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Ghazipur News: उफान पर गंगा, गोमती का पानी खेतों तक पहुंचा
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गाजीपुर। गंगा के जलस्तर में बढ़ाव लगातार जारी है। जनपद में बुधवार को गंगा का जलस्तर छह से सात सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 60.560 और दोपहर में तीन बजे 61.090 मीटर दर्ज किया गया। दूसरी तरफ सैदपुर क्षेत्र में गंगा में मिलने वाली गोमती नदी भी उफना चुकी है। गोमती नदी का पानी सैदपुर क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों के खेतों में पसर चुका है। लगभग 25 बीघा खेत प्रभावित है।
सैदपुर क्षेत्र के औड़िहार, कुसई, खरौना, सूरजभान चक, सिधौना, नगरिया नाला, गौरी, गोरखा, खेतारपुर, गौरहट आदि गांवों के खेत में गोमती नदी का पानी आ चुका है। ये सभी गांव गोमती नदी के तटवर्ती इलाके की श्रेणी में आते हैं। तटवर्ती इलाकों के लोगों का मानना है कि इसी तरह गोमती का जलस्तर बढ़ता रहा तो जल्द ही तटवर्ती इलाके के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। इसी तरह गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव से प्रमुख घाटों की अधिकांश सीढि़यां जलमग्न हो चुकी हैं। नगर स्थित ददरीघाट पर पांच-छह सीढि़यां ही डूबने से बची हैं। यहां पर पानी घाट पर स्थित मंदिर तक पहुंच चुका है।
मटमैला हुआ रंग, दिखने लगीं जलकुंभियां
गंगा में लगातार बढ़ाव से पानी का रंग भी बदल गया है। पहले जो पानी साफ दिखता था अब वह मटमैले रंग में बदल गया है। जब-जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, उसका रंग मटमैला हो जाता है। साथ ही गंगा की जलधारा में जलकुंभियां प्रवाहित हो रही हैं।
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नालों में घुसने लगा गंगा का पानी
नगर में विभिन्न गंगा घाटों पर लगभग 23 नालों का पानी गिरता है। इनमें ददरीघाट, कलक्टरघाट, चीतनाथ, मंसूर घाट, रामघाट, अंजनी घाट, सिकंदरपुर, महादेवा आदि गंगा घाट शामिल हैं। गंगा में बढ़ते जलस्तर के इन नालों में पानी अब बैक होने लगा है। हालांकि सड़कों पर अभी तक नालियां ओवरफ्लो नहीं हुईं हैं, लेकिन इसी तरह नाले से लगातार गंगा का पानी बैक होता रहेगा, तो जल्द ही नगर की सड़कों पर नालियां ओवरफ्लो होने लगेंगी।
बीते वर्षों की स्थिति
-2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर
-2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर
-2019 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
बाढ़ की स्थिति का मापदंड
62.105 मीटर, चेतावनी बिंदु
63.105 मीटर, खतरा बिंदु
65.220 मीटर, उ.बा .स्तर
पिछले वर्ष अगस्त में नौ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी गंगा
गाजीपुर। पिछले वर्ष सात अगस्त तक गंगा के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार नौ सेमी प्रति घंटे थी। हालांकि इस वर्ष अभी तक इतनी रफ्तार से गंगा के जलस्तर में इजाफा नहीं हुआ है। पिछले वर्ष जिले में बाढ़ नहीं आई थी। यह तुलनात्मक आंकड़ा संभावित बाढ़ की श्रेणी में आने वाले गांवों के ग्रामीणों को ढांढस बंधा रहा है। संवाद
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सैदपुर क्षेत्र के औड़िहार, कुसई, खरौना, सूरजभान चक, सिधौना, नगरिया नाला, गौरी, गोरखा, खेतारपुर, गौरहट आदि गांवों के खेत में गोमती नदी का पानी आ चुका है। ये सभी गांव गोमती नदी के तटवर्ती इलाके की श्रेणी में आते हैं। तटवर्ती इलाकों के लोगों का मानना है कि इसी तरह गोमती का जलस्तर बढ़ता रहा तो जल्द ही तटवर्ती इलाके के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। इसी तरह गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ाव से प्रमुख घाटों की अधिकांश सीढि़यां जलमग्न हो चुकी हैं। नगर स्थित ददरीघाट पर पांच-छह सीढि़यां ही डूबने से बची हैं। यहां पर पानी घाट पर स्थित मंदिर तक पहुंच चुका है।
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मटमैला हुआ रंग, दिखने लगीं जलकुंभियां
गंगा में लगातार बढ़ाव से पानी का रंग भी बदल गया है। पहले जो पानी साफ दिखता था अब वह मटमैले रंग में बदल गया है। जब-जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, उसका रंग मटमैला हो जाता है। साथ ही गंगा की जलधारा में जलकुंभियां प्रवाहित हो रही हैं।
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नालों में घुसने लगा गंगा का पानी
नगर में विभिन्न गंगा घाटों पर लगभग 23 नालों का पानी गिरता है। इनमें ददरीघाट, कलक्टरघाट, चीतनाथ, मंसूर घाट, रामघाट, अंजनी घाट, सिकंदरपुर, महादेवा आदि गंगा घाट शामिल हैं। गंगा में बढ़ते जलस्तर के इन नालों में पानी अब बैक होने लगा है। हालांकि सड़कों पर अभी तक नालियां ओवरफ्लो नहीं हुईं हैं, लेकिन इसी तरह नाले से लगातार गंगा का पानी बैक होता रहेगा, तो जल्द ही नगर की सड़कों पर नालियां ओवरफ्लो होने लगेंगी।
बीते वर्षों की स्थिति
-2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर
-2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर
-2019 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर
बाढ़ की स्थिति का मापदंड
62.105 मीटर, चेतावनी बिंदु
63.105 मीटर, खतरा बिंदु
65.220 मीटर, उ.बा .स्तर
पिछले वर्ष अगस्त में नौ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी गंगा
गाजीपुर। पिछले वर्ष सात अगस्त तक गंगा के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार नौ सेमी प्रति घंटे थी। हालांकि इस वर्ष अभी तक इतनी रफ्तार से गंगा के जलस्तर में इजाफा नहीं हुआ है। पिछले वर्ष जिले में बाढ़ नहीं आई थी। यह तुलनात्मक आंकड़ा संभावित बाढ़ की श्रेणी में आने वाले गांवों के ग्रामीणों को ढांढस बंधा रहा है। संवाद