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बीमार है जिला महिला अस्पताल
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sun, 22 May 2016 10:56 PM IST
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स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें फौरन घुमारवीं अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां ममता ने दम तोड़ दिया
- फोटो : Demo pic
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जिला महिला अस्पताल इस समय अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। अस्पताल में पेयजल और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की माकूल व्यवस्था नहीं होने से वार्ड में भर्ती महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही मरीजों को शासन की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला महिला अस्पताल में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।
महिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती महिला मरीजों और उनके परिजनों को आए दिन पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वार्डों में पानी सप्लाई के लिए ओपीडी के पास स्थित पानी टंकी से हर समय खुले में पानी गिरता रहता है। परिसर में पानी फैलने से मरीज आए दिन फिसल कर गिरते रहते हैं।
शासन की ओर से वार्डों में भर्ती गर्भवती और प्रसूति महिलाओं को एक किलो दूध, फल, ब्रेड, अंडा सहित भोजन देने का प्रावधान है जिला महिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती महिला मरीज सुहवल की अंजू यादव, शादियाबाद की निहारिका, नियाजी मुहल्ले की प्रियंका और जंगीपुर की सुनीता ने बताया कि अस्पताल की ओर से सिर्फ आधा किलो के दूध का पैकेट ही मिलता है।
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वार्ड में स्थित शौचालय और बाथरूम की सफाई नहीं होने से हमेशा दुर्गंध आती रहती है। महिला मरीजों का आरोप है कि तीमारदारों से सुविधा शुल्क लेने के बाद ही महिला स्वास्थ्य कर्मी चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने का काम करती हैं।
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महिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती महिला मरीजों और उनके परिजनों को आए दिन पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वार्डों में पानी सप्लाई के लिए ओपीडी के पास स्थित पानी टंकी से हर समय खुले में पानी गिरता रहता है। परिसर में पानी फैलने से मरीज आए दिन फिसल कर गिरते रहते हैं।
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शासन की ओर से वार्डों में भर्ती गर्भवती और प्रसूति महिलाओं को एक किलो दूध, फल, ब्रेड, अंडा सहित भोजन देने का प्रावधान है जिला महिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती महिला मरीज सुहवल की अंजू यादव, शादियाबाद की निहारिका, नियाजी मुहल्ले की प्रियंका और जंगीपुर की सुनीता ने बताया कि अस्पताल की ओर से सिर्फ आधा किलो के दूध का पैकेट ही मिलता है।
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वार्ड में स्थित शौचालय और बाथरूम की सफाई नहीं होने से हमेशा दुर्गंध आती रहती है। महिला मरीजों का आरोप है कि तीमारदारों से सुविधा शुल्क लेने के बाद ही महिला स्वास्थ्य कर्मी चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने का काम करती हैं।