दहशत इस कदर कि खिड़कियों पर नहीं दिखा कोई
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सैदपुर कोतवाली क्षेत्र के चकयार मुहम्मद पौटा गांव में ढाई बीघे बगीचे पर कब्जे को लेकर दो पट्टीदारों शिवनाथ यादव और रवींद्र यादव उर्फ नेपाली के बीच वर्ष 2010 से गैंगवार चल रही है। इसमें सबसे पहले शिवनाथ यादव की हत्या हुई थी। वर्ष 2012 में रवींद्र यादव पक्ष के कमलदेव यादव की हत्या कर दी गई। कमलदेव हत्याकांड में देवलाश यादव और कमलेश यादव सहित पांच गवाह नामित थे। सोमवार को इसी मामले में कोर्ट में गवाही थी। गवाही देने के बाद देवलाश यादव, कमलेश यादव सहित पांच गवाह बाइक से घर जा रहे थे। शाम करीब सवा छह बजे सभी देवकली ब्लाक चट्टी पर पहुंचे, तभी दो बाइक पर सवार होकर आए पांच बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
गोली लगने पर गवाह एवं जामवंत हत्याकांड का आरोपी देवलाश यादव (45)की मौके पर ही मौत हो गई। बाइक चला रहा कमलेश गोली लगने पर पास की मिठाई की दूकान में घुस गया हमलावरों ने उसे वहां भी गोली मारी। जान बचाने के लिए वह दूकान से भागा पर कुछ दूर जा कर गिर पड़ा तो हमलावरों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया। इस बीच भाग रहा शैलेश यादव कंधे में गोली लगने पर गिर पड़ा। हमलावर उसे मरा समझ कर भाग निकले। सूचना पर नंदगंज पुलिस के बाद कई थानों की फोर्स पहुंच गई थी। घायल शैलेश यादव को सीएचसी ले जाया गया जहां से उसे वाराणसी रेफर कर दिया।
एसपी डा. उमेश चंद्र श्रीवास्तव, एएसपी सिटी सुनील कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसपी ने बताया कि हत्या के पीछे दो पट्टीदारों के बीच चल रही गैंगवार है। दोनों मृतक कमलदेव हत्याकांड में गवाही देकर घर जा रहे थे। देवलाश यादव शिक्षक जामवंत हत्याकांड में नामजद आरोपी था। वारदात में विपक्षियों का हाथ है, या भाड़े के शूटरों को इस्तेमाल हुआ है, इसकी जांच हो रही है। सुरक्षा के लिहाज से चकयार मुहम्मद पौटा गांव में भी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।