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गोमती के कटान से घर से बेघर हुए दर्जनभर परिवार
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भीमापार। वाराणसी और गाजीपुर के उत्तरी-दक्षिणी सिरे पर स्थित गौरी गांव में इन दिनों गोमती नदी का कटान जारी है। लेकिन इस हालात में भी इनकी कोई मदद तक करने वाला नहीं है। इनकी परेशानी किसी को दिखाई तक नहीं दे रही है। देखा जाए तो गोमती नदी में वर्षों से कटान का दंश गांव के दर्जनों परिवार भुगतने को मजबूर हैं। उनमें से अधिकांश के पास खेती योग्य जमीन तक नहीं है।
एक या दो परिवार को छोड़कर किसी के पास सरकारी नौकरी नहीं है, तो कुछ ऐसे भी हैं जो अत्यन्त अभाव की जिंदगी गुजार रहे हैं। लेकिन उनके पास सरकारी अनाज प्राप्त करने के ल्रिए राशन कार्ड तक नहीं है। कटान पर बसे अधिकांस परिवारों को कभी सरकारी आवास तक देने की जरूरत नहीं समझी गई। जबकि यहां अधिकांस परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके पेट पालते हैं। लेकिन कोरोना और लाकडाउन के चलते कोई काम न मिलने से उनकी हालत अत्यन्त दयनीय हो गई है। बरसात के दिनों में जब गोमती का जलस्तर बढ़ने लगता है। तब इन परिवारों के सामने जीवन और मौत का संघर्ष आकर खड़ा हो जाता है। ऐसे में जानकारी के बाद भी स्थानीय प्रशासन इनकी समस्याओं से मुंह मोड़ रहता है। वहीं जनप्रतिनिधियों को भी गोमती के कटान पर बसे इन गरीब परिवारों का संकट दिखाई नहीं देता।
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एक या दो परिवार को छोड़कर किसी के पास सरकारी नौकरी नहीं है, तो कुछ ऐसे भी हैं जो अत्यन्त अभाव की जिंदगी गुजार रहे हैं। लेकिन उनके पास सरकारी अनाज प्राप्त करने के ल्रिए राशन कार्ड तक नहीं है। कटान पर बसे अधिकांस परिवारों को कभी सरकारी आवास तक देने की जरूरत नहीं समझी गई। जबकि यहां अधिकांस परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके पेट पालते हैं। लेकिन कोरोना और लाकडाउन के चलते कोई काम न मिलने से उनकी हालत अत्यन्त दयनीय हो गई है। बरसात के दिनों में जब गोमती का जलस्तर बढ़ने लगता है। तब इन परिवारों के सामने जीवन और मौत का संघर्ष आकर खड़ा हो जाता है। ऐसे में जानकारी के बाद भी स्थानीय प्रशासन इनकी समस्याओं से मुंह मोड़ रहता है। वहीं जनप्रतिनिधियों को भी गोमती के कटान पर बसे इन गरीब परिवारों का संकट दिखाई नहीं देता।
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