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जन औषधि केंद्र बदहाल, मेडिकल स्टोर मालामाल 18-40-59
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बाहर की दवा लिखते हैं डॉक्टर, जन औषधि केंद्र बदहाल
कमीशन के चलते मरीजों की कट रही जेब, हो रहा आर्थिक शोषण
2017 में चार सरकारी अस्पतालों में स्थापित किए गए थे केंद्र
(फोटो भी)
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। सस्ती और अच्छी दवाओं से आमजन लाभान्वित हो, इसके लिए करीब चार वर्ष पूर्व जन औषधि केंद्र स्थापित कराया गया था। स्थिति यह है कि इन दिनों यह केंद्र बदहाल हो चुके हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों के बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर मालामाल हो रहे हैं। वजह इन केंद्रों पर मिलने वाली जेनेरिक दवाओं को परामर्श पर्ची पर लिखने के बजाए डाक्टर बाहर निजी मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली दवा को ही लिख रहे हैं। इसके चलते डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टोर संचालकों जेब भर रही है, वहीं मरीजों एवं उनके परिजनों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना जिला अस्पताल में विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए सौ से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इतने ही मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती होकर अपना उपचार कराने आते हैं। ऐसे में अच्छी और सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार की ओर से 15 जुलाई 2017 को जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, मुहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सैदपुर स्वास्थ्य केंद्र में जन औषधि केंद्र स्थापित कराया गया था, जिससे मरीजों को मेडिकल स्टोरों का चक्कर न लगाना पड़े और महंगी दवा से उन्हें निजात मिले। लेकिन स्थिति तो यह है कि जिला और महिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक जेनेरिक दवा लिखने के बजाए बाहर की दवा लिखते हैं, जिससे उन्हें कमीशन मिले। यही हाल मुहम्मदाबाद एवं सैदपुर सीएचसी का भी है। ऐसे में मरीजों एवं तीमारदारों की जेब ढीली हो रही है।
वर्जन
डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही पर्ची की जांच कराई जाएगी। साथ ही सभी चिकित्सकों को निर्देश भी दिया गया है कि मरीजों को जिला अस्पताल एवं जन औषधि से उपलब्ध होने वाली दवा ही लिखी जाए। इसके लिए टीम बनाकर ठोस कदम उठाया जाएगा। - डा. राजेश सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
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सस्ती और अच्छी दवा के नाम पर जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र स्थापित हुआ, लेकिन यहां तैनात चिकित्सकों द्वारा कमीशन के चक्कर में ऐसी दवा लिखी जाती है, जो बाहर मेडिकल स्टोरों पर ही उपलब्ध है। - शंशाक उपाध्याय
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जिला अस्पताल में ओपीडी से लेकर वार्ड व इमरजेंसी में इन दिनों दलालों का ऐसा जमावड़ा लगा रहता है कि मरीज एवं परिजन से आए दिन कहासुनी होती रहती है। यहां तैनात चिकित्सक अस्पताल से मिलने वाली दवा नहीं लिखते हैं। - शशिकांत पांडेय
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जब कोई मरीज डॉक्टर के पास आता है तो उसे क्या पता है कि कौन जेनेरिक और पेटेंट दवा है। इसका लाभ डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा जमकर उठाया जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है। - अमृत यादव
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कई बार शिकायत के बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी है। जन औषधि केंद्र के पास शायद ही डॉक्टर की पर्ची पहुंचती हो, सभी ओपीडी की पर्चियां निजी मेडिकल स्टोरों पर ही जाती है। कमीशन का खेल लंबे समय से चल रहा है। - अंशुल प्रजापति
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कमीशन के चलते मरीजों की कट रही जेब, हो रहा आर्थिक शोषण
2017 में चार सरकारी अस्पतालों में स्थापित किए गए थे केंद्र
(फोटो भी)
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। सस्ती और अच्छी दवाओं से आमजन लाभान्वित हो, इसके लिए करीब चार वर्ष पूर्व जन औषधि केंद्र स्थापित कराया गया था। स्थिति यह है कि इन दिनों यह केंद्र बदहाल हो चुके हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों के बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर मालामाल हो रहे हैं। वजह इन केंद्रों पर मिलने वाली जेनेरिक दवाओं को परामर्श पर्ची पर लिखने के बजाए डाक्टर बाहर निजी मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली दवा को ही लिख रहे हैं। इसके चलते डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टोर संचालकों जेब भर रही है, वहीं मरीजों एवं उनके परिजनों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना जिला अस्पताल में विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए सौ से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इतने ही मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती होकर अपना उपचार कराने आते हैं। ऐसे में अच्छी और सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार की ओर से 15 जुलाई 2017 को जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, मुहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सैदपुर स्वास्थ्य केंद्र में जन औषधि केंद्र स्थापित कराया गया था, जिससे मरीजों को मेडिकल स्टोरों का चक्कर न लगाना पड़े और महंगी दवा से उन्हें निजात मिले। लेकिन स्थिति तो यह है कि जिला और महिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक जेनेरिक दवा लिखने के बजाए बाहर की दवा लिखते हैं, जिससे उन्हें कमीशन मिले। यही हाल मुहम्मदाबाद एवं सैदपुर सीएचसी का भी है। ऐसे में मरीजों एवं तीमारदारों की जेब ढीली हो रही है।
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डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही पर्ची की जांच कराई जाएगी। साथ ही सभी चिकित्सकों को निर्देश भी दिया गया है कि मरीजों को जिला अस्पताल एवं जन औषधि से उपलब्ध होने वाली दवा ही लिखी जाए। इसके लिए टीम बनाकर ठोस कदम उठाया जाएगा। - डा. राजेश सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
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सस्ती और अच्छी दवा के नाम पर जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र स्थापित हुआ, लेकिन यहां तैनात चिकित्सकों द्वारा कमीशन के चक्कर में ऐसी दवा लिखी जाती है, जो बाहर मेडिकल स्टोरों पर ही उपलब्ध है। - शंशाक उपाध्याय
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जिला अस्पताल में ओपीडी से लेकर वार्ड व इमरजेंसी में इन दिनों दलालों का ऐसा जमावड़ा लगा रहता है कि मरीज एवं परिजन से आए दिन कहासुनी होती रहती है। यहां तैनात चिकित्सक अस्पताल से मिलने वाली दवा नहीं लिखते हैं। - शशिकांत पांडेय
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जब कोई मरीज डॉक्टर के पास आता है तो उसे क्या पता है कि कौन जेनेरिक और पेटेंट दवा है। इसका लाभ डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा जमकर उठाया जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है। - अमृत यादव
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कई बार शिकायत के बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी है। जन औषधि केंद्र के पास शायद ही डॉक्टर की पर्ची पहुंचती हो, सभी ओपीडी की पर्चियां निजी मेडिकल स्टोरों पर ही जाती है। कमीशन का खेल लंबे समय से चल रहा है। - अंशुल प्रजापति