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विभिन्न मार्गो पर पूरे दिन लगा जाम, घंटों फंसे रहे लोग
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:35 PM IST
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गाजीपुर/सुहवल। गाजीपुर-जमानिया-सैय्यदराजा राष्ट्रीय राजमार्ग -24/97 पर मंगलवार की सुबह छह बजे अचानक जाम लग गया। कुछ ही देर में ताड़ीघाट-बारा राष्ट्रीय राजमार्ग सहित अन्य मार्गों पर वाहनों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी जाम में रुकना पड़ा। ऐसे में आवागमन करने वालों की रफ्तार थम गई। पूरा हमीद सेतु वाहनों और पैदल आने-जाने वालों से भर गया। जाम इस कदर लगा था कि लोगों का दिमाग काम नहीं कर रहा था। वह सोचते रहे कि कैसे इस मुसीबत से निकले। भीषण जाम में लोगों यह कहते मिले कि हाय राम, कैसे जाम से निकलें। किचकिच और झड़प के बीच पुलिस कर्मी जाम समाप्त कराने के लिए हांफते रहे। नौ घंटे बाद अपराह्न तीन बजे किसी तरह आवागमन सुचारु होने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
गाजीपुर-जमानिया-सैय्यदराजा राष्ट्रीय राजमार्ग 24/97 पर आज सुबह करीब छह बजे मेदिनीपुर तिराहा के पास नो-इंट्री के दौरान दो वाहनों के आमने-सामने आने तथा एक वाहन का पहिया धंसने से जाम लग गया। फिर क्या था, एक के बाद एक वाहन खड़े होते चले गए। कुछ ही देर में ताड़ीघाट-बारा मार्ग सहित अन्य मार्गो पर जाम की जकड़न शुरू हो गई। हमीद सेतु पर भारी व छोटे वाहन सुबह से शाम तक फंसे रहे। जाम इस कदर फैला हुआ था कि लोगों का पैदल चलना भी कठिन हो गया था। वाहन की कौन कहे, यहां पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया था। भीड़ में धक्का-मुक्की के बीच सैकड़ों महिला-पुरुष इस बात के लिए इधर-उधर नजर दौड़ाते रहे कि शायद कोई रास्ता दिख जाए, जिससे वह इस भीड़ से निकल सके, लेकिन कोई रास्ता नजर न आने से लोग हांफते रहे। आगे-पीछे हटने, अगल-बगल होने को लेकर लोगों में कहासुनी के साथ ही तीखी झड़प होती रही। पसीना पोंछते हुए हर कोई अपने को इस बात के लिए कोसता रहा कि कहां से फंस गए जाम में। जाम की जहमत इस कदर थी कि पुलिस कर्मियों को भी नहीं समझ में आ रहा था कि आखिरकार कैसे वाहनों की रफ्तार को आगे बढ़ाए। आवागमन सुचारु कराने के लिए वह लोगों से वाहनों को आगे-पीछे करने को कहते रहे। इसको लेकर उनकी वाहनों चालकों से तीखी झड़प भी होती रही। दिन में तीन बजे आवागमन सुचारु होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। जाम की वजह से लोग समय से गंतव्य तक नहीं पहुंच सके। इस संबंध में जिलाधिकारी के बालाजी ने कहा कि जाम की जानकारी मिली है। यातायात व्यवस्था को बहाल करने के लिए मातहतों को निर्देशित किया गया है। उन्हें आदेशित किया गया है कि जो वाहन जाम लगने का कारण बनते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सुहवल। गाजीपुर-जमानिया-सैय्यदराजा राष्ट्रीय राजमार्ग 24/97 सहित ताड़ीघाट-बारा, राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ ही अन्य मार्गों लगे जाम ने आवागमन करने वालों के मुसीबत में डाल दिया था। मार्ग पर पैदल निकलने की भी जगह नहीं बची थी। जाम से निकलने के लिए तमाम बाइक सवारों के साथ ही पैदल आवागमन करने वालों ने हमीद सेतु के नीचे से निर्माणाधीन रेल कम रोड ब्रिज जाने वाले कच्चे मार्ग से होते हुए मेदिनीपुर गांव निकलते रहे। जबकि इस मार्ग पर आरबीएनएल द्वारा आवागमन प्रतिबंधित किया गया, लेकिन जाम को देखते हुए कर्मचारियों आवागमन की इजाजत दे दी थी।
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सुहवल। जाम इस कदर लगा था कि इसमें फंसे लोगों के दिमाग काम नहीं कर रहा था। वह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिरकार इस जहमत से कैसे निकले ? खासकर वे लोग ज्यादा परेशान थे कि जो जरूरी कार्यों के लिए घर से निकले थे और उन्हें समय से पहुंचना था। ऐसे तमाम लोगों को जब कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया तो वह गंगा किनारे पहुंचे। नावों से गंगा पार आए। नाव पर कई लोग बाइकों के साथ भी सवार थे। मौके का लाभ उठाते हुए नाविकों ने खासकर बाइक सहित सवारी करने वालों से सौ से लेकर डेढ़ सौ तक वसूल किया। मजबूरीवश लोगों को देना पड़ा।
सुहवल। गंगा पार से बड़ी संख्या में दुधिए शहर की चाय-मिठाई की दुकानों के साथ ही लोगों के घरों में दूध देने के लिए आते हैं। रोज की तरह मंगलवार को सुबह भी वह दूध लेकर घर निकले थे, लेकिन गंगा पार आने से पहले ही जाम में फंस गए। भीड़ के बीच खड़े होकर वह घंटों आवागमन सुचारु होने का इंतजार करते रहे, लेकिन जब उन्हें ऐसा लगा कि जाम से इतनी जल्दी मुक्ति मिलने वाली नहीं है, उनकी चिंता इस बात से बढ़ गई कि दूध फट सकता है समय से लोगों तक दूध न पहुंचने से उनकी नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, इसलिए अधिकांश जाम को कोसते हुए घरों को वापस लौट हो गए। वापस जाते समय दूध का कुछ पैसा मिल जाए, इसलिए कई दूधियों ने चाय के दुकानदारों को औने-पौने दाम में दूध की बिक्री की।
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गाजीपुर-जमानिया-सैय्यदराजा राष्ट्रीय राजमार्ग 24/97 पर आज सुबह करीब छह बजे मेदिनीपुर तिराहा के पास नो-इंट्री के दौरान दो वाहनों के आमने-सामने आने तथा एक वाहन का पहिया धंसने से जाम लग गया। फिर क्या था, एक के बाद एक वाहन खड़े होते चले गए। कुछ ही देर में ताड़ीघाट-बारा मार्ग सहित अन्य मार्गो पर जाम की जकड़न शुरू हो गई। हमीद सेतु पर भारी व छोटे वाहन सुबह से शाम तक फंसे रहे। जाम इस कदर फैला हुआ था कि लोगों का पैदल चलना भी कठिन हो गया था। वाहन की कौन कहे, यहां पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया था। भीड़ में धक्का-मुक्की के बीच सैकड़ों महिला-पुरुष इस बात के लिए इधर-उधर नजर दौड़ाते रहे कि शायद कोई रास्ता दिख जाए, जिससे वह इस भीड़ से निकल सके, लेकिन कोई रास्ता नजर न आने से लोग हांफते रहे। आगे-पीछे हटने, अगल-बगल होने को लेकर लोगों में कहासुनी के साथ ही तीखी झड़प होती रही। पसीना पोंछते हुए हर कोई अपने को इस बात के लिए कोसता रहा कि कहां से फंस गए जाम में। जाम की जहमत इस कदर थी कि पुलिस कर्मियों को भी नहीं समझ में आ रहा था कि आखिरकार कैसे वाहनों की रफ्तार को आगे बढ़ाए। आवागमन सुचारु कराने के लिए वह लोगों से वाहनों को आगे-पीछे करने को कहते रहे। इसको लेकर उनकी वाहनों चालकों से तीखी झड़प भी होती रही। दिन में तीन बजे आवागमन सुचारु होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। जाम की वजह से लोग समय से गंतव्य तक नहीं पहुंच सके। इस संबंध में जिलाधिकारी के बालाजी ने कहा कि जाम की जानकारी मिली है। यातायात व्यवस्था को बहाल करने के लिए मातहतों को निर्देशित किया गया है। उन्हें आदेशित किया गया है कि जो वाहन जाम लगने का कारण बनते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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सुहवल। गाजीपुर-जमानिया-सैय्यदराजा राष्ट्रीय राजमार्ग 24/97 सहित ताड़ीघाट-बारा, राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ ही अन्य मार्गों लगे जाम ने आवागमन करने वालों के मुसीबत में डाल दिया था। मार्ग पर पैदल निकलने की भी जगह नहीं बची थी। जाम से निकलने के लिए तमाम बाइक सवारों के साथ ही पैदल आवागमन करने वालों ने हमीद सेतु के नीचे से निर्माणाधीन रेल कम रोड ब्रिज जाने वाले कच्चे मार्ग से होते हुए मेदिनीपुर गांव निकलते रहे। जबकि इस मार्ग पर आरबीएनएल द्वारा आवागमन प्रतिबंधित किया गया, लेकिन जाम को देखते हुए कर्मचारियों आवागमन की इजाजत दे दी थी।
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सुहवल। जाम इस कदर लगा था कि इसमें फंसे लोगों के दिमाग काम नहीं कर रहा था। वह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिरकार इस जहमत से कैसे निकले ? खासकर वे लोग ज्यादा परेशान थे कि जो जरूरी कार्यों के लिए घर से निकले थे और उन्हें समय से पहुंचना था। ऐसे तमाम लोगों को जब कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया तो वह गंगा किनारे पहुंचे। नावों से गंगा पार आए। नाव पर कई लोग बाइकों के साथ भी सवार थे। मौके का लाभ उठाते हुए नाविकों ने खासकर बाइक सहित सवारी करने वालों से सौ से लेकर डेढ़ सौ तक वसूल किया। मजबूरीवश लोगों को देना पड़ा।
सुहवल। गंगा पार से बड़ी संख्या में दुधिए शहर की चाय-मिठाई की दुकानों के साथ ही लोगों के घरों में दूध देने के लिए आते हैं। रोज की तरह मंगलवार को सुबह भी वह दूध लेकर घर निकले थे, लेकिन गंगा पार आने से पहले ही जाम में फंस गए। भीड़ के बीच खड़े होकर वह घंटों आवागमन सुचारु होने का इंतजार करते रहे, लेकिन जब उन्हें ऐसा लगा कि जाम से इतनी जल्दी मुक्ति मिलने वाली नहीं है, उनकी चिंता इस बात से बढ़ गई कि दूध फट सकता है समय से लोगों तक दूध न पहुंचने से उनकी नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, इसलिए अधिकांश जाम को कोसते हुए घरों को वापस लौट हो गए। वापस जाते समय दूध का कुछ पैसा मिल जाए, इसलिए कई दूधियों ने चाय के दुकानदारों को औने-पौने दाम में दूध की बिक्री की।