{"_id":"59-130881","slug":"Ghazipur-130881-59","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब कुछ घंटे भी की जुदाई भी भारी पड़ रही घरवालों पर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब कुछ घंटे भी की जुदाई भी भारी पड़ रही घरवालों पर
Ghazipur
Updated Tue, 27 May 2014 05:33 AM IST
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तीन वर्ष बाद आज मिलेगी दिनेश के मां के कलेजे को ठंडक
पति का चेहरा देख निहाल होगी पत्नी, बच्चोें को मिलेंगे पिता
परिवार सहित गांव के लोगों की आंखें निहार रही दिनेश को
नेसार फैज
बहरियाबाद। बेटे से बिछड़ने के वियोग में तड़प रही मां को तीन वर्षों बाद ठंडक मिलेगी, वहीं पत्नी के चेहरा भी अपने पति को देखकर चमक उठेगा। वहीं बच्चे भी बेसब्री से अपने पिता की राह तक रहे होंगे। बहरियाबाद कसबा में दिनेश विश्वकर्मा के घर कर माहौल पिछले कुछ दिनों से ऐसा ही है। पाकिस्तान के कराची स्थित मलीर जेल से तीन वर्ष बाद रिहा होने की सूचना घर पहुंचने के बाद से दिनेश के घर में ऐसा ही माहौल है। सिर्फ घरवाले ही नहीं बल्कि पूरा गांव उसके इंतजार में है। उसे लेने के लिए उसका भाई और बहनोई वाघा बार्डर गए हुए हैं। दिनेश की मां, पत्नी, बच्चे, उसकी बहनें सहित गांव के लोग पलकें बिछाकर उसकी एक झलक पाने को बेताब हैं।
कसबा निवासी दिनेश विश्वकर्मा ने अपने पिता राममूर्ति की मौत के बाद पैसे के अभाव में इंटर की पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी। परिवार के पालन-पोषण की चिंता में उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। वाराणसी में इलाज के बाद वह ठीक हुआ। रोजी-रोजी के सिलसिले में वह जुलाई 2011 में राजस्थान गया। यहां एक प्राइवेट कंपनी में आपरेटर पद पर कार्य करने लगा। इसी बीच एक माह के अंदर उसने दो बार घर फोन कर अपनी बेटी प्रिया से बात कर कुशलता जानी। इसके बाद परिवार के लोगों से उसका संपर्क टूट गया। संपर्क न होने से परिवार के लोगों की चिंता भी बढ़ती गई। 19 मई 2013 को एलआईयू इंस्पेक्टर आरपी चौधरी द्वारा दिनेश के पाकिस्तान में बंद होने की जानकारी परिवार के लोगों को हुई। यह सूचना मिलते ही पूरा परिवार और गांव वालों ने आला अफसरों से मिलकर दिनेश को छुड़ाने की गुहार लगाई। । तमाम लोगों की कवायद रंग लाई और पांच दिन पहले जैसे ही परिजनों को 26 मई को दिनेश की रिहाई की खबर मिली, उनके आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इसके साथ ही कसबे के लोगों में भी खुशी की लहर दौड़ गई।
इनसेट
चार बजे बाघा बार्डर किया पार
बहरियाबाद। दिनेश विश्वकर्मा को लाने के लिए वाघा बार्डर गए उनके भाई रजनीश विश्वकर्मा ने अमर उजाला से मोबाइल पर बताया कि दिनेश ने सोमवार की शाम 4 बजे वाघा बार्डर पार किया। तत्पश्चात हम उन्हें लेकर बाघा पोस्ट पहुंचे। जहां हमें भोजन के लिए रोका गया। गुरुद्वारे से भोजन आने के बाद भोजन करके हम लोग अमृतसर पहुंचेंगे। यहां पर वेरिफिकेशन के बाद घर के लिए रवाना होे जाएंगे। बाघा बार्डर पार करने की सूचना मिलते की परिवार के लोग खुशी से उछल पड़े।
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इनसेट
तरसी निगाहों को मिलेगा सुकून
बहरियाबाद। फरियाद कर रही ये तरसी हुई निगाहें....कुछ ऐसी ही हालत दिनेश विश्वकर्मा की पत्नी रुक्मिणी देवी की है। लगभग तीन वर्षों की जुदाई के बाद एक-दो दिनों के अंदर ही पति के घर वापसी का अब उसे विश्वास हो गया है, तो घर की दहलीज पर बैठी पत्नी के साथ ही बूढ़ी मां कौशल्या देवी, बेटी प्रिया, पुत्र शिवम की निगाहें बार-बार अनायास की दरवाजे की तरफ जा रही है। एक लंबे अर्से में निराश हो चुकी मां को अपने लाल को कलेजे से लगाने का इंतजार है।
इनसेट
बहनों को मिलेगा भाई का प्यार
बहरियाबाद। दिनेश के राजस्थान जाने से पूर्व उनकी पांचों बहनें शांति, सीमा, पूनम, नीलम, आशा अपने भाई से मिलने मायके आई थी। तब उन्हें इस एहसास नहीं था कि उनका इतनी बड़ी मुसीबत में फंसेगा। विगत तीन वर्षों से भाई की कलाई पर राखी बांधने से वंचित बहनें भाई की रिहाई की सूचना पाकर फूले नहीं समा रही हैं। भाई की एक झलक देखने के लिए बहने मायके आ चुकीं हैं। उन्हें इस बात का विश्वास हो चुका है कि इस बार रक्षाबंधन पर वह अपनी भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांध सकेगी।
इनसेट
जुलूस की शक्ल में दिनेश आएगा घर
बहरियाबाद। पाकिस्तान के कराची के मलीर जेल में कैद दिनेश विश्वकर्मा की रिहाई की खबर से लोगों से खुशी का ठिकाना नहीं रह गया है। दिनेश के घर वालों के साथ ही राष्ट्रीय विश्वकर्मा महासभा, भाजपा बहरियाबाद इकाई के लोग, रिश्तेदार और कसबे के लोग दिनेश की वापसी पर अगवानी एवं स्वागत की तैयारी में जुटे रहे। मां कौशल्या देवी जहां बेटे की पसंद के पकवान बनाने के साथ ही उपस्थित लोगों को धूप से बचाने के लिए जहां टेंट लगवाने की बात कर रही हैं, वहीं राष्ट्रीय विश्वकर्मा महासभा के ब्लाक अध्यक्ष शिवमूरत विश्वकर्मा ने बताया कि संगठन ने दिनेश की वापसी पर बहरियाबाद के उदंती नदी के तटवर्ती शिव मंदिर दिनेश के स्वागत की तैयारी की है। शिव मंदिर ढोल-नगाड़े एवं आतिशबाजी के बीच जुलूस के शक्ल में दिनेश को घर लाया जाएगा।
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पति का चेहरा देख निहाल होगी पत्नी, बच्चोें को मिलेंगे पिता
परिवार सहित गांव के लोगों की आंखें निहार रही दिनेश को
नेसार फैज
बहरियाबाद। बेटे से बिछड़ने के वियोग में तड़प रही मां को तीन वर्षों बाद ठंडक मिलेगी, वहीं पत्नी के चेहरा भी अपने पति को देखकर चमक उठेगा। वहीं बच्चे भी बेसब्री से अपने पिता की राह तक रहे होंगे। बहरियाबाद कसबा में दिनेश विश्वकर्मा के घर कर माहौल पिछले कुछ दिनों से ऐसा ही है। पाकिस्तान के कराची स्थित मलीर जेल से तीन वर्ष बाद रिहा होने की सूचना घर पहुंचने के बाद से दिनेश के घर में ऐसा ही माहौल है। सिर्फ घरवाले ही नहीं बल्कि पूरा गांव उसके इंतजार में है। उसे लेने के लिए उसका भाई और बहनोई वाघा बार्डर गए हुए हैं। दिनेश की मां, पत्नी, बच्चे, उसकी बहनें सहित गांव के लोग पलकें बिछाकर उसकी एक झलक पाने को बेताब हैं।
कसबा निवासी दिनेश विश्वकर्मा ने अपने पिता राममूर्ति की मौत के बाद पैसे के अभाव में इंटर की पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी। परिवार के पालन-पोषण की चिंता में उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। वाराणसी में इलाज के बाद वह ठीक हुआ। रोजी-रोजी के सिलसिले में वह जुलाई 2011 में राजस्थान गया। यहां एक प्राइवेट कंपनी में आपरेटर पद पर कार्य करने लगा। इसी बीच एक माह के अंदर उसने दो बार घर फोन कर अपनी बेटी प्रिया से बात कर कुशलता जानी। इसके बाद परिवार के लोगों से उसका संपर्क टूट गया। संपर्क न होने से परिवार के लोगों की चिंता भी बढ़ती गई। 19 मई 2013 को एलआईयू इंस्पेक्टर आरपी चौधरी द्वारा दिनेश के पाकिस्तान में बंद होने की जानकारी परिवार के लोगों को हुई। यह सूचना मिलते ही पूरा परिवार और गांव वालों ने आला अफसरों से मिलकर दिनेश को छुड़ाने की गुहार लगाई। । तमाम लोगों की कवायद रंग लाई और पांच दिन पहले जैसे ही परिजनों को 26 मई को दिनेश की रिहाई की खबर मिली, उनके आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इसके साथ ही कसबे के लोगों में भी खुशी की लहर दौड़ गई।
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चार बजे बाघा बार्डर किया पार
बहरियाबाद। दिनेश विश्वकर्मा को लाने के लिए वाघा बार्डर गए उनके भाई रजनीश विश्वकर्मा ने अमर उजाला से मोबाइल पर बताया कि दिनेश ने सोमवार की शाम 4 बजे वाघा बार्डर पार किया। तत्पश्चात हम उन्हें लेकर बाघा पोस्ट पहुंचे। जहां हमें भोजन के लिए रोका गया। गुरुद्वारे से भोजन आने के बाद भोजन करके हम लोग अमृतसर पहुंचेंगे। यहां पर वेरिफिकेशन के बाद घर के लिए रवाना होे जाएंगे। बाघा बार्डर पार करने की सूचना मिलते की परिवार के लोग खुशी से उछल पड़े।
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तरसी निगाहों को मिलेगा सुकून
बहरियाबाद। फरियाद कर रही ये तरसी हुई निगाहें....कुछ ऐसी ही हालत दिनेश विश्वकर्मा की पत्नी रुक्मिणी देवी की है। लगभग तीन वर्षों की जुदाई के बाद एक-दो दिनों के अंदर ही पति के घर वापसी का अब उसे विश्वास हो गया है, तो घर की दहलीज पर बैठी पत्नी के साथ ही बूढ़ी मां कौशल्या देवी, बेटी प्रिया, पुत्र शिवम की निगाहें बार-बार अनायास की दरवाजे की तरफ जा रही है। एक लंबे अर्से में निराश हो चुकी मां को अपने लाल को कलेजे से लगाने का इंतजार है।
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बहनों को मिलेगा भाई का प्यार
बहरियाबाद। दिनेश के राजस्थान जाने से पूर्व उनकी पांचों बहनें शांति, सीमा, पूनम, नीलम, आशा अपने भाई से मिलने मायके आई थी। तब उन्हें इस एहसास नहीं था कि उनका इतनी बड़ी मुसीबत में फंसेगा। विगत तीन वर्षों से भाई की कलाई पर राखी बांधने से वंचित बहनें भाई की रिहाई की सूचना पाकर फूले नहीं समा रही हैं। भाई की एक झलक देखने के लिए बहने मायके आ चुकीं हैं। उन्हें इस बात का विश्वास हो चुका है कि इस बार रक्षाबंधन पर वह अपनी भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांध सकेगी।
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जुलूस की शक्ल में दिनेश आएगा घर
बहरियाबाद। पाकिस्तान के कराची के मलीर जेल में कैद दिनेश विश्वकर्मा की रिहाई की खबर से लोगों से खुशी का ठिकाना नहीं रह गया है। दिनेश के घर वालों के साथ ही राष्ट्रीय विश्वकर्मा महासभा, भाजपा बहरियाबाद इकाई के लोग, रिश्तेदार और कसबे के लोग दिनेश की वापसी पर अगवानी एवं स्वागत की तैयारी में जुटे रहे। मां कौशल्या देवी जहां बेटे की पसंद के पकवान बनाने के साथ ही उपस्थित लोगों को धूप से बचाने के लिए जहां टेंट लगवाने की बात कर रही हैं, वहीं राष्ट्रीय विश्वकर्मा महासभा के ब्लाक अध्यक्ष शिवमूरत विश्वकर्मा ने बताया कि संगठन ने दिनेश की वापसी पर बहरियाबाद के उदंती नदी के तटवर्ती शिव मंदिर दिनेश के स्वागत की तैयारी की है। शिव मंदिर ढोल-नगाड़े एवं आतिशबाजी के बीच जुलूस के शक्ल में दिनेश को घर लाया जाएगा।