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जिले में जल शक्ति मंत्रालय का कैच द रेन फेल अभियान साबित हो रहा
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जिले में जल संरक्षण अभियान की प्रगति काफी सुस्त है। 22 मार्च को विश्व जल दिवस पर जल शक्ति मंत्रालय ने कैच द रेन स्लोगन के साथ अभियान शुरू किया था। लेकिन अगस्त तक इस अभियान को लेकर जिले में कोई तैयारी नहीं हो सकी है। अभियान के दौरान तालाबों की सफाई से लेकर छतों के पानी को भू-जल रिचार्ज के लिए उपयोग में लाना था लेकिन आलम यह है कि अभी अभियान के संचालन के लिए जल शक्ति केंद्र भी विकसित नहीं हो पाया है। जहां अभियान से जुड़ी जानकारियों को उपलब्ध कराना है।
22 मार्च से शुरू इस अभियान को 30 नवंबर तक चलाना है। लेकिन अगस्त बीतने को है और जल संरक्षण की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। जिला स्तर पर इस अभियान को लेकर अब तक तीन नोडल बदले जा चुके हैं। फिलहाल लघु सिचाई विभाग के अधिकारी को कैच द रेन अभियान का नोडल नियुक्त किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक, जिला प्रशासन को जन-जागरूकता के साथ जलाशयों पर अतिक्रमण, जल आवागमन, लघु और सहायक नदियों को पुनर्जीवित करना, नालों की सफाई, जल संग्रहण क्षेत्र का विकास, वनीकरण और तालाबों के जीआईएस मैपिंग के साथ वैज्ञानिक ढंग से कार्य योजना तैयार करना है। इस अभियान की अगुवाई जिला स्तर पर सीडीओ, ब्लॉक स्तर पर बीडीओ और नगर क्षेत्र में अधिशासी अधिकारी करेंगे।
अभियान में अब सिर्फ 90 दिन बचे हैं। गौरतलब है कि सितंबर के बाद बरसात खत्म हो जाएगी और अक्टूबर के अंत से ठंड की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में सरकार की कैच द रेन की मंशा इस साल अधूरी ही रह जाएगी। क्योंकि वर्तमान में लघु सिचाई विभाग इस अभियान को लेकर अभी जल शक्ति केंद्र के लिए एक कमरे की तलाश कर रहा है। इसके बाद वह जीआईएस मैपिंग के लिए लखनऊ को सूचित करेगा। इस बीच तहसीलों से तालाब आदि की जानकारी जुटाने का दावा किया जा रहा है। इस संबंध में लघु सिचाई विभाग के सहायक अभियंता का कहना है कि अगले एक हफ्ते में तहसीलों से राजस्व संबंधी सभी जानकारियों को भेजने के लिए पत्र भेजा गया है। उसी जानकारी के आधार पर जीआईएस मैपिंग का काम कराया जाएगा।
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जल शक्ति मंत्रालय ने कैच द रेन को एक अभियान के तौर पर शुरू किया है। इसके लिए मंत्रालय ने कोई बजट आवंटित नहीं किया है। लेकिन सरकार का निर्देश है कि गांव या अन्य जगहों पर चल रही विकास योजनाओं में बारिश का पानी संरक्षण करने की दिशा में वैज्ञानिक तरीके से कार्य करना है। जल शक्ति केंद्र बनाकर और तहसीलों से सूचनाएं मंगाकर अभियान को तेज किया जा रहा है।
गौरी शंकर गुप्ता, सहायक अभियंता लघु सिंचाई
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22 मार्च से शुरू इस अभियान को 30 नवंबर तक चलाना है। लेकिन अगस्त बीतने को है और जल संरक्षण की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। जिला स्तर पर इस अभियान को लेकर अब तक तीन नोडल बदले जा चुके हैं। फिलहाल लघु सिचाई विभाग के अधिकारी को कैच द रेन अभियान का नोडल नियुक्त किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक, जिला प्रशासन को जन-जागरूकता के साथ जलाशयों पर अतिक्रमण, जल आवागमन, लघु और सहायक नदियों को पुनर्जीवित करना, नालों की सफाई, जल संग्रहण क्षेत्र का विकास, वनीकरण और तालाबों के जीआईएस मैपिंग के साथ वैज्ञानिक ढंग से कार्य योजना तैयार करना है। इस अभियान की अगुवाई जिला स्तर पर सीडीओ, ब्लॉक स्तर पर बीडीओ और नगर क्षेत्र में अधिशासी अधिकारी करेंगे।
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अभियान में अब सिर्फ 90 दिन बचे हैं। गौरतलब है कि सितंबर के बाद बरसात खत्म हो जाएगी और अक्टूबर के अंत से ठंड की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में सरकार की कैच द रेन की मंशा इस साल अधूरी ही रह जाएगी। क्योंकि वर्तमान में लघु सिचाई विभाग इस अभियान को लेकर अभी जल शक्ति केंद्र के लिए एक कमरे की तलाश कर रहा है। इसके बाद वह जीआईएस मैपिंग के लिए लखनऊ को सूचित करेगा। इस बीच तहसीलों से तालाब आदि की जानकारी जुटाने का दावा किया जा रहा है। इस संबंध में लघु सिचाई विभाग के सहायक अभियंता का कहना है कि अगले एक हफ्ते में तहसीलों से राजस्व संबंधी सभी जानकारियों को भेजने के लिए पत्र भेजा गया है। उसी जानकारी के आधार पर जीआईएस मैपिंग का काम कराया जाएगा।
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जल शक्ति मंत्रालय ने कैच द रेन को एक अभियान के तौर पर शुरू किया है। इसके लिए मंत्रालय ने कोई बजट आवंटित नहीं किया है। लेकिन सरकार का निर्देश है कि गांव या अन्य जगहों पर चल रही विकास योजनाओं में बारिश का पानी संरक्षण करने की दिशा में वैज्ञानिक तरीके से कार्य करना है। जल शक्ति केंद्र बनाकर और तहसीलों से सूचनाएं मंगाकर अभियान को तेज किया जा रहा है।
गौरी शंकर गुप्ता, सहायक अभियंता लघु सिंचाई