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अब नहीं झेलनी पड़ेगी बाढ़ की विभीषिका
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 01 Sep 2016 12:03 AM IST
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क्षेत्र के लोगों को अब बाढ़ की विभीषिका नहीं झेलनी पड़ेगी। गंगा नदी के किनारे हो रहे कटान को रोकने के लिए प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने अपना वादा पूरा कर क्षेत्र के लोगों को एक बड़ी सौगात दी है। उनके प्रयास से 1200 मीटर लंबा बोल्डर बाइंडिंग का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग से 24 करोड़ 48 लाख इस्टीमेट बनवाकर उसे स्वीकृत करा लिया गया है।
बरसात के दिनों में गंगा नदी में बढ़ते जल स्तर से आए दिन तटवर्ती इलाके के लोगों को खौफ के साए में जीने को विवश होना पड़ता था। बरसात में लोगों की जमीन कटान के रूप में जमींदोज हो जाती थी। कटान की वजह से चक्काबांध से लगायत बड़ेसर, हेतिमपुर एवं कस्बा आदि क्षेत्र के लोगों की सैकड़ों बीघा जमीन गंगा की गोद में समा चुकी है। कटान के कारण मल्लाह टोली के कई घर भी गंगा की गोद में समाहित हो चुके हैं। अगर पर्यटन मंत्री ने तीन वर्ष पहले बलुवा घाट पर पक्का घाट एवं मल्लाह टोली के पास पत्थर बाइंडिंग नहीं कराई होती तो मल्लाह टोली का नक्शा ही कुछ और होता और कई घर इस बार की बाढ़ में तबाह हो गए होते। कटान की वजह से एनएच 97 के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा था।
सिंचाई विभाग की देन है कि आकस्मिकता को देखते हुए बिना फंड स्वीकृत हुए ही एनएच 97 के अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी तरफ से कार्य कराया। वजह सड़क और गंगा की दूरी में मात्र कुछ मीटर का ही फासला रह गया था। इन समस्याओं को देखते हुए किसानों एवं गंगा नदी किनारे रह रहे लोगों ने कई बार कटान को रोकने के लिए पर्यटन मंत्री से स्थायी समाधान निकालने के लिये अनुरोध किया था। इसको पर्यटन मंत्री ने गंभीरता से लिया। बार-बार हो रही कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग से 24 करोड़ 48 लाख का 1200 मीटर लंबे बोल्डर बाइंडिंग कार्य का इस्टीमेट बनवाकर उसे स्वीकृत भी करा लिया।
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इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के प्रयास से कटान को रोकने के लिए 1200 मीटर लंबाई का प्रोजेक्ट सिंचाई विभाग द्वारा गठित परियोजना नाबार्ड से वित्तपोषण के लिए अनुमोदित हो चुका है। गंगा का जलस्तर नीचे होने पर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। धन आवंटन के सापेक्ष इसी वित्तीय वर्ष में कार्य समाप्त कर दिया जाएगा।
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बरसात के दिनों में गंगा नदी में बढ़ते जल स्तर से आए दिन तटवर्ती इलाके के लोगों को खौफ के साए में जीने को विवश होना पड़ता था। बरसात में लोगों की जमीन कटान के रूप में जमींदोज हो जाती थी। कटान की वजह से चक्काबांध से लगायत बड़ेसर, हेतिमपुर एवं कस्बा आदि क्षेत्र के लोगों की सैकड़ों बीघा जमीन गंगा की गोद में समा चुकी है। कटान के कारण मल्लाह टोली के कई घर भी गंगा की गोद में समाहित हो चुके हैं। अगर पर्यटन मंत्री ने तीन वर्ष पहले बलुवा घाट पर पक्का घाट एवं मल्लाह टोली के पास पत्थर बाइंडिंग नहीं कराई होती तो मल्लाह टोली का नक्शा ही कुछ और होता और कई घर इस बार की बाढ़ में तबाह हो गए होते। कटान की वजह से एनएच 97 के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा था।
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सिंचाई विभाग की देन है कि आकस्मिकता को देखते हुए बिना फंड स्वीकृत हुए ही एनएच 97 के अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी तरफ से कार्य कराया। वजह सड़क और गंगा की दूरी में मात्र कुछ मीटर का ही फासला रह गया था। इन समस्याओं को देखते हुए किसानों एवं गंगा नदी किनारे रह रहे लोगों ने कई बार कटान को रोकने के लिए पर्यटन मंत्री से स्थायी समाधान निकालने के लिये अनुरोध किया था। इसको पर्यटन मंत्री ने गंभीरता से लिया। बार-बार हो रही कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग से 24 करोड़ 48 लाख का 1200 मीटर लंबे बोल्डर बाइंडिंग कार्य का इस्टीमेट बनवाकर उसे स्वीकृत भी करा लिया।
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इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के प्रयास से कटान को रोकने के लिए 1200 मीटर लंबाई का प्रोजेक्ट सिंचाई विभाग द्वारा गठित परियोजना नाबार्ड से वित्तपोषण के लिए अनुमोदित हो चुका है। गंगा का जलस्तर नीचे होने पर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। धन आवंटन के सापेक्ष इसी वित्तीय वर्ष में कार्य समाप्त कर दिया जाएगा।