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Ghazipur News: 129 साल पहले दक्षिण अफ्रीका गए थे पूर्वज, श्राद्ध करने आया दंपती
Sun, 29 Sep 2024 01:08 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजीपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजीपुर
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:08 AM IST
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भीमापार । दक्षिण अफ्रीकी दंपती शनिवार को सैदपुर तहसील क्षेत्र के मंगारी गांव पहुंचा। गांव निवासी इनके पूर्वज यहां से 129 वर्ष पहले अफ्रीका गए थे। पति-पत्नी ने जमीन को प्रणाम किया। फिर, मिट्टी माथे पर लगाई। कहा, यहां की मिट्टी लेकर अफ्रीका जाएंगे। तीन घंटे रुकने के दौरान वह ग्रामीणों को नमस्ते...नमस्ते करते रहे। गाइड के माध्यम से बातचीत की। श्राद्ध पक्ष में पूर्वज के तर्पण के लिए दंपती भारत आया था।
सैदपुर तहसील क्षेत्र के मंगारी गांव निवासी दुखरन 25 वर्ष की आयु में 5 मार्च 1895 में कोलकाता गए थे। वहां से पानी के जहाज से 29 मार्च 1895 को दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। परिवार के मुताबिक वह वहां पर गन्ने के खेत में मजदूरी करते थे। तब से उनकी छह पीढ़ी अफ्रीका में ही है। राकेश रौशन और उनकी पत्नी यूनी अपने पूर्वजों का तर्पण करने के लिए भारत आए थे। गया से लौटने के बाद वह शनिवार को अपराह्न तीन बजे मंगारी पहुंचे। राकेश रौशन पेशे से इंश्यारेंस एडवाइजर हैं।
उन्होंने बताया कि परिवार के लोग वहां पर फल और सब्जी के व्यवसायी हैं। लेकिन आज भी भारतीय संस्कृति से जुड़े हैं। नवरात्र तक दंपती श्री श्री रविशंकर प्रसाद के बंगलूरू स्थित आश्रम में रहेंगे। आश्रम से ही उन्हें तर्पण की महत्ता पता चली। इसके बाद उन्होंने अपने पूर्वजों का तर्पण करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि इसके पहले उनके परिवार से कोई भारत नहीं आया था।
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हिंदू रीति-रिवाज से की है यूनी से शादी
राकेश दक्षिण अफ्रीका से श्री श्री रविशंकर प्रसाद के बंगलूरू स्थित आश्रम आए थे। वहीं पर मलयेशिया निवासी यूनी से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने श्री श्री रविशंकर प्रसाद से आशीर्वाद लेकर आश्रम में 2017 में यूनी से शादी कर ली। राकेश रौशन और यूनी ने ग्रामीणों के साथ देवी गीत (पचरा) भी गाए। घर देवी-देवताओं की पूजा होती है। पति-पत्नी दोनों हनुमान भक्त हैं।
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सैदपुर तहसील क्षेत्र के मंगारी गांव निवासी दुखरन 25 वर्ष की आयु में 5 मार्च 1895 में कोलकाता गए थे। वहां से पानी के जहाज से 29 मार्च 1895 को दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। परिवार के मुताबिक वह वहां पर गन्ने के खेत में मजदूरी करते थे। तब से उनकी छह पीढ़ी अफ्रीका में ही है। राकेश रौशन और उनकी पत्नी यूनी अपने पूर्वजों का तर्पण करने के लिए भारत आए थे। गया से लौटने के बाद वह शनिवार को अपराह्न तीन बजे मंगारी पहुंचे। राकेश रौशन पेशे से इंश्यारेंस एडवाइजर हैं।
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उन्होंने बताया कि परिवार के लोग वहां पर फल और सब्जी के व्यवसायी हैं। लेकिन आज भी भारतीय संस्कृति से जुड़े हैं। नवरात्र तक दंपती श्री श्री रविशंकर प्रसाद के बंगलूरू स्थित आश्रम में रहेंगे। आश्रम से ही उन्हें तर्पण की महत्ता पता चली। इसके बाद उन्होंने अपने पूर्वजों का तर्पण करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि इसके पहले उनके परिवार से कोई भारत नहीं आया था।
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हिंदू रीति-रिवाज से की है यूनी से शादी
राकेश दक्षिण अफ्रीका से श्री श्री रविशंकर प्रसाद के बंगलूरू स्थित आश्रम आए थे। वहीं पर मलयेशिया निवासी यूनी से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने श्री श्री रविशंकर प्रसाद से आशीर्वाद लेकर आश्रम में 2017 में यूनी से शादी कर ली। राकेश रौशन और यूनी ने ग्रामीणों के साथ देवी गीत (पचरा) भी गाए। घर देवी-देवताओं की पूजा होती है। पति-पत्नी दोनों हनुमान भक्त हैं।