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सिद्धांत सिर्फ बनाया नहीं डा. राही ने जीया भी

Tue, 01 Sep 2020 10:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 10:06 PM IST
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Dr. Rahi lived not only the theory
गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार एवं पटकथा लेखक डा. राही मासूम रजा की जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. उबैदुर्रहमान ने बताया कि रजा जी का जीवन बहुत संघर्षपूर्ण रहा है। वह कबीर की तरह मनमौजी और मौलिक विचारों वाले थे। अपने परिवार में वह अपने चाचा के सर्वाधिक निकट और प्रिय रहे।वही उनके पहले साहित्यिक गुरु थे। फिर इलाहाबाद, अलीगढ़ और मुंबई में उनके लेखन का विस्तार और परिष्कार हुआ। वह एक लोकप्रिय लेखक और शिक्षक रहे हैं।
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उन्होंने सिद्धांत सिर्फ बनाया नहीं जीया भी। वह अपनी प्रतिबद्धता के चलते चुनाव में अपने पिता के प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के साथ रहे। अपने लेखन के साथ जीवन में भी प्रगतिशीलता का वरण किया। बहुत सी रूढि़यों को तोड़ा, बहुत को छोड़ा। सचमुच में बेहतर जीवन और समाज के निर्माण के लिए राह बनाने वाले रचनाकार हैं राही। बताया कि उनके उपन्यास का अनुवाद करने वाली एक अंग्रेजी लेखिका ने कहा है कि ़गालिब के बाद समय की नब्ज पकड़ने वाले रचनाकार हैं। वह समय की मयार को समझने वाले हैं। जैसे ़गालिब ़फारसी छोड़कर उर्दू में लिखने लगे वैसे ही रजा उर्दू छोड़कर हिंदी में लिखने वाले रचनाकार हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता मौर्य ने कहा कि गाजीपुर और राही मासूम रजा को अलगाया नहीं जा सकता। भले वह बाद में मुंबई चले गए लेकिन उनको साहित्य जगत में गाजीपुर का ही माना जाता है। उनकी सबसे चर्चित कृति आधा गांव की कथा भूमि गाजीपुर ही है। डॉ. निरंजन कुमार यादव ने कहा कि भूलाए से भी न भूलने वाले कथाकार हैं राही मासूम रजा। उन्होंने कथा साहित्य के अलावा उर्दू में भी ़गजल, नज्म आदि की रचना भी की है। वह उर्दू साहित्य में एपिक लिखने वाले पहले रचनाकार हैं। शीशे के मकां वालों और किताब उनकी उत्कृष्ट रचनाएं हैं। मीडिया प्रभारी शिवकुमार ने कहा कि महाभारत को घर-घर पहुंचाने में राही जी का महत्वपूर्ण योगदान है। वह गंगा-जमुनी तहजीब के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। इस अवसर पर डॉ. शैलेंद्र कुमार, डॉ. विकास सिंह, डॉ. अनीता कुमारी, पूजा सिंह, हरेंद्र यादव आदि उपस्थित थे।
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सरकारें बदलती गई नए लोग आते गए लेकिन डा. राही को किसी ने नहीं किया याद
कासिमाबाद। डा. राही मासूम रजा के जन्मदिन पर दुख इस बात का है कि ऐसे महान लेखक की जन्मभूमि गंगौली आज पूरी तरह से सूनी रही। उनकी मातृभूमि पर आज कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं होने से इस महान आत्मा को निश्चित रूप से कष्ट पहुंचा होगा। आज से 15 वर्ष पूर्व गांव में वामपंथी विचारधारा के लेखकों का जमावड़ा होता था। विभिन्न कार्यक्रमों से राही को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती थी। कई राजनीतिज्ञों ने राही के नाम पर गांव में एक पुस्तकालय के साथ कासिमाबाद यूसुफपुर मार्ग का नामकरण उनके नाम पर करने का वादा किया था। सरकारें बदलती गई नए लोग आते गए लेकिन डा. राही को किसी ने याद नहीं किया। अगर याद है तो उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें, फिल्में एवं महान धारावाहिक महाभारत।
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