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ठिठुरकर पीड़ितों ने बिताई रात
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दुबिहां। करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के सोनवानी ग्रामसभा के जगदीशपुर की दलित और राजभर बस्ती में चूल्हे की चिंगारी से शनिवार को 50 झोपड़ियां जल कर राख हो गई थीं। इससे सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे आ गए। पीड़ितों ने खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हुए रात बिताई। दूसरे दिन रविवार को भी उन्हें प्रशासन की तरफ से कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पीड़ितों में निराशा है।
क्षेत्र के सोनवानी गांवसभा के जगदीशपुर के दलित और राजभर बस्ती में शनिवार को दिन में करीब 12 बजे दलित बस्ती निवासी अरुण की झोपड़ी में चूल्हे की राख से निकली चिंगारी से आग लग गई थी। इसी झोपड़ी की आग ने अन्य 49 झोपड़ियों को भी जद में ले लिया था। जब तक ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया था, जब तक 50 झोपड़ियां जल कर राख हो गई थी। उसमें रखा हजारों का गृहस्थी के सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। आग में झुलसने से पांच मवेशियों की मौत हो गई थी। आग में सब कुछ जल जाने के बाद पीड़ित खुले आसमान के नीचे आ गए थे। पीड़ितों ने ठिठुरते हुए किसी तरह से रात बिताई। दूसरे दिन भी प्रशासन की तरफ से पीड़ितों को कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। पीड़ित घूरा राम, छांगुर, मदन, गुलाबचंद, राजेंद्र आदि कहा कि अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। जबकि मौके पर उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद आए थे। ग्राम प्रधान ने अनाज भेजा है। कोई जनप्रतिनिधि भी हम लोगों का हाल जानने के लिए नहीं आया। हम लोगों को खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हुए रात काटनी पड़ी। इस संबंध में हलका लेखपाल सराफत अली ने कहा कि क्षति का आकलन कर रिपोर्ट भेज दी गई है। कुछ टेंट लगवाए गए हैं। बहुत जल्द ही और व्यवस्था कर दी जाएगी।
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क्षेत्र के सोनवानी गांवसभा के जगदीशपुर के दलित और राजभर बस्ती में शनिवार को दिन में करीब 12 बजे दलित बस्ती निवासी अरुण की झोपड़ी में चूल्हे की राख से निकली चिंगारी से आग लग गई थी। इसी झोपड़ी की आग ने अन्य 49 झोपड़ियों को भी जद में ले लिया था। जब तक ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया था, जब तक 50 झोपड़ियां जल कर राख हो गई थी। उसमें रखा हजारों का गृहस्थी के सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। आग में झुलसने से पांच मवेशियों की मौत हो गई थी। आग में सब कुछ जल जाने के बाद पीड़ित खुले आसमान के नीचे आ गए थे। पीड़ितों ने ठिठुरते हुए किसी तरह से रात बिताई। दूसरे दिन भी प्रशासन की तरफ से पीड़ितों को कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। पीड़ित घूरा राम, छांगुर, मदन, गुलाबचंद, राजेंद्र आदि कहा कि अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। जबकि मौके पर उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद आए थे। ग्राम प्रधान ने अनाज भेजा है। कोई जनप्रतिनिधि भी हम लोगों का हाल जानने के लिए नहीं आया। हम लोगों को खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हुए रात काटनी पड़ी। इस संबंध में हलका लेखपाल सराफत अली ने कहा कि क्षति का आकलन कर रिपोर्ट भेज दी गई है। कुछ टेंट लगवाए गए हैं। बहुत जल्द ही और व्यवस्था कर दी जाएगी।
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