर में इसकी जोरदार तैयारी हो रही थी।
गुरुवार की सुबह से ही व्रती महिलाओं में डाला छठ के व्रत को लेकर जबरदस्त उत्साह नजर आ रहा था। परंपरा के तहत छठ पर्व के दो दिन पहले से ही शरीर की शुद्धि का उपाय शुरू कर दिया जाता है। पहले दिन नहाय खाय का क्रम चलता है। इसके तहत गुरुवार को स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने लौका-भात खाकर व्रत धारण किया। इसे लेकर व्रती महिलाओं के घरवाले भी व्यस्त रहे। बताया जाता है कि लौका-भात जहां आसानी से पच जाता है, वहीं इससे शुद्धता भी बनी रहती है। सभी घरों में इस परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था और विश्वास के साथ किया जाता है। डाला छठ का व्रत शुरू होने के साथ ही घरों में छठ मइया की पूजा का भी दौर शुरू हो गया। व्रती महिलाएं पूरी तरह से छठ मइया की आराधना मेें लीन हो गईं और उनके द्वारा छठ मइया का गीत भी गाया गया।
नहाय-खाय के बाद खरना आज
गाजीपुर। डाला छठ पर्व के तहत दूसरे दिन शुक्रवार को व्रती महिलाएं खरना करेंगी। खरना में दिन भर व्रत रहने के बाद शाम के समय पूड़ी तथा खीर खाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि करीब 24 घंटे के निर्जला ब्रत को करने से पहले खरना के रूप में किए जाने वाले इस व्रत से शरीर की स्वस्थता बनी रहती है। छठ पर्व के एक दिन पहले इस खरना के बाद से ही व्रत शुरू हो जाता है। इसके बाद महिलाएं छठ की पूजा पाठ में पूरी तरह से जुट जाती हैं। घरों में ठेकुआ, खाजा, कसार आदि पकवान बनाया जाता है। व्रत का यह क्रम तीसरे दिन भोर में भगवान भाष्कर को अघ्र्य देने के बाद समाप्त होता है। करीब 36 घंटे बाद पूजा संपन्न हो जाने पर महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर व्रत को तोड़ती है।
विज्ञापन
सूप और दौरी की खरीदारी कर रहे लोग
गाजीपुर। छठ तैयारी को लेकर गुरुवार को बाजारों में सूप, मऊनी, मिट्टी के बर्तनों के साथ ही पूजा सामग्रियों की जम कर खरीददारी की। बाजारों में बांस के सूप, दौरी, मऊनी, टोकरी आदि की दुकानों पर लोगों की भीड़ बनी रही। इसी प्रकार मिट्टी की दिया, ढकनी, चौमुख, छोटा ढक्कन भी अलग अलग दामों पर बिकते रहे। शहर में इसके लिए कई स्थानों पर दुकानें लगाई गई था। इसी प्रकार रोली, अक्षत, दिया, बत्ती, अगरबत्ती, कपूर आदि पूजा सामग्रियों की दुकानों पर लोग खरीदारी करते रहे। इसके चलते शहर तथा ग्रामीण इलाकों के बाजारों में देर शाम तक चहल-पहल बनी रही।
घाटों पर वेदी बनाने की मची रही होड़
गाजीपुर। छठ पूजा के मद्देनजर गंगा घाटों और नदी, पोखरों के किनारे वेदी का निर्माण का सिलसिला शुरू हो गया है। लोग जलाशयों के किनारे घास-फूंस साफकर मिट्टी की बड़ी-बड़ी वेदी बना रहे हैं। परंपरा के अनुसार, इसी वेदी पर पूजा सामग्री रखकर शाम तो अस्ताचल तथा सुबह में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कई व्रती महिलाएं इस वेदी पर अखंड दीया रखकर छठी मइया के गीत गाती रहती है। शहर के विभिन्न गंगा घाटों पर भी लोग वेदी बनाते रहे। इसी प्रकार दिलदारनगर, जमानिया, गहमर, सैदपुर, जखनिया आदि इलाकों में भी नदी, पोखरों आदि के किनारें श्रद्धालुओं की ओर से बेदी बनाए जाने की सूचना मिली है।
विज्ञापन
गुरुवार की सुबह से ही व्रती महिलाओं में डाला छठ के व्रत को लेकर जबरदस्त उत्साह नजर आ रहा था। परंपरा के तहत छठ पर्व के दो दिन पहले से ही शरीर की शुद्धि का उपाय शुरू कर दिया जाता है। पहले दिन नहाय खाय का क्रम चलता है। इसके तहत गुरुवार को स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने लौका-भात खाकर व्रत धारण किया। इसे लेकर व्रती महिलाओं के घरवाले भी व्यस्त रहे। बताया जाता है कि लौका-भात जहां आसानी से पच जाता है, वहीं इससे शुद्धता भी बनी रहती है। सभी घरों में इस परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था और विश्वास के साथ किया जाता है। डाला छठ का व्रत शुरू होने के साथ ही घरों में छठ मइया की पूजा का भी दौर शुरू हो गया। व्रती महिलाएं पूरी तरह से छठ मइया की आराधना मेें लीन हो गईं और उनके द्वारा छठ मइया का गीत भी गाया गया।
विज्ञापन
नहाय-खाय के बाद खरना आज
गाजीपुर। डाला छठ पर्व के तहत दूसरे दिन शुक्रवार को व्रती महिलाएं खरना करेंगी। खरना में दिन भर व्रत रहने के बाद शाम के समय पूड़ी तथा खीर खाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि करीब 24 घंटे के निर्जला ब्रत को करने से पहले खरना के रूप में किए जाने वाले इस व्रत से शरीर की स्वस्थता बनी रहती है। छठ पर्व के एक दिन पहले इस खरना के बाद से ही व्रत शुरू हो जाता है। इसके बाद महिलाएं छठ की पूजा पाठ में पूरी तरह से जुट जाती हैं। घरों में ठेकुआ, खाजा, कसार आदि पकवान बनाया जाता है। व्रत का यह क्रम तीसरे दिन भोर में भगवान भाष्कर को अघ्र्य देने के बाद समाप्त होता है। करीब 36 घंटे बाद पूजा संपन्न हो जाने पर महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर व्रत को तोड़ती है।
विज्ञापन
सूप और दौरी की खरीदारी कर रहे लोग
गाजीपुर। छठ तैयारी को लेकर गुरुवार को बाजारों में सूप, मऊनी, मिट्टी के बर्तनों के साथ ही पूजा सामग्रियों की जम कर खरीददारी की। बाजारों में बांस के सूप, दौरी, मऊनी, टोकरी आदि की दुकानों पर लोगों की भीड़ बनी रही। इसी प्रकार मिट्टी की दिया, ढकनी, चौमुख, छोटा ढक्कन भी अलग अलग दामों पर बिकते रहे। शहर में इसके लिए कई स्थानों पर दुकानें लगाई गई था। इसी प्रकार रोली, अक्षत, दिया, बत्ती, अगरबत्ती, कपूर आदि पूजा सामग्रियों की दुकानों पर लोग खरीदारी करते रहे। इसके चलते शहर तथा ग्रामीण इलाकों के बाजारों में देर शाम तक चहल-पहल बनी रही।
घाटों पर वेदी बनाने की मची रही होड़
गाजीपुर। छठ पूजा के मद्देनजर गंगा घाटों और नदी, पोखरों के किनारे वेदी का निर्माण का सिलसिला शुरू हो गया है। लोग जलाशयों के किनारे घास-फूंस साफकर मिट्टी की बड़ी-बड़ी वेदी बना रहे हैं। परंपरा के अनुसार, इसी वेदी पर पूजा सामग्री रखकर शाम तो अस्ताचल तथा सुबह में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कई व्रती महिलाएं इस वेदी पर अखंड दीया रखकर छठी मइया के गीत गाती रहती है। शहर के विभिन्न गंगा घाटों पर भी लोग वेदी बनाते रहे। इसी प्रकार दिलदारनगर, जमानिया, गहमर, सैदपुर, जखनिया आदि इलाकों में भी नदी, पोखरों आदि के किनारें श्रद्धालुओं की ओर से बेदी बनाए जाने की सूचना मिली है।