गाजीपुर। नवासा-ए-रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हजरत इमाम हुसैन और दीगर आले रसूल और उनके जांनिसार साथियों की शहादत का चहल्लुम शहर सहित मुस्लिम बहुल गांवों और कस्बों में मनाया गया। इस अवसर पर अलम, ताबूत व ताजिये के साथ जुलूस निकाला गया। विभिन्न अंजुमनों के लोगों द्वारा मातम, नौहाख्वानी व सीनाजनी की गई। कई स्थानों पर मजलिस आयोजित की गई। देर शाम तक ताजिए दफन किए गए।
शहर के नुरुद्दीनपुरा स्थित उम्मेलैला बीबीके इमाम बारगाह से कदीमी जुलूस शहर के विभिन्न मोहल्लों से होता हुआ छोटे इमाम दरगाह विशेश्वगंज पहुंचकर समाप्त हुआ। इस विभिन्न अंजुमनें नौहाख्वानी व सीनाजनी करती रहीं तथा कई ओलमा व जाकिर-ए-अहलेबैत ने जुलूस को खेताब फरमाया। इससे पूर्व मौलाना जीशान अली आजमी ने सारे तबर्रुकात की नकाबत (पहचान) कराई। अंत में इमाम जुमा जमात शहर मौलाना तनवीर हसन ने मजलिस को खेताब फरमाते हुए शहादत-ए-इमाम हुसैन व अन्य शोहदा-ए-कर्बला का जिक्र करते हुए मसाएबे-कर्बला बयान किया। नखास, मुहम्मदपुर व जंगीपुर, जूड़नशहीद, सुसुनडी, नोनहरा, हैंसी, चावनपुर अरजानीपुर, हुसैनपुर, सादात, शादियाबाद, सौरम, भितरी, मजुई आदि गांवों में भी चहल्लुम मनाया गया।