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चर्चा में रहा अखिलेश का चरखा दाव
Updated Sat, 17 Feb 2018 12:32 AM IST
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चर्चा में रहा अखिलेश का आना
कभी धुर राजनीतिक विरोधी रहे ओपी के पिता की तेरही में पहुंचे अखिलेश
पूर्व सीएम के आने से पूर्वांचल की राजनीति में बही नई बयार
अमर उजाला ब्यूरो
गाजीपुर। सेवराई में शुक्रवार को हुए राजनीतिक जमावड़े में एक चर्चा आम थी कि अखिलेश ने आखिर ‘चरखा दांव’ लगा ही दिया। अखिलेश यादव यहां पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता ओमप्रकाश सिंह के पिता की तेरही में आए थे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के बीच चली राजनीतिक उठा-पटक के बाद यह पहला अवसर था जब अखिलेश ओमप्रकाश सिंह के गांव पहुंचे थे। त्रयोदशाह के अवसर पर अखिलेश की इस यात्रा ने यह साफ कर दिया वह और मुलायम सिंह एक हैं। चाहे दोनों के प्रबल समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ जितना भी जोर लगाएं।
लोग वह दौर भूले नहीं हैं जब पूर्वांचल के कद्दावर सपाई तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पाले में खड़े थे और अखिलेश यादव की राजनीति को उखाड़ फेंकने का पुरजोर प्रयास कर रहे थे। चाहे वह पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी हो, नारद राय अथवा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह सभी अखिलेश के राजनीतिक वट वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए पूरा दमखम लगाए हुए थे। उस समय रामगोविंद चौधरी, पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, विधायक सुभाष पासी, विरेंद्र यादव सहित चंद नेता अखिलेश के पक्ष में खड़े थे। बाद के समझौते में ओमप्रकाश सिंह को टिकट जरूर मिला, लेकिन तब भी तल्खी इतनी थी कि अखिलेश यहां चुनावी सभा तक करने नहीं आए थे। मुलायम सिंह यादव की सभा के दम पर ओमप्रकाश ने चुनाव लड़ा और हार गए। लेकिन मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी माने जाने वाले ओम प्रकाश सिंह के पिता की तेरही में मुलायम सिंह का न आना और अखिलेश सिंह का आना यहां के राजनीतिक गलियारे में नई चर्चा को जन्म दे गया है। मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक जमीन पर अखिलेश का चरखा दांव आने वाले 2019 के चुनाव में कितना असर दिखाएगा, यह आने वाला वक्त बताएगा।कुछ दिन पहले तक यह भी चर्चा जोरों पर थी कि ओमप्रकाश सिंह के यहां मुलायम सिह और शिवपाल सिंह यादव जरूर आएंगे लेकिन अखिलेश यादव के आने की तिथि तय होते ही इन अटकलों पर विराम लग गया। शुक्रवार को वह सब कुछ देखने को मिला जिसकी पुराने सपाइयों को उम्मीद नहीं थी।
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कभी धुर राजनीतिक विरोधी रहे ओपी के पिता की तेरही में पहुंचे अखिलेश
पूर्व सीएम के आने से पूर्वांचल की राजनीति में बही नई बयार
अमर उजाला ब्यूरो
गाजीपुर। सेवराई में शुक्रवार को हुए राजनीतिक जमावड़े में एक चर्चा आम थी कि अखिलेश ने आखिर ‘चरखा दांव’ लगा ही दिया। अखिलेश यादव यहां पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता ओमप्रकाश सिंह के पिता की तेरही में आए थे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के बीच चली राजनीतिक उठा-पटक के बाद यह पहला अवसर था जब अखिलेश ओमप्रकाश सिंह के गांव पहुंचे थे। त्रयोदशाह के अवसर पर अखिलेश की इस यात्रा ने यह साफ कर दिया वह और मुलायम सिंह एक हैं। चाहे दोनों के प्रबल समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ जितना भी जोर लगाएं।
लोग वह दौर भूले नहीं हैं जब पूर्वांचल के कद्दावर सपाई तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के पाले में खड़े थे और अखिलेश यादव की राजनीति को उखाड़ फेंकने का पुरजोर प्रयास कर रहे थे। चाहे वह पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी हो, नारद राय अथवा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह सभी अखिलेश के राजनीतिक वट वृक्ष को उखाड़ फेंकने के लिए पूरा दमखम लगाए हुए थे। उस समय रामगोविंद चौधरी, पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, विधायक सुभाष पासी, विरेंद्र यादव सहित चंद नेता अखिलेश के पक्ष में खड़े थे। बाद के समझौते में ओमप्रकाश सिंह को टिकट जरूर मिला, लेकिन तब भी तल्खी इतनी थी कि अखिलेश यहां चुनावी सभा तक करने नहीं आए थे। मुलायम सिंह यादव की सभा के दम पर ओमप्रकाश ने चुनाव लड़ा और हार गए। लेकिन मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी माने जाने वाले ओम प्रकाश सिंह के पिता की तेरही में मुलायम सिंह का न आना और अखिलेश सिंह का आना यहां के राजनीतिक गलियारे में नई चर्चा को जन्म दे गया है। मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक जमीन पर अखिलेश का चरखा दांव आने वाले 2019 के चुनाव में कितना असर दिखाएगा, यह आने वाला वक्त बताएगा।कुछ दिन पहले तक यह भी चर्चा जोरों पर थी कि ओमप्रकाश सिंह के यहां मुलायम सिह और शिवपाल सिंह यादव जरूर आएंगे लेकिन अखिलेश यादव के आने की तिथि तय होते ही इन अटकलों पर विराम लग गया। शुक्रवार को वह सब कुछ देखने को मिला जिसकी पुराने सपाइयों को उम्मीद नहीं थी।
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