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छाई रही बदली, चलती रही सर्द हवाएं
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 13 Dec 2014 10:42 PM IST
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ठंड का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। जिले में एक तरफ जहां लगातार छह
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दिनों तक जबरदस्त कोहरा बना रहा, वहीं शनिवार को कोहरा कम होने के बावजूद
दिन भर बदली छाई रही। इसके चलते ठंड काफी बढ़ गई।
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले छह दिनों से जबरदस्त कोहरे का प्रभाव रहा। शनिवार को कोहरे का प्रभाव नाममात्र रहा। इस दौरान कई बार भगवान भाष्कर ने आंखें खोली, लेकिन उनकी फीकी चमक से लोगों को कोई राहत नहीं मिली। शनिवार को दिन में 12 बजे सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर ट्रेन की प्रतीक्षा में बैठे महिला, पुरुष और बच्चे ठंड से ठिठरते दिखे।
ठंड से बचाव के लिए लोग कंबल और शाल से खुद को ढकते रहे। छोटे-छोटे बच्चे पूरी तरह से गर्म कपड़ों से लैस दिखे। इसी तरह की स्थिति रोडवेज, लंका और रौजा बस स्टैंड पर भी दिखी। वाहन की प्रतिक्षा में खड़े यात्री सर्द हवाओं में ठिठुरते दिखे। ठंड में दिनोंदिन वृद्धि होती जा रही है, लेकि संबंधित विभाग की ओर से अभी तक अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
अलाव की व्यवस्था नहीं होने से रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के दर्जनों रिक्शा चालक रेलवे स्टेशन परिसर में रात गुजारते हैं, अलाव के अभाव में उन्हें ठंड में सिकुड़ना पड़ रहा है।
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले छह दिनों से जबरदस्त कोहरे का प्रभाव रहा। शनिवार को कोहरे का प्रभाव नाममात्र रहा। इस दौरान कई बार भगवान भाष्कर ने आंखें खोली, लेकिन उनकी फीकी चमक से लोगों को कोई राहत नहीं मिली। शनिवार को दिन में 12 बजे सिटी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर ट्रेन की प्रतीक्षा में बैठे महिला, पुरुष और बच्चे ठंड से ठिठरते दिखे।
ठंड से बचाव के लिए लोग कंबल और शाल से खुद को ढकते रहे। छोटे-छोटे बच्चे पूरी तरह से गर्म कपड़ों से लैस दिखे। इसी तरह की स्थिति रोडवेज, लंका और रौजा बस स्टैंड पर भी दिखी। वाहन की प्रतिक्षा में खड़े यात्री सर्द हवाओं में ठिठुरते दिखे। ठंड में दिनोंदिन वृद्धि होती जा रही है, लेकि संबंधित विभाग की ओर से अभी तक अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
अलाव की व्यवस्था नहीं होने से रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के दर्जनों रिक्शा चालक रेलवे स्टेशन परिसर में रात गुजारते हैं, अलाव के अभाव में उन्हें ठंड में सिकुड़ना पड़ रहा है।