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सड़कों के आवाजाही पर जनता ने दिया पुलिस को हिसाब
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गाजीपुर। शासन की ओर से घोषित बंदी के बाद जिले में पुलिस और प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। शहर व गांव-गांव में दिन भर बाजार और दुकान बंद करने का सायरन गूंजता रहा। अधिकारी और पुलिस कर्मी वाहनों में सवार होकर एक-एक दुकान, मोहल्ले और सार्वजनिक स्थलों का जायजा लेते रहे। इस बीच सड़क पर आवागमन करने वाले पैदल राहगीर और वाहन स्वामियों से घर से निकलने की वजह भी खंगाली गई। कुल मिलाकर ल में जनपद की पूरी आबादी (करीब 40 लाख ) घरों में कैद रही। इस बीच पुलिस की सख्ती से कुछ लोगों को असुविधाओं का भी सामना करना पड़ा। दरअसल, इलाज के लिए अस्पताल आवागमन करने वाले मरीजों के अलावा अपनी आपातकालीन जरूरतों की पूर्ति में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को जगह-जगत तैनात कर पुलिस कर्मियों को जवाब भी देना पड़ा।
शुक्रवार को देर रात के बाद शहर में पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक-एक दुकान पर पहुंचकर बंद करने का निर्देश दिया। शनिवार की सुबह में शहर के हर इलाके में सन्नाटे का माहौल रहा और सड़कें वीरान रहीं। इक्का-दुक्का वाहन स्वामी एवं पैदल यात्री आपातकालीन जरूरतों की पूर्ति में शहर में सक्रिय दिखे। शहर के आमघाट, महुआबाग, अफीम फैक्ट्री आदि इलाकों में पुलिस की स्थाई तैनाती रही।
लॉकडाउन को सफल बनाने में पुलिस कई स्थानों पर अपने सख्त रूप में सामने आई। इसके तहत सुबह नौ बजे अफीम फैक्ट्री और कलेक्ट्रेट के पास से आवागमन करने वाले प्रत्येक पैदल यात्री और वाहन चालकों की जांच की गई। घर से बाहर निकलने का हिसाब लिया गया। जिलाधिकारी कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। विभाग के कर्मचारी ही कार्यालय में सक्रिय दिखे। आम लोगों के लिए आवाजाही पर पूरी तरह से रोक रहा। इसीक्रम में सुबह जब 9.15 मिनट पर कचहरी और एसपी कार्यालय के आसपास के इलाके की पड़ताल की गई तो पता चला कि इन स्थानों पर भी बैरिकेडिंग के माध्यम से लोगों के आवागमन को रोक दिया गया है। आवाजाही रोकने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई।
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सैनिटाइज हुए शहर के ये मुहल्ले
ा की महामारी से शहर को सुरक्षित रखने की मंसा से स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ फायर ब्रिगेड के कर्मचारी भी फील्ड में उतर गए। सबसे पहले सुबह करीब 9.30 बजे उन्होंने आमऱ्घाट के गांधी पार्क इलाके को दवा से सैनिटाइज किया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड विभाग की टीम मलीन इलाका बंधवा मोहल्ला पहुंची। यहां स्वास्थ्य कर्मियों ने सुरक्षा किट पहनकर एक-एक गली और मकानों को सैनिटाइज किया। इसीक्रम
मोहल्लों में रहा भय और कौतूहल का माहौल-
सड़क पर सायरन बजाती पुलिस और शहर बंद करने की सख्त घोषणा ने आबादी क्षेत्र में लोगों को घरों में कैद कर दिया। इसबीच कुछ परिवार या समुदाय के लोग अपने-अपने घर के दरवाजे समूह में इकट्ठा होकर पुलिस तथा प्रशासन की सक्रियता को भांपते रहे। उनके बीच सड़क पर आवागमन को लेकर पुलिस का भय भी व्याप्त रहा।
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शुक्रवार को देर रात के बाद शहर में पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक-एक दुकान पर पहुंचकर बंद करने का निर्देश दिया। शनिवार की सुबह में शहर के हर इलाके में सन्नाटे का माहौल रहा और सड़कें वीरान रहीं। इक्का-दुक्का वाहन स्वामी एवं पैदल यात्री आपातकालीन जरूरतों की पूर्ति में शहर में सक्रिय दिखे। शहर के आमघाट, महुआबाग, अफीम फैक्ट्री आदि इलाकों में पुलिस की स्थाई तैनाती रही।
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लॉकडाउन को सफल बनाने में पुलिस कई स्थानों पर अपने सख्त रूप में सामने आई। इसके तहत सुबह नौ बजे अफीम फैक्ट्री और कलेक्ट्रेट के पास से आवागमन करने वाले प्रत्येक पैदल यात्री और वाहन चालकों की जांच की गई। घर से बाहर निकलने का हिसाब लिया गया। जिलाधिकारी कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। विभाग के कर्मचारी ही कार्यालय में सक्रिय दिखे। आम लोगों के लिए आवाजाही पर पूरी तरह से रोक रहा। इसीक्रम में सुबह जब 9.15 मिनट पर कचहरी और एसपी कार्यालय के आसपास के इलाके की पड़ताल की गई तो पता चला कि इन स्थानों पर भी बैरिकेडिंग के माध्यम से लोगों के आवागमन को रोक दिया गया है। आवाजाही रोकने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई।
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सैनिटाइज हुए शहर के ये मुहल्ले
ा की महामारी से शहर को सुरक्षित रखने की मंसा से स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ फायर ब्रिगेड के कर्मचारी भी फील्ड में उतर गए। सबसे पहले सुबह करीब 9.30 बजे उन्होंने आमऱ्घाट के गांधी पार्क इलाके को दवा से सैनिटाइज किया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड विभाग की टीम मलीन इलाका बंधवा मोहल्ला पहुंची। यहां स्वास्थ्य कर्मियों ने सुरक्षा किट पहनकर एक-एक गली और मकानों को सैनिटाइज किया। इसीक्रम
मोहल्लों में रहा भय और कौतूहल का माहौल-
सड़क पर सायरन बजाती पुलिस और शहर बंद करने की सख्त घोषणा ने आबादी क्षेत्र में लोगों को घरों में कैद कर दिया। इसबीच कुछ परिवार या समुदाय के लोग अपने-अपने घर के दरवाजे समूह में इकट्ठा होकर पुलिस तथा प्रशासन की सक्रियता को भांपते रहे। उनके बीच सड़क पर आवागमन को लेकर पुलिस का भय भी व्याप्त रहा।