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छोटे लोहिया की मनाई गई
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:16 PM IST
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गाजीपुर। जनेश्वर मिश्रा सच्चे समाजवादी थे। अन्याय और शोषण के खिलाफ आजीवन संघर्षरत रहे। उनमें गरीबों, शोषितों के प्रति पीड़ा थी। वह हमेशा कहते थे कि गरीबों के आंसू पोछना ही सच्चा समाजवाद है। यह बातें छोटे लोहिया स्व. जनेश्वर मिश्र की 8वीं पुण्यतिथि पर पार्टी कार्यालय समता भवन पर आयोजित विचार गोष्ठी में जिलाध्यक्ष डॉ. नन्हकू यादव ने कहीं।
उन्होंने कहा कि स्व. जनेश्वर मिश्र ने आजीवन सरलता और सादगी की जिंदगी व्यतीत की। वह सदैव सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन में आम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पैरोकारी करते रहे। उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया ने कहा था कि यदि जनेश्वर मिश्र जैसा एक भी नेता देश में मौजूद रहेगा, तो कोई भी तानाशाही ताकत देश में सर नहीं उठा सकती। पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि जनेश्वर मिश्र वैचारिक राजनीति के प्रकाश स्तंभ थे। छात्र जीवन से लेकर अंतिम समय तक वह जन आंदोलनों की अगुवाई करते रहे। वह कहते थे कि समाजवादियों को देश की तस्वीर बदलने के लिए भारी बलिदानों के लिए तैयार रहना होगा। वह कभी कुर्सी के गुलाम नहीं हुए। जब सिद्धांत और सरकार में से एक को चुनने का अवसर आया तो बिना किसी हिचक के सरकार से इस्तीफा दे दिया। पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि वह समाजवाद और लोकतंत्र के जिए जीवन पर्यंत समर्पित एवं संघर्षरत रहे। इस मौके पर किशन साहू, अरुण कुमार श्रीवास्तव, परशुराम बिंद, दिनेश यादव, कन्हैया लाल विश्वकर्मा, चंद्रिका यादव, राजेश यादव, अमल यादव, राहुल सिंह, नन्हे खां, तहसीन अहमद, राजेश कुमार यादव, विवेक सिंह शम्मी आदि मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन महासचिव सदानंद यादव ने किया।
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उन्होंने कहा कि स्व. जनेश्वर मिश्र ने आजीवन सरलता और सादगी की जिंदगी व्यतीत की। वह सदैव सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन में आम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पैरोकारी करते रहे। उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया ने कहा था कि यदि जनेश्वर मिश्र जैसा एक भी नेता देश में मौजूद रहेगा, तो कोई भी तानाशाही ताकत देश में सर नहीं उठा सकती। पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि जनेश्वर मिश्र वैचारिक राजनीति के प्रकाश स्तंभ थे। छात्र जीवन से लेकर अंतिम समय तक वह जन आंदोलनों की अगुवाई करते रहे। वह कहते थे कि समाजवादियों को देश की तस्वीर बदलने के लिए भारी बलिदानों के लिए तैयार रहना होगा। वह कभी कुर्सी के गुलाम नहीं हुए। जब सिद्धांत और सरकार में से एक को चुनने का अवसर आया तो बिना किसी हिचक के सरकार से इस्तीफा दे दिया। पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि वह समाजवाद और लोकतंत्र के जिए जीवन पर्यंत समर्पित एवं संघर्षरत रहे। इस मौके पर किशन साहू, अरुण कुमार श्रीवास्तव, परशुराम बिंद, दिनेश यादव, कन्हैया लाल विश्वकर्मा, चंद्रिका यादव, राजेश यादव, अमल यादव, राहुल सिंह, नन्हे खां, तहसीन अहमद, राजेश कुमार यादव, विवेक सिंह शम्मी आदि मौजूद रहे। गोष्ठी का संचालन महासचिव सदानंद यादव ने किया।
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