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Ghazipur News: ज्ञान बांटने के साथ श्रमदान से बदल दी विद्यालय की तस्वीर

Wed, 22 Nov 2023 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Nov 2023 12:18 AM IST
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Along with sharing knowledge, Shramdaan changed the picture of the school.
कासिमाबाद। अगर मन में जज्बा और जुनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। यह बात कासिमाबाद विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय वासुदेवपुर के प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार गुप्ता और शिक्षक सतीश चंद्र यादव ने मिलकर साबित कर दिया। ज्ञान के साथ श्रमदान कर उन्होंने विद्यालय की तस्वीर बदल दी। मजदूरों की जरूरत पड़ी तो खुद काम किया और बजट कम पड़ा तो अपने वेतन से खर्च किया। उन्होंने विद्यालय को ऐसा सजाया-संवारा है कि वह आज कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। हरा-भरा परिसर और आकर्षक खेल मैदान उनकी मेहनत और समर्पण ने विद्यालय को जिले में खास बना दिया है। इसमें प्रवेश करने पर लगता ही नहीं है कि आप किसी सरकारी स्कूल में आए हैं। टीचिंग लर्निंग मटीरियल (टीएलएम), पेंटिंग से सुसज्जित विद्यालय के क्लास रूम अलग ही छटा बिखेरते हैं। अंजनी ने इस विद्यालय में 2009 में कार्यभार संभाला था। उस समय यह काफी बदहाल हाल में था। भवन और चहारदीवारी तक नहीं थी। परिसर में पशु विचरण करते थे। इसकी तकदीर तब बदली जब 2015 में यहां पर सतीशचन्द्र यादव ने गणित और विज्ञान के शिक्षक के रूप में पदभार संभाला। उनकी अथक मेहनत से विद्यालय के दिन बहुरने लगे। वर्ष 2015 में प्राथमिक में एक सौ सात और जूनियर में 35 बच्चे पंजीकृत थे लेकिन कठिन परिश्रम से इस समय बच्चे करीब 595 हैं। सतीशचन्द्र 2020 पीसीएस संवर्ग में सफलता हासिल करते हुए डायट आजमगढ़ में लेक्चरर के पद पर तैनात हैं। दूरभाष पर हुई बातचीत में बताया कि जब उन्होंने वासुदेवपुर में सहायक अध्यापक के पद पर ज्वाइन किया तो संकल्प लिया था कि इसको जिले के सबसे अच्छे विद्यालय के रूप में स्थापित करेंगे। इसकी तस्वीर बदलने के लिए छात्र-छात्राओं को साइकिल से लेकर आसपास के गांवों में डोर-टू-डोर रैली निकाल कर बच्चों के साथ उनके अभिभावकों से मिला गया। विद्यालय में भेजने का अनुरोध किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने लगी और इस समय विद्यालय किसी कान्वेंट स्कूल से कम नहीं है। इसमें चार सहायक अध्यापकों और दो शिक्षामित्र की तैनाती है। पांच जन सहयोग से प्राइवेट अध्यापक रखे गए हैं। विद्यालय का पूरा परिसर इटालियन घास से आच्छादित है। पूरा परिसर हरे-भरे पौधों से भरा पड़ा है। बैठने के लिए कॉन्वेंट स्कूलों की तरह से डेस्क और कुर्सियां उपलब्ध कराई गई है। दीवारों पर महापुरुषों की तस्वीरों के साथ टीएलएम पेंटिंग की गई है। विद्यालय को स्मार्ट क्लास से भी आच्छादित किया गया है। यहां पर कुशल पठन-पाठन देखकर तत्कालीन बीएसए की तरफ से वर्ष 2017 में प्रोजेक्टर भी लगा है। विद्यालय में बच्चों को देश दुनिया की खबरों के साथ मनोरंजन आदि के लिए एलईडी टीवी लगवाई गई है। अध्यापकों के साथ छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक मशीन लगाई गई है। कंपोजिट विद्यालय में वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो, ताइक्वांडो, गोला फेक, चक्का फेंक जैसे खेल प्रतिदिन होते हैं। सुबह 8:45 पर मॉर्निंग असेंबली में पीटी और व्यायाम कराया जाता है। मिड-डे-मील से पहले भोजन मंत्र छुट्टी के समय बच्चों को अगले दिन की कार्य योजनाओं के बारे में जानकारी देकर छोड़ा जाता है। विद्यालय में मल्टीपल हैंडवाश यूनिट लगाई गई है। पूरे विद्यालय में 32 प्रकार के आयुर्वेदिक पौधे जिसमें एलोवेरा, तुलसी, बरगद, पीपल, अशोक, गुलदावदी, चितवन जैसे दर्जनों पौधे लगाए गए हैं। पूरा परिसर कबाड़ से जुगाड़ विधि से कोल्ड ड्रिंक के बोतल, डिब्बे आदि से हैंगिंग गार्डेन सुसज्जित है।
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