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Ghazipur News: वाराणसी में एयरशो, अंधऊ एयरबेस पर बनेगा एमआई-17 और चिनूक हेलीकॉप्टर का स्टेशन
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अंधऊ हवाई पट्टी। संवाद
गाजीपुर। अंधऊ एयरबेस पर अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में भारतीय वायुसेना के एयर शो के तहत एमआई-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों के लिए स्टेशन बनाया जाएगा। वाराणसी में होने वाले इस एयर शो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना है। ऐसे में एयरबेस की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर प्रशासन का विशेष जोर है। यह जानकारी जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने दी। उन्होंने बताया कि अंधऊ एयरबेस पर हवाई पट्टी के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दी जा रही है। यहां बाउंड्रीवाल की मरम्मत, गेस्ट हाउस और अन्य जर्जर भवनों को दुरुस्त करने का काम भी कराया जा रहा है।
डीएम ने बताया कि करीब दो किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी वाले एयरबेस को सिर्फ मौजूदा व्यवस्थाओं तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। एयरबेस के विकास, साफ-सफाई और सुंदरीकरण के साथ ही यहां के जर्जर हिस्सों भवनों को दुरुस्त कराया जा रहा है। डीएम ने बताया कि नागर विमानन विभाग की ओर से इसे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय फ्लाइंग अकादमी के रूप में विकसित करने की बड़ी योजना पर भी काम चल रहा है।
दो किमी की हवाई पट्टी, भविष्य में बड़ा विस्तार
डीएम ने बताया कि अंधऊ एयरबेस पर करीब दो किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी मौजूद है। इसी आधार पर एयरबेस को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। नागर विमानन विभाग की ओर से इसे अंतरराष्ट्रीय फ्लाइंग अकादमी के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके लिए प्रशासन की ओर से कुछ प्रस्ताव स्वीकृत भी कराए जा चुके हैं।
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जर्जर हिस्सों को पहले किया जा रहा दुरुस्त
एयरबेस के विकास की शुरुआत मौजूदा ढांचे को मजबूत करने से की जा रही है। हवाई पट्टी के जीर्णोद्धार के साथ बाउंड्रीवाल की मरम्मत और गेस्ट हाउस समेत अन्य जर्जर भवनों का सुदृढ़ीकरण कराया जा रहा है। साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर भी प्रशासन का जोर है। इसके जरिए एयरबेस परिसर की मौजूदा व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
रात में भी उतर सकेंगे विमान, लगेंगी विशेष लाइटें
जिला प्रशासन के माध्यम से लोक निर्माण विभाग ने हवाई पट्टी, रनवे और चारदीवारी की मरम्मत तथा लाइट व्यवस्था के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को 14 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें करीब 10 करोड़ रुपये रनवे और टूटी चारदीवारी की मरम्मत पर खर्च होंगे। चार करोड़ रुपये लाइट व्यवस्था के लिए प्रस्तावित हैं। इसकी जानकारी लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीएल गौतम ने दी है। बताया कि अंधऊ हवाई पट्टी पर चारों तरफ और रनवे पर ऐसी लाइटें लगाने की योजना है, जिससे रात में भी विमान उतारे जा सकें। एयर शो के मद्देनजर लाइट व्यवस्था को प्रस्तावित 14 करोड़ रुपये की कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
1941 में बनी थी आपातकालीन लैंडिंग के लिए हवाई पट्टी
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1941 में आपातकालीन लैंडिंग के लिए अंधऊ और शहबाजकुली में हवाई पट्टियां बनाई गई थीं। वर्तमान में अंधऊ हवाई पट्टी 63 एकड़ में फैली है। इसका परिसर भारतीय रक्षा संपदा विभाग की भूमि पर बना है। रनवे की लंबाई 4,800 फीट यानी 1,463 मीटर है, जो छोटे विमानों के लिए उपयोगी है।
नौ साल पहले उतरा था विमान, अब फिर तैयारी
अंधऊ हवाई पट्टी पर अंतिम बार 10 फरवरी 2016 को तत्कालीन पंचायती राज्यमंत्री कैलाश यादव का पार्थिव शरीर लेकर विमान उतरा था। प्रदेश की सपा सरकार में मंत्री रहे अंबिका चौधरी का हेलीकॉप्टर भी यहां उतर चुका है। इसके अलावा वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव व उतराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हेलिकॉप्टर उतरा था। इसके बाद से कोई प्लेन या हेलिकॉप्टर हवाई पट्टी पर लैंड नहीं किया। अब प्रस्तावित एयर शो के चलते हवाई पट्टी को फिर से विमानों की आवाजाही के लिए तैयार किया जा रहा है।
छोटे विमान और हेलीकॉप्टरों के लिए सक्षम
अंधऊ हवाई पट्टी का 4,800 फीट (1,463 मीटर) लंबा डामर रनवे छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए उपयोगी है। यहां एमआई-17, ध्रुव एएलएच, चेतक, बेल-412 समेत निजी और सरकारी हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग संभव है। वहीं दो से 10 सीटर छोटे वीआईपी और चार्टर्ड विमान भी सुरक्षित उतर सकते हैं। रनवे की मौजूदा लंबाई के कारण 19 से 70 सीटर टर्बोप्रॉप विमानों का संचालन सीमित क्षमता में ही संभव है। ट्विन ऑटर, एटीआर-42 और बॉम्बार्डियर डैश-8 जैसे विमान कम वजन और पेलोड के साथ उतर सकते हैं। जबकि एयरबस ए-320 और बोइंग-737 जैसे 150 से अधिक सीटर बड़े जेट विमानों के लिए मौजूदा रनवे पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा यहां एटीसी और आईएलएस उपकरण भी नहीं हैं।
एफटीओ बना तो रोजगार से लेकर विमानन तक बदलेगी तस्वीर
अंधऊ हवाई पट्टी को फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) शुरू होने पर पायलट इंस्ट्रक्टर, ग्राउंड स्टाफ, विमान रखरखाव इंजीनियर (एएमई), सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक पदों पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।
इसके अलावा देश-विदेश से प्रशिक्षु पायलट और उनके परिवार आने पर होटल, रेस्तरां और पीजी कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बढ़ती मांग के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण सुविधा से हर साल दर्जनों कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) धारक तैयार हो सकते हैं। वहीं,एफटीओ शुरू होने से लहुरी काशी की पहचान अंतर्राष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में बन सकती है।
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डीएम ने बताया कि करीब दो किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी वाले एयरबेस को सिर्फ मौजूदा व्यवस्थाओं तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। एयरबेस के विकास, साफ-सफाई और सुंदरीकरण के साथ ही यहां के जर्जर हिस्सों भवनों को दुरुस्त कराया जा रहा है। डीएम ने बताया कि नागर विमानन विभाग की ओर से इसे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय फ्लाइंग अकादमी के रूप में विकसित करने की बड़ी योजना पर भी काम चल रहा है।
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दो किमी की हवाई पट्टी, भविष्य में बड़ा विस्तार
डीएम ने बताया कि अंधऊ एयरबेस पर करीब दो किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी मौजूद है। इसी आधार पर एयरबेस को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। नागर विमानन विभाग की ओर से इसे अंतरराष्ट्रीय फ्लाइंग अकादमी के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके लिए प्रशासन की ओर से कुछ प्रस्ताव स्वीकृत भी कराए जा चुके हैं।
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जर्जर हिस्सों को पहले किया जा रहा दुरुस्त
एयरबेस के विकास की शुरुआत मौजूदा ढांचे को मजबूत करने से की जा रही है। हवाई पट्टी के जीर्णोद्धार के साथ बाउंड्रीवाल की मरम्मत और गेस्ट हाउस समेत अन्य जर्जर भवनों का सुदृढ़ीकरण कराया जा रहा है। साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर भी प्रशासन का जोर है। इसके जरिए एयरबेस परिसर की मौजूदा व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
रात में भी उतर सकेंगे विमान, लगेंगी विशेष लाइटें
जिला प्रशासन के माध्यम से लोक निर्माण विभाग ने हवाई पट्टी, रनवे और चारदीवारी की मरम्मत तथा लाइट व्यवस्था के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को 14 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसमें करीब 10 करोड़ रुपये रनवे और टूटी चारदीवारी की मरम्मत पर खर्च होंगे। चार करोड़ रुपये लाइट व्यवस्था के लिए प्रस्तावित हैं। इसकी जानकारी लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बीएल गौतम ने दी है। बताया कि अंधऊ हवाई पट्टी पर चारों तरफ और रनवे पर ऐसी लाइटें लगाने की योजना है, जिससे रात में भी विमान उतारे जा सकें। एयर शो के मद्देनजर लाइट व्यवस्था को प्रस्तावित 14 करोड़ रुपये की कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
1941 में बनी थी आपातकालीन लैंडिंग के लिए हवाई पट्टी
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1941 में आपातकालीन लैंडिंग के लिए अंधऊ और शहबाजकुली में हवाई पट्टियां बनाई गई थीं। वर्तमान में अंधऊ हवाई पट्टी 63 एकड़ में फैली है। इसका परिसर भारतीय रक्षा संपदा विभाग की भूमि पर बना है। रनवे की लंबाई 4,800 फीट यानी 1,463 मीटर है, जो छोटे विमानों के लिए उपयोगी है।
नौ साल पहले उतरा था विमान, अब फिर तैयारी
अंधऊ हवाई पट्टी पर अंतिम बार 10 फरवरी 2016 को तत्कालीन पंचायती राज्यमंत्री कैलाश यादव का पार्थिव शरीर लेकर विमान उतरा था। प्रदेश की सपा सरकार में मंत्री रहे अंबिका चौधरी का हेलीकॉप्टर भी यहां उतर चुका है। इसके अलावा वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव व उतराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हेलिकॉप्टर उतरा था। इसके बाद से कोई प्लेन या हेलिकॉप्टर हवाई पट्टी पर लैंड नहीं किया। अब प्रस्तावित एयर शो के चलते हवाई पट्टी को फिर से विमानों की आवाजाही के लिए तैयार किया जा रहा है।
छोटे विमान और हेलीकॉप्टरों के लिए सक्षम
अंधऊ हवाई पट्टी का 4,800 फीट (1,463 मीटर) लंबा डामर रनवे छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों के संचालन के लिए उपयोगी है। यहां एमआई-17, ध्रुव एएलएच, चेतक, बेल-412 समेत निजी और सरकारी हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग संभव है। वहीं दो से 10 सीटर छोटे वीआईपी और चार्टर्ड विमान भी सुरक्षित उतर सकते हैं। रनवे की मौजूदा लंबाई के कारण 19 से 70 सीटर टर्बोप्रॉप विमानों का संचालन सीमित क्षमता में ही संभव है। ट्विन ऑटर, एटीआर-42 और बॉम्बार्डियर डैश-8 जैसे विमान कम वजन और पेलोड के साथ उतर सकते हैं। जबकि एयरबस ए-320 और बोइंग-737 जैसे 150 से अधिक सीटर बड़े जेट विमानों के लिए मौजूदा रनवे पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा यहां एटीसी और आईएलएस उपकरण भी नहीं हैं।
एफटीओ बना तो रोजगार से लेकर विमानन तक बदलेगी तस्वीर
अंधऊ हवाई पट्टी को फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) शुरू होने पर पायलट इंस्ट्रक्टर, ग्राउंड स्टाफ, विमान रखरखाव इंजीनियर (एएमई), सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक पदों पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।
इसके अलावा देश-विदेश से प्रशिक्षु पायलट और उनके परिवार आने पर होटल, रेस्तरां और पीजी कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बढ़ती मांग के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण सुविधा से हर साल दर्जनों कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) धारक तैयार हो सकते हैं। वहीं,एफटीओ शुरू होने से लहुरी काशी की पहचान अंतर्राष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में बन सकती है।