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Ghazipur News: छुट्टा पशु मचा रहे बवाल, खड़े पशु बंदी वाहन पर उठ रहे सवाल
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वाहन चलाने और पशुओं को पकड़ने के लिए अभी तक किसी चालक और कर्मचारी की तैनाती नहीं हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
कासिमाबाद। छुट्टा पशुओं की बढ़ती संख्या से एक बार फिर कासिमाबाद कस्बा सहित मार्गों पर दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। पशुओं के रखरखाव के लिए विकासखंड में दो बड़े पशु आश्रय केंद्र संचालित हैं। यही नहीं इन पशुओं को पकड़ने के लिए क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग 20 लाख रुपए की लागत से पशु बंदी वाहन भी खरीद लिया गया है। इसके बाद भी यहां के सभी मार्गों पर पशुओं के झुंड दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुओं के नहीं पकड़े जाने के कारण ये खेतों में किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। वहीं मार्गों पर चलने से आने जाने वाले लोगों में भी दुर्घटना का डर बना है।
मालूम हो कि कासिमाबाद विकासखंड में कुल 99 ग्राम पंचायतें आतीं हैं। इसी प्रकार एक नगर पंचायत के रूप में बहादुरगंज जैसा बड़ा कस्बा भी इसी विकास खंड में है। प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है, गोवध पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस रोक के चलते किसानों के खेतों के साथ सड़कों पर छुट्टा एवं आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
इन पशुओं से किसानों की फसल बचाने और दुर्घटनाएं रोकने के लिए इस विकासखंड में दो बृहद गोवंश आश्रय केंद्र संचालित है। सरकार की योजना के चलते इस विकासखंड में लगभग हर गांव में लाखों रुपये का पशु शेड वितरित किया गया है। इसके बाद भी छुट्टा एवं आवारा पशु लगातार दिखाई दे रहे हैं।
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ऐसे पशुओं को पकड़ने के लिए क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग 20 लाख एक पशु बंदी वाहन भी खरीदा गया है। एक महीने से अधिक समय से यह वाहन विकासखंड के परिसर की शोभा बढ़ा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस वाहन को चलाने और पशुओं को पकड़ने के लिए अभी तक किसी चालक और कर्मचारी की तैनाती नहीं हुई है।
छुट्टा एवं आवारा पशु कासिमाबाद तहसील के त्रिमुहानी से लेकर थाना परिसर, ब्लॉक परिसर के साथ आने जाने वाले हर मार्गों पर देखे जा सकते हैं । पर इन्हें गोवंश आश्रय केंद्र भेजवाने के लिए कोई अधिकारी-कर्मचारी जहमत नहीं उठा रहा है। कासिमाबाद चौक पर आए दिन पशुओं के खड़े होने से दुर्घटना होते-होते बच रही है । ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराकर इन पशुओं को गोवंश आश्रय केंद्र भेजवाने की मांग किया है।
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पशुओं को पकड़ने के लिए कैटल कैचर ब्लॉक परिसर में खड़ा है। इस वाहन को संचालित करने के साथ चालक और कर्मचारियों की व्यवस्था ग्राम पंचायतों के माध्यम से होनी है। जिन ग्राम पंचायतों में छुट्टा एवं आवारा पशु दिखते हैं वहां के ग्राम प्रधान और सचिव जिम्मेदार होंगे। इस वाहन को चलाने के लिए चालक और पशुओं को पकड़ने के लिए कर्मचारियों की तैनाती अधिकृत रूप से नहीं है। सभी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के पास अभी है।
भीमराव प्रसाद, खंड विकास अधिकारी कासिमाबाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कासिमाबाद। छुट्टा पशुओं की बढ़ती संख्या से एक बार फिर कासिमाबाद कस्बा सहित मार्गों पर दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। पशुओं के रखरखाव के लिए विकासखंड में दो बड़े पशु आश्रय केंद्र संचालित हैं। यही नहीं इन पशुओं को पकड़ने के लिए क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग 20 लाख रुपए की लागत से पशु बंदी वाहन भी खरीद लिया गया है। इसके बाद भी यहां के सभी मार्गों पर पशुओं के झुंड दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुओं के नहीं पकड़े जाने के कारण ये खेतों में किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। वहीं मार्गों पर चलने से आने जाने वाले लोगों में भी दुर्घटना का डर बना है।
मालूम हो कि कासिमाबाद विकासखंड में कुल 99 ग्राम पंचायतें आतीं हैं। इसी प्रकार एक नगर पंचायत के रूप में बहादुरगंज जैसा बड़ा कस्बा भी इसी विकास खंड में है। प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है, गोवध पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस रोक के चलते किसानों के खेतों के साथ सड़कों पर छुट्टा एवं आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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इन पशुओं से किसानों की फसल बचाने और दुर्घटनाएं रोकने के लिए इस विकासखंड में दो बृहद गोवंश आश्रय केंद्र संचालित है। सरकार की योजना के चलते इस विकासखंड में लगभग हर गांव में लाखों रुपये का पशु शेड वितरित किया गया है। इसके बाद भी छुट्टा एवं आवारा पशु लगातार दिखाई दे रहे हैं।
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ऐसे पशुओं को पकड़ने के लिए क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग 20 लाख एक पशु बंदी वाहन भी खरीदा गया है। एक महीने से अधिक समय से यह वाहन विकासखंड के परिसर की शोभा बढ़ा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस वाहन को चलाने और पशुओं को पकड़ने के लिए अभी तक किसी चालक और कर्मचारी की तैनाती नहीं हुई है।
छुट्टा एवं आवारा पशु कासिमाबाद तहसील के त्रिमुहानी से लेकर थाना परिसर, ब्लॉक परिसर के साथ आने जाने वाले हर मार्गों पर देखे जा सकते हैं । पर इन्हें गोवंश आश्रय केंद्र भेजवाने के लिए कोई अधिकारी-कर्मचारी जहमत नहीं उठा रहा है। कासिमाबाद चौक पर आए दिन पशुओं के खड़े होने से दुर्घटना होते-होते बच रही है । ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराकर इन पशुओं को गोवंश आश्रय केंद्र भेजवाने की मांग किया है।
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पशुओं को पकड़ने के लिए कैटल कैचर ब्लॉक परिसर में खड़ा है। इस वाहन को संचालित करने के साथ चालक और कर्मचारियों की व्यवस्था ग्राम पंचायतों के माध्यम से होनी है। जिन ग्राम पंचायतों में छुट्टा एवं आवारा पशु दिखते हैं वहां के ग्राम प्रधान और सचिव जिम्मेदार होंगे। इस वाहन को चलाने के लिए चालक और पशुओं को पकड़ने के लिए कर्मचारियों की तैनाती अधिकृत रूप से नहीं है। सभी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों के पास अभी है।
भीमराव प्रसाद, खंड विकास अधिकारी कासिमाबाद