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चार मंडा भूमि के लिए चली गई जान.

Tue, 11 Jun 2019 11:28 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jun 2019 11:28 PM IST
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चार मंडा भूमि के लिए चली गई जान.
मरदह। रामसरेख चौहान हत्याकांड की मंगलवार को ग्रामीणों में चर्चा होती रही। लोगों की चर्चाओं में चार मंडा भूमि विवाद का कारण रही। लोगों का कहना था कि भूमि तो यहीं रह गई, लेकिन रामसरेख की इसके लिए जान चली गई।
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मालूम हो कि रामसरेख चौहान के नाम पर आबादी की चार मंडा जमीन थी, जो विपक्षियों के घर के करीब रहने के कारण वे उस पर काबिज थे। इसका मामला न्यायालय में विचाराधीन है। रामसरेख चौहान तीन भाइयों में सबसे छोटा था और घर पर रहकर ही खेती-किसानी और मजदूरी कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करता था। उसके दोनों भाई वर्षों से विदेश में रहकर काम करते हैं। भाइयों का परिवार यहीं पर रहता है। रामसरेख की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। मां कलावती देवी, पत्नी बिंदू देवी रो-रोकर बेहाल थी। पत्नी बिलखते हुए बार-बार उस जमीन को कोसती रही, जो उसका सुहाग छीनने का कारण बना। रोते-रोते वह कभी पूरी तरह से शांत हो जा रही थी तो कभी अपने पुत्र प्रदीप (10), संदीप (7) और चार वर्षीय आयूष का चेहरा देख दहाड़े मारकर चीखने-चिल्लाने लग रही थी। बच्चे भी मां के गले लगकर बिलख रहे थे। उन्हें सांत्वना देने वालों की आंखें भी छलछला जा रही थी। घटना को लेकर पूरा गांव दुखी था। लोग घटना को लेकर आपस में चर्चा करते रहे कि जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, वह तो यहीं रह गई, लेकिन रामसरेख की जान चली गई। यह घटना परिवार वालों को ऐसा जख्म दे गई, जो शायद ताउम्र नहीं भर पाएगा।
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