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ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड परियोजना के आर्बिटेशन की सुनवाई पूरी

Wed, 23 Jun 2021 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jun 2021 11:39 PM IST
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Arbitration hearing for Tadighat-Mau rail line project completed
ताड़ीघाट-मऊ रेल खंड के विस्तारीकरण में कुछ काश्तकारों ने अपनी जमीन के मुआवजे के रेट को लेकर जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया था। पिछले दो साल से लंबित इस मामले में जिलाधिकारी के न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई। अधिकारियों का कहना है कि इसमें फैसला कभी भी आ सकता है। पहले चरण की करीब चौदह किमी लंबी ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड के विस्तारीकरण में जिले की सदर तथा जमानियां तहसील के 17 गांवों के काश्तकारों की जमीन अधिकृत की गई थी। जिसमें से 16 गांवों के 599 काश्तकारों ने 5.9459 हेक्टेयर जमीन के लिए करीब 40.79 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर जिलाधिकारी न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दो सालों से लंबित आर्बिटेशन की सुनवाई पूरी होने के बाद मामले की सभी पत्रावलियां आदेश के लिए भेजी जा चुकी है।
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आरवीएनएल के परियोजना प्रबंधक सत्यम कुमार ने बताया कि दो वर्षों से लंम्बित सभी आर्बिटेशन के मामलें की सुनवाई जिलाधिकारी के न्यायालय में पूरी हो चुकी है जिसका आदेश बहुत जल्द आयेगा। इसके बाद परियोजना के निर्माण में और तेजी आने की उम्मीद है। मालूम हो कि इसके पहले दोनों तहसीलों के 17 गांव के 2184 किसानों के 29.5851 हेक्टेयर का करीब 1. 69 अरब रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बता दें कि पहले चरण की इस परियोजना में सदर व जमानियां तहसील के कुल 17 गांव शामिल है। इन गांवों के कुल 2783 किसान परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए कुल 35.5310 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी जिसका करीब 2.10 अरब रुपये किसानों को मुआवजा देना था। मगर बहुत से किसानों में मुआवजे व सर्किल रट को लेकर असंतोष था। जिसको लेकर किसान जिलाधिकारी न्यायालय में आर्बिटेशन दाखिल कर दिये।ताड़ीघाट-मऊ के इस रेल परियोजना को पीएम नरेंद्र मोदी ने 14 नवंबर 2016 को रिमोट के जरिए शिलान्यास किया था। इस परियोजना पर पीएमओ की नजर बनी रहती है। बीच-बीच में उसकी ओर से परियोजना की प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती है। पहले चरण की परियोजना को साल 2021 में पूरा किया जाना था मगर कोरोना संक्रमण और आर्बिटेशन के चलते यह परियोजना निर्धारित समय से पूरा नही हो सका। जिसके बाद इस परियोजना को साल 2023 तक निर्धारित कर दी गई है। बता दें कि 51 किमी लंबी करीब 1766 करोड़ की इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण में सोनवल, ताड़ीघाट, मेदिनीपुर से गंगा नदी होते हुए सीटी स्टेशन से गाजीपुर घाट तक जाना है और दूसरे चरण की परियोजना को घाट स्टेशन से मऊ तक पूरा किया जाना है। वहीं, अब परियोजना की लागत निर्धारित समय में पूरा न होने से इसकी लागत 80 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है।
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आरवीएनएल परियोजना प्रबंधक, सत्यम कुमार दो वर्षों से लंबित सभी आर्बिटेशन के मामले की सुनवाई जिलाधिकारी के न्यायालय में पूरी हो चुकी है जिसका आदेश बहुत जल्द आएगा। इसके बाद परियोजना के निर्माण में और तेजी आने की उम्मीद है।
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