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सतेंद्र की मौत से उदास था जर्रा-जर्रा
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 16 Jul 2016 11:24 PM IST
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सतेंद्र की मौत से उदास था जर्रा-जर्रा
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शिवपाल की सभा में खुद को आग लगाकर 60 फीसदी झुलसे सतेंद्र ने जिंदगी और मौत से लड़ते हुए शनिवार की सुबह दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर आते ही एक तरफ जहां परिवार में कोहराम मच गया, वहीं गांव का जर्रा-जर्रा उदास हो गया। जिसे सतेंद्र के इस दुनिया से जाने खबर मिली वह उसके दरवाजे पर पहुंच गया और बिलख रहे परिवार के लोगों को ढांढस बंधाने में जुट गया।
बीते 12 जुलाई को नंदगंज थाना क्षेत्र के किशोहरी गांव निवासी रामसूरत बिंद का पुत्र सतेंद्र बिंद (18) सैदपुर में आयोजित कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की सभा में कोटेदार और ग्राम प्रधान द्वारा प्रताड़ित करने का शिकायती पत्र देने पहुंचा था। पुलिस कर्मियों द्वारा शिवपाल यादव से मिलने से रोके जाने पर निराश हो उसने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश की थी। पुलिस आनन-फानन में उसे उपचार के लिए बीएचयू ले गई, जहां उसका उपचार चल रहा था। सत्येंद्र की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
शुक्रवार को ही सत्येंद्र्र के भाई ज्ञानेंद्र ने बताया था कि उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और वह कुछ बोल नहीं पा रहा है। परिवार सहित गांव के लोग उसके सही-सलामत घर वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। शनिवार की सुबह जैसे ही सत्येंद्र की मौत की खबर आई घर में कोहराम मच गया। पूरे गांव में भी उदासी छा गई। लोग अपने-अपने घरों से निकलकर सतेंद्र्र्र के घर और चट्टी-चौराहे पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने विरोध में सड़क जाम करने की तैयारी की थी, लेकिन पुलिस और पीएसी के पहुंचने के बाद किसी ने हिम्मत नहीं की। मातमी सन्नाटे में सतेंद्र के परिवार वालों की चीख-पुकार गूंजने लगी। गांव के लोग सतेंद्र के परिवार को ढांढस बंधाने में जुट गए। बावजूद परिजनों की आंखों से सत्येंद्र के मौत के बाद आंसू झरते रहे।
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बीते 12 जुलाई को नंदगंज थाना क्षेत्र के किशोहरी गांव निवासी रामसूरत बिंद का पुत्र सतेंद्र बिंद (18) सैदपुर में आयोजित कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की सभा में कोटेदार और ग्राम प्रधान द्वारा प्रताड़ित करने का शिकायती पत्र देने पहुंचा था। पुलिस कर्मियों द्वारा शिवपाल यादव से मिलने से रोके जाने पर निराश हो उसने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश की थी। पुलिस आनन-फानन में उसे उपचार के लिए बीएचयू ले गई, जहां उसका उपचार चल रहा था। सत्येंद्र की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
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शुक्रवार को ही सत्येंद्र्र के भाई ज्ञानेंद्र ने बताया था कि उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और वह कुछ बोल नहीं पा रहा है। परिवार सहित गांव के लोग उसके सही-सलामत घर वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। शनिवार की सुबह जैसे ही सत्येंद्र की मौत की खबर आई घर में कोहराम मच गया। पूरे गांव में भी उदासी छा गई। लोग अपने-अपने घरों से निकलकर सतेंद्र्र्र के घर और चट्टी-चौराहे पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने विरोध में सड़क जाम करने की तैयारी की थी, लेकिन पुलिस और पीएसी के पहुंचने के बाद किसी ने हिम्मत नहीं की। मातमी सन्नाटे में सतेंद्र के परिवार वालों की चीख-पुकार गूंजने लगी। गांव के लोग सतेंद्र के परिवार को ढांढस बंधाने में जुट गए। बावजूद परिजनों की आंखों से सत्येंद्र के मौत के बाद आंसू झरते रहे।
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