{"_id":"63b5c466cfb9397bdc2135a8","slug":"academic-block-will-not-be-built-in-kasturba-vidyalaya-in-due-time-ghazipur-news-vns6920424126","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: कस्तूरबा विद्यालय में तय समय में नहीं बनेगा एकेडमिक ब्लॉक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: कस्तूरबा विद्यालय में तय समय में नहीं बनेगा एकेडमिक ब्लॉक
विज्ञापन
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए आठ विद्यालयों में छात्रावास के साथ ही दो ब्लाकों में एकेडमिक ब्लाक का भी निर्माण कराया जा रहा है। विभाग की मानें तो इसे इस वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाना है लेकिन इसको समय पर पूरा कर पाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
बालिका शिक्षा की स्थिति सुधारने एवं बालिकाओं को गुणवत्तापरक प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसमें कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी एक है। शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े उन विकास खंडों में ये आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए हैं जहां पर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार महिलाओं की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत दर से कम और जेंडर गैप राष्ट्रीय औसत दर से अधिक था।
इसके अलावा जिस ब्लाक में पांच प्रतिशत अनुसूचित जाति-जनजाति की आबादी और उनकी महिला साक्षरता दर दस प्रतिशत से कम थी उन ब्लाकों में ये आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। इन छात्राओं को कक्षा-नौ से बारह तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर या उसके पास छात्रावास के साथ ही एकेडमिक ब्लाक का निर्माण कराया जा रहा है।
विज्ञापन
मिली जानकारी के अनुसार दो ब्लाकों कासिमाबाद एवं जखनिया में हास्टल के साथ ही करीब तीन करोड़ 15 लाख की लागत से एकेडमिक ब्लाक बनवाया जा रहा है। जबकि एक करोड़ 77 लाख की लागत से प्रत्येक छात्रावास का निर्माण होना है। कार्य शुरू हुए महीनों बीत गए। इसे वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा किया जाना है लेकिन निर्धारित समय में इसके पूरा हो पाने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
सबसे पहले सैदपुर में खुला था विद्यालय
गाजीपुर। जिले में करंडा और भदौरा विकासखंड को छोड़कर शेष चौदह ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। सबसे पहले जुलाई 2005 में सैदपुर ब्लाक के डायट परिसर में पहला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोला गया था। इन विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश के लिए सौ सीट निर्धारित की गई है। विद्यालयों में 75 प्रतिशत सीटों पर अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की अपवंचित बालिकाओं के प्रवेश की व्यवस्था की गई है। शेष 25 फीसदी सीटं पर सामान्य वर्ग की उन परिवारों की बालिकाओं का प्रवेश किया जाना है जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही हैं।
दो ब्लाकों में एकेडमिक ब्लाक का निर्माण इस वित्तीय वर्ष में पूरा किया जाना है। समय-समय पर जिलाधिकारी की ओर से कार्य की समीक्षा कर कार्यदायी संस्था को निर्धारित समय पर काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है- हेमंत राव, बेसिक शिक्षाधिकारी
विज्ञापन
बालिका शिक्षा की स्थिति सुधारने एवं बालिकाओं को गुणवत्तापरक प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसमें कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी एक है। शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े उन विकास खंडों में ये आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए हैं जहां पर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार महिलाओं की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत दर से कम और जेंडर गैप राष्ट्रीय औसत दर से अधिक था।
विज्ञापन
इसके अलावा जिस ब्लाक में पांच प्रतिशत अनुसूचित जाति-जनजाति की आबादी और उनकी महिला साक्षरता दर दस प्रतिशत से कम थी उन ब्लाकों में ये आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। इन छात्राओं को कक्षा-नौ से बारह तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर या उसके पास छात्रावास के साथ ही एकेडमिक ब्लाक का निर्माण कराया जा रहा है।
विज्ञापन
मिली जानकारी के अनुसार दो ब्लाकों कासिमाबाद एवं जखनिया में हास्टल के साथ ही करीब तीन करोड़ 15 लाख की लागत से एकेडमिक ब्लाक बनवाया जा रहा है। जबकि एक करोड़ 77 लाख की लागत से प्रत्येक छात्रावास का निर्माण होना है। कार्य शुरू हुए महीनों बीत गए। इसे वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा किया जाना है लेकिन निर्धारित समय में इसके पूरा हो पाने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
सबसे पहले सैदपुर में खुला था विद्यालय
गाजीपुर। जिले में करंडा और भदौरा विकासखंड को छोड़कर शेष चौदह ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। सबसे पहले जुलाई 2005 में सैदपुर ब्लाक के डायट परिसर में पहला कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोला गया था। इन विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश के लिए सौ सीट निर्धारित की गई है। विद्यालयों में 75 प्रतिशत सीटों पर अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की अपवंचित बालिकाओं के प्रवेश की व्यवस्था की गई है। शेष 25 फीसदी सीटं पर सामान्य वर्ग की उन परिवारों की बालिकाओं का प्रवेश किया जाना है जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही हैं।
दो ब्लाकों में एकेडमिक ब्लाक का निर्माण इस वित्तीय वर्ष में पूरा किया जाना है। समय-समय पर जिलाधिकारी की ओर से कार्य की समीक्षा कर कार्यदायी संस्था को निर्धारित समय पर काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है- हेमंत राव, बेसिक शिक्षाधिकारी