{"_id":"5a11c97f4f1c1b71548be0ab","slug":"61511115135-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतिम समय में शुरू हो सकता है सियासत का असली खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतिम समय में शुरू हो सकता है सियासत का असली खेल
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। नगर निकाय चुनाव के सियासी अखाड़े में विभिन्न निकायों के अध्यक्ष पद के लिए कुल 66 प्रत्याशी ताल ठोंक रहे हैं। सभी की ओर से एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए कई दिनों से रणनीति बनाई जा रही है। राजनीति के खेल में दर्शक के रूप में खड़े मतदाताओं को अपने पक्ष में ताली बजवाने के लिए अंतिम समय में सियासत का असली खेल शुरू हो सकता है।
इस सियासी खेल में किसी भी दल का प्रत्याशी शिकस्त खाने को तैयार नहीं दिखाई दे रहा है। वह अपने-अपने तरीके से सियासी जंग फतह करने में लगे हुए हैं, लेकिन हर बार के चुनावों में जिन मतदाताओं ने फील गुड किया है, उन्हें इस बार भी इसी का इंतजार है। वैसे पिछले कई दिनों से नेता जी मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन मतदाताओं को पूरे मन से खुश नहीं कर पा रहे हैं। पिछले चुनाव में आयोग की सख्ती के बावजूद प्रत्याशियों ने अपना काम किया था। मतदाताओं को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इस बार भी प्रत्याशियों द्वारा यह काम किया जा रहा है, लेकिन दूसरे तरीकों से। ऐसे मतदाता प्रत्याशियों की खुलकर जय बोल रहे हैं। कुल मिलाकर प्रत्याशियों द्वारा चुनाव जीतने के लिए हर तरह का गुणा-गणित लगाया जा रहा है। कुर्सी पाने के लिए चुनाव के अंतिम समय में सियासत का असली खेल शुरू हो सकता है। प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाने से पीछे नहीं रह सकते हैं।
विज्ञापन
इस सियासी खेल में किसी भी दल का प्रत्याशी शिकस्त खाने को तैयार नहीं दिखाई दे रहा है। वह अपने-अपने तरीके से सियासी जंग फतह करने में लगे हुए हैं, लेकिन हर बार के चुनावों में जिन मतदाताओं ने फील गुड किया है, उन्हें इस बार भी इसी का इंतजार है। वैसे पिछले कई दिनों से नेता जी मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन मतदाताओं को पूरे मन से खुश नहीं कर पा रहे हैं। पिछले चुनाव में आयोग की सख्ती के बावजूद प्रत्याशियों ने अपना काम किया था। मतदाताओं को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इस बार भी प्रत्याशियों द्वारा यह काम किया जा रहा है, लेकिन दूसरे तरीकों से। ऐसे मतदाता प्रत्याशियों की खुलकर जय बोल रहे हैं। कुल मिलाकर प्रत्याशियों द्वारा चुनाव जीतने के लिए हर तरह का गुणा-गणित लगाया जा रहा है। कुर्सी पाने के लिए चुनाव के अंतिम समय में सियासत का असली खेल शुरू हो सकता है। प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाने से पीछे नहीं रह सकते हैं।
विज्ञापन