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स्कूली बसों के फिटनेस की हुई जांच
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कोरोना की दूसरी लहर के पांच माह बाद विद्यालय खुलने के साथ ही बच्चों को विद्यालय तक लाने और घर पहुंचाने के स्कूली बस मंगलवार को सड़कों पर फर्राटा भरते दिखाई पड़े। इधर एआरटीओ के कड़े फरमान पर सक्रिय हुए विद्यालय संचालकों ने आधा दर्जन निजी बसों का फिटनेस जांच कराया। हालांकि कक्षा छह से आठ तक विद्यालय खुलने का पहला दिन होने के चलते विभाग की ओर से जांच अभियान नहीं चलाया गया था।
जूनियर स्तर के विद्यालयों के बंद रहने से बसों का भी संचालन ठप था। ऐसे में शासन के निर्देश पर एआरटीओ विभाग ने निजी विद्यालयों के संचालकों को बसों को सड़क पर उतारने से गाइड लाइन जारी कर दिया था कि मानकों को पूर्ण करने के साथ फिटनेस सुनिश्चित करा लें। जांच के दौरान पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी। साथ ही ऐसे वाहनों से अगर कोई घटना होती है तो इसका जिम्मेदार विद्यालय संचालक ही होंगे। बरहाल विभाग के कड़े रूख के बाद करीब आधा दर्जन निजी विद्यालयों का फिटनेस सुनिश्चित कराया गया। ऐसे में अगर बसों पर फर्राटा भर रहे निजी बसों को देखा जाए तो मानक के अनुरूप अधिकांश विद्यालय के बसों का रंग पीला नहीं है। चालक और परिचालक के वर्दी में होना तो दूर बस में अग्निशमन यंत्र, सीटों पर सीट बेल्ट, सीसीटीवी कैैमरा सहित अन्य यंत्रों से लैस नहीं है। ऐसे में सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है निजी बसों की क्या हालत होगी। इस संबंध में एआरटीओ राम सिंह ने बताया कि जल्द ही जांच अभियान चलेगा। आधा दर्जन निजी विद्यालय के बसों ने फिटनेस कराया है। अन्य मानक भी अगर बसों में सुनिश्चित नहीं होंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
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जूनियर स्तर के विद्यालयों के बंद रहने से बसों का भी संचालन ठप था। ऐसे में शासन के निर्देश पर एआरटीओ विभाग ने निजी विद्यालयों के संचालकों को बसों को सड़क पर उतारने से गाइड लाइन जारी कर दिया था कि मानकों को पूर्ण करने के साथ फिटनेस सुनिश्चित करा लें। जांच के दौरान पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी। साथ ही ऐसे वाहनों से अगर कोई घटना होती है तो इसका जिम्मेदार विद्यालय संचालक ही होंगे। बरहाल विभाग के कड़े रूख के बाद करीब आधा दर्जन निजी विद्यालयों का फिटनेस सुनिश्चित कराया गया। ऐसे में अगर बसों पर फर्राटा भर रहे निजी बसों को देखा जाए तो मानक के अनुरूप अधिकांश विद्यालय के बसों का रंग पीला नहीं है। चालक और परिचालक के वर्दी में होना तो दूर बस में अग्निशमन यंत्र, सीटों पर सीट बेल्ट, सीसीटीवी कैैमरा सहित अन्य यंत्रों से लैस नहीं है। ऐसे में सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है निजी बसों की क्या हालत होगी। इस संबंध में एआरटीओ राम सिंह ने बताया कि जल्द ही जांच अभियान चलेगा। आधा दर्जन निजी विद्यालय के बसों ने फिटनेस कराया है। अन्य मानक भी अगर बसों में सुनिश्चित नहीं होंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
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