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कम नहीं हो रही पैसों के लिए मारामारी
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:11 AM IST
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कम नहीं हो रही पैसों के लिए मारामारी
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करेंसी के लिए लोगों अब लोगों के दिमाग की बत्ती गुल होने लगी है। लोग बैंक की व्यवस्था पर झल्लाने लगे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों में ऐसा देखा जा रहा है कि उपभोक्ताओं के दो-तीन बार दौड़ लगाने के बाद भी खत्म होने की वजह से पैसा उन्हें नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग बैंक की व्यवस्था को कोसते हुए निराश घर लौट जा रहे हैं।
500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध के बाद इसे बदलने और जमा करने के लिए शहर के साथ ही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के प्राय: सभी बैंकों में लोगों की होड़ मची हुई है। आलम यह है कि लोग सुबह नाश्ता-पानी छोड़कर बैंकों के खुलने से पहले ही उसके सामने कतार में लग जा रहे हैं।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में कोई दस तो कोई पंद्रह किलोमीटर की दूरी से पहुंचकर सुबह ही कतार में खड़ा होकर धक्का-मुक्की के बीच अपना नंबर आने का इंतजार करने लग रहा है। अधिकांश बैंकों में ऐसा हो रहा है कि बीच में ही पैसा खत्म हो जा रहा है, जिससे उपभोक्ता बैंक की व्यवस्था को कोसते हुए निराश लौट जा रहे है। दुबिहा के रामनाथ यादव ने बताया कि पैसा के लिए पिछले तीन दिन से बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। सरकार ने नोटों पर प्रतिबंधित लगा दिया, लेकिन इसे बदलने और जमा करने की अच्छी व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है।
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शहर के मिश्रबाजार स्थित स्टेट बैंक में दिन में साढ़े 11 बजे का नजारा यह था कि एक तरफ जहां दर्जनों लोग लाइन में खड़े थे, वहीं सैकड़ों लोग बैंक के अंदर। दिन में एक बजे गोराबाजार स्थिति स्टेट बैंक पीजी की शाखा में दर्जनों छात्र-छात्राएं पैसा जमा करने और बदलने के लिए लाइन में खड़े रहे। लंबी लाइन के बीच कई छात्र काफी देर से खड़े होने के बाद पैर में दर्द होने पर वहीं बैठकर अपना नंबर का इंतजार करते नजर आए।
शादी-विवाह की खुशी में छा रही करेंसी की उदासी : गाजीपुर। कभी लोगों को खुश करने वाले 500 और 1000 के नोट शादी-विवाह के आयोजनों में परेशानी का सबब बन गए हैं। वैसे तो अपने ही पैसे के लिए हर कोई बैंकों और एटीएम की तरफ भागा जा रहा है, लेकिन करेंसी को लेकर सबसे ज्यादा परेशान वे लोग हैं, जिनके घर शादी सहित अन्य आयोजन है। शादी में खर्च के लिए रिश्तेदारों से उधारी का सहारा लेने के साथ ही टेंट, बाजा, सजावट सहित अन्य की व्यवस्था के लिए भी उधार लगाने को विवश हो रहे हैं।
नोटों पर प्रतिबंध के बाद वैसे तो आम और खास सभी परेशान है, लेकिन सबसे परेशानी उन लोगों के सामने जिनके घर शादी-विवाह का आयोजन है। वे इस बात से परेशान हैं कि करेंसी के लिए उन्हें तरह-तरह का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोग रिश्तेदारों से अनुनय-विनय कर शादी के लिए उधार पैसा लेकर और टेंट, बिजली, बाजा सहित व्यवस्था के लिए उधार लगाकर बेटी या बेटा का हाथ पीला करने को विवश हैं। ऐसे लोगों के लिए नोटों पर प्रतिबंध आफत बन गई है।
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500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध के बाद इसे बदलने और जमा करने के लिए शहर के साथ ही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के प्राय: सभी बैंकों में लोगों की होड़ मची हुई है। आलम यह है कि लोग सुबह नाश्ता-पानी छोड़कर बैंकों के खुलने से पहले ही उसके सामने कतार में लग जा रहे हैं।
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खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में कोई दस तो कोई पंद्रह किलोमीटर की दूरी से पहुंचकर सुबह ही कतार में खड़ा होकर धक्का-मुक्की के बीच अपना नंबर आने का इंतजार करने लग रहा है। अधिकांश बैंकों में ऐसा हो रहा है कि बीच में ही पैसा खत्म हो जा रहा है, जिससे उपभोक्ता बैंक की व्यवस्था को कोसते हुए निराश लौट जा रहे है। दुबिहा के रामनाथ यादव ने बताया कि पैसा के लिए पिछले तीन दिन से बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। सरकार ने नोटों पर प्रतिबंधित लगा दिया, लेकिन इसे बदलने और जमा करने की अच्छी व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है।
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शहर के मिश्रबाजार स्थित स्टेट बैंक में दिन में साढ़े 11 बजे का नजारा यह था कि एक तरफ जहां दर्जनों लोग लाइन में खड़े थे, वहीं सैकड़ों लोग बैंक के अंदर। दिन में एक बजे गोराबाजार स्थिति स्टेट बैंक पीजी की शाखा में दर्जनों छात्र-छात्राएं पैसा जमा करने और बदलने के लिए लाइन में खड़े रहे। लंबी लाइन के बीच कई छात्र काफी देर से खड़े होने के बाद पैर में दर्द होने पर वहीं बैठकर अपना नंबर का इंतजार करते नजर आए।
शादी-विवाह की खुशी में छा रही करेंसी की उदासी : गाजीपुर। कभी लोगों को खुश करने वाले 500 और 1000 के नोट शादी-विवाह के आयोजनों में परेशानी का सबब बन गए हैं। वैसे तो अपने ही पैसे के लिए हर कोई बैंकों और एटीएम की तरफ भागा जा रहा है, लेकिन करेंसी को लेकर सबसे ज्यादा परेशान वे लोग हैं, जिनके घर शादी सहित अन्य आयोजन है। शादी में खर्च के लिए रिश्तेदारों से उधारी का सहारा लेने के साथ ही टेंट, बाजा, सजावट सहित अन्य की व्यवस्था के लिए भी उधार लगाने को विवश हो रहे हैं।
नोटों पर प्रतिबंध के बाद वैसे तो आम और खास सभी परेशान है, लेकिन सबसे परेशानी उन लोगों के सामने जिनके घर शादी-विवाह का आयोजन है। वे इस बात से परेशान हैं कि करेंसी के लिए उन्हें तरह-तरह का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोग रिश्तेदारों से अनुनय-विनय कर शादी के लिए उधार पैसा लेकर और टेंट, बिजली, बाजा सहित व्यवस्था के लिए उधार लगाकर बेटी या बेटा का हाथ पीला करने को विवश हैं। ऐसे लोगों के लिए नोटों पर प्रतिबंध आफत बन गई है।