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ठहरी गंगा, बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बरकरार
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:11 PM IST
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गंगा और घाघरा ही नहीं टोंस भी लोगों की नींद उड़ा रही है। नदी में फैला बाढ़ का पानी।
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बुधवार की भोर में चार बजे गंगा जरूर ठहर गईं, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बरकरार हैं। दिन में 11 बजे जलस्तर 65.00 मीटर रहा। फिर से पानी बढ़ने की आशंका लोगों का घरों से पलायन जारी है। एक तरफ जहां सैकड़ों बाढ़ पीड़ित अपने मकानों से निकलकर राहत शिविर के अलावा इधर-उधर रह रहे हैं, वहीं कई बाढ़ पीड़ित पानी के बीच अपने मकानों में ही पानी के बीच रह रहे हैं। शहर के कई मार्गों और मुहल्लों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों की मुश्किलें बरकरार रहीं। जमानियां के राघोपुर गांव स्थित अति प्राचीन शिव मंदिर बाढ़ की वजह से बुधवार की सुबह भरभरा कर गिर गया। जमानिया, सुहवल, करंडा, बारा, गहमर, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल सहित ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
शहर के तुलसियाका पुल, नवाबगंज, झंडातर, स्टीमरघाट, झुन्नूलाल का चौराहा, डीएम आवास के पास शास्त्रीनगर और बंधवा मुहल्ला कई दिनों से पानी से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। किसी मार्ग पर घुठनेभर से अधिक तो किसी पर कमर भर पानी लगा है। इन मार्गों पर पानी के बीच से लोगों के आना-जाना हो रहा है। बंधवा, तुलसियाका पुल, झुन्नूलाल चौराहा, वार्ड नंबर-25 बड़ापुरा में दर्जनों मकान पानी से घिरे हुए है। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बेबस लोग घुटनभरी जिंदगी जीने को विवश है। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी हरिनाथ ने बताया कि भोर में चार बजे गंगा का जलस्तर ठहर गया। दिन में 11 बजे जलस्तर 65.00 मीटर रहा। गहमर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में आई बाढ़ से लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है।
एक तरफ जहां गंगा पूरी तरह से उफान पर हैं, वही कर्मनाशा भी काफी तबाही मचा रही है। बबूरहनी, चकवां, बाबागंज, साई का बेर, बिंद बस्ती, भैरो राय, गोविंद राय मुहल्ला पूरी तरह से जलमग्न है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारा, कुत्तुबपुर, मगरखाई, भतौरा, मनिहर वन राजभर बस्ती, सायर, राजमल बांध, खुदरा, गदाईपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से लबालब है। लोगों को दैनिक आवश्यकता के सामानोें के लिए भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। करंडा संवाददाता के अनुसार में बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों का छठवें दिन भी पलायन जारी रहा। लोग जहां भी ठिकाना पा रहे है, वहीं अपने पशुओं सहित रहने लगे रहे हैं। बाढ़ में सबसे पहले घिरे गंगा के किनारे के गांव महाबलपुर, सोन्हनपुर और गद्दोगाड़ा के लोगों ने 19 अगस्त को ही घरों में पानी घुसने के कारण अपने पशुओं एवं खाद्य सामग्री निकाल कर गोशंदेपुर में मुख्य सड़क पर तथा काली मंदिर के पास आकर अपना डेरा बना लिया है।
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जनपद में गंगा का खतरा निशान 63.105 मीटर है। गंगा नदी का जलस्तर बुधवार को 65.00 मीटर तक पहुंच चुका है। बाढ़ से अब तक कुल 247 गांव प्रभावित हुए हैं। पिछले 24 घंटे में बाढ़ ने दस गांवों को अपनी चपेट में लिया है। बाढ़ में मुहम्मदाबाद, जमानिया, सैदपुर और सदर तहसील में कुल 45 से अधिक संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। 70 से अधिक प्राथमिक विद्यालय और 10 इंटर कॉलेज बाढ़ के पानी से घिरे हैं। इनके अलावा 30 से अधिक सरकारी तथा गैरसरकारी संस्थानों भी बाढ़ में प्रभावित हैं। गंगा नदी की बाढ़ से लोगों को बचाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से विभिन्न इंतजाम किये गए हैं। जनपद में 27 शरणालय, 57 बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं। अब तक 9000 से अधिक लोगों को बाढ़ के पानी से बाहर निकला गया है। बचाव में तीन एनडीआरएफ तथा दो पीएसी की टीम लगाई गई है। बाढ़ क्षेत्र में लगी कुल नावों की संख्या 227 है। जिसमें 21 इंजन वाली नावें हैं।
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शहर के तुलसियाका पुल, नवाबगंज, झंडातर, स्टीमरघाट, झुन्नूलाल का चौराहा, डीएम आवास के पास शास्त्रीनगर और बंधवा मुहल्ला कई दिनों से पानी से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। किसी मार्ग पर घुठनेभर से अधिक तो किसी पर कमर भर पानी लगा है। इन मार्गों पर पानी के बीच से लोगों के आना-जाना हो रहा है। बंधवा, तुलसियाका पुल, झुन्नूलाल चौराहा, वार्ड नंबर-25 बड़ापुरा में दर्जनों मकान पानी से घिरे हुए है। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बेबस लोग घुटनभरी जिंदगी जीने को विवश है। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी हरिनाथ ने बताया कि भोर में चार बजे गंगा का जलस्तर ठहर गया। दिन में 11 बजे जलस्तर 65.00 मीटर रहा। गहमर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में आई बाढ़ से लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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एक तरफ जहां गंगा पूरी तरह से उफान पर हैं, वही कर्मनाशा भी काफी तबाही मचा रही है। बबूरहनी, चकवां, बाबागंज, साई का बेर, बिंद बस्ती, भैरो राय, गोविंद राय मुहल्ला पूरी तरह से जलमग्न है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारा, कुत्तुबपुर, मगरखाई, भतौरा, मनिहर वन राजभर बस्ती, सायर, राजमल बांध, खुदरा, गदाईपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से लबालब है। लोगों को दैनिक आवश्यकता के सामानोें के लिए भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। करंडा संवाददाता के अनुसार में बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों का छठवें दिन भी पलायन जारी रहा। लोग जहां भी ठिकाना पा रहे है, वहीं अपने पशुओं सहित रहने लगे रहे हैं। बाढ़ में सबसे पहले घिरे गंगा के किनारे के गांव महाबलपुर, सोन्हनपुर और गद्दोगाड़ा के लोगों ने 19 अगस्त को ही घरों में पानी घुसने के कारण अपने पशुओं एवं खाद्य सामग्री निकाल कर गोशंदेपुर में मुख्य सड़क पर तथा काली मंदिर के पास आकर अपना डेरा बना लिया है।
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जनपद में गंगा का खतरा निशान 63.105 मीटर है। गंगा नदी का जलस्तर बुधवार को 65.00 मीटर तक पहुंच चुका है। बाढ़ से अब तक कुल 247 गांव प्रभावित हुए हैं। पिछले 24 घंटे में बाढ़ ने दस गांवों को अपनी चपेट में लिया है। बाढ़ में मुहम्मदाबाद, जमानिया, सैदपुर और सदर तहसील में कुल 45 से अधिक संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। 70 से अधिक प्राथमिक विद्यालय और 10 इंटर कॉलेज बाढ़ के पानी से घिरे हैं। इनके अलावा 30 से अधिक सरकारी तथा गैरसरकारी संस्थानों भी बाढ़ में प्रभावित हैं। गंगा नदी की बाढ़ से लोगों को बचाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से विभिन्न इंतजाम किये गए हैं। जनपद में 27 शरणालय, 57 बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं। अब तक 9000 से अधिक लोगों को बाढ़ के पानी से बाहर निकला गया है। बचाव में तीन एनडीआरएफ तथा दो पीएसी की टीम लगाई गई है। बाढ़ क्षेत्र में लगी कुल नावों की संख्या 227 है। जिसमें 21 इंजन वाली नावें हैं।